Gold-Plated Ramcharitmanas Missing: अयोध्या राम मंदिर में दान की गई 147 किलो की सोने-चांदी की रामचरितमानस गायब
पूर्व गृह सचिव एस लक्ष्मीनारायण ने 8 अप्रैल 2024 को दान की थी बेशकीमती पांडुलिपि, 522 पन्नों पर अंकित हैं तुलसीदास के 10,902 श्लोक
अयोध्या। श्रीराम मंदिर चढ़ावा गबन मामले में एक और खुलासा हुआ है। मंदिर में करीब साढ़े आठ सौ ग्राम सोने के पन्नों वाली रामचरितमानस का कोई पता नहीं है। इसे दान देने वाले पूर्व गृह सचिव एस लक्ष्मीनारायण के अनुसार 8 अप्रैल 2024 को उन्होंने यह बेशकीमती पांडुलिपि मंदिर में दान की थी, लेकिन मांगने के बावजूद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से कोई रसीद नहीं दी गई।
बता दें कि लक्ष्मीनारायण और उनकी पत्नी सरस्वती ने राम मंदिर ट्रस्ट को सोने की परत चढ़ी रामचरितमानस दान की थी। ये पांडुलिपि सोने, चांदी और तांबे से बनी है, जिसका वजन करीब 147 किलोग्राम है। इसमें सोने की परत चढ़े 522 पन्ने हैं, जिन पर गोस्वामी तुलसीदास जी की रामचरितमानस के सभी 10,902 श्लोक अंकित हैं।
मां-पत्नी के गहने गलाकर बनवाई थी अमूल्य पांडुलिपि
लक्ष्मीनारायण के अनुसार, उन्होंने अपनी मां और पत्नी के गहने गलाकर यह बेशकीमती रामचरितमानस तैयार करवाई थी। लेकिन अभी वह कहां है, इसका कोई पता नहीं है। पूर्व गृह सचिव के अनुसार उन्होंने RSS प्रमुख मोहन भागवत से भी मुलाकात कर इस मामले को उठाया था। लेकिन उनके आश्वासन के एक साल बाद भी कोई मदद नहीं मिली।
इतना ही नहीं, लक्ष्मीनारायण सीएम योगी के सलाहकार अवनीश अवस्थी से भी मिले। उन्हें परेशानी बताने पर अवस्थी ने कहा कि “दान दिया था तो दान समझकर जाने दीजिए।” वहीं चंपत राय से मुलाकात हुई तो उन्होंने कहा कि “मैं जो चाहूंगा वही मंदिर में होगा।”
दर्शन के लिए रखी गई थी पांडुलिपि, फिर अचानक हटाई गई
लक्ष्मीनारायण के अनुसार, रामचरितमानस को शुरू में मंदिर में दर्शन के लिए रखा गया था। भक्त इसका दर्शन कर सकते थे और रोजाना इसकी पूजा भी होती थी। लेकिन अचानक इसे हटा दिया गया और अभी वह कहां है, इसकी कोई जानकारी नहीं है।
यह मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच सकता है। लक्ष्मीनारायण ने इस मामले में ट्रस्ट के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है और मांग की है कि इस अमूल्य पांडुलिपि का पता लगाया जाए। फिलहाल, उत्तर प्रदेश पुलिस ने इस मामले में जांच शुरू कर दी है।
इससे पहले भी मंदिर में दान की गई चांदी की ईंटों और अन्य वस्तुओं के गायब होने के मामले सामने आ चुके हैं, जिससे ट्रस्ट की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।
