अवैध धान परिवहन पर पुलिस ने बनाया रिकॉर्ड, 85 वाहनों से 4504 क्विंटल धान जब्त; बोगस खरीदी पर लगी लगाम

गरियाबंद। इस साल समर्थन मूल्य पर धान खरीदी को प्रभावित करने वाले ओडिशा से आने वाले अवैध धान पर गरियाबंद पुलिस ने सख्त कार्रवाई कर नया रिकॉर्ड कायम किया है। जिले में कुल 85 वाहनों से 4504.25 क्विंटल धान जब्त किया गया, जिसकी बाजार मूल्य करीब 1 करोड़ 39 लाख रुपये है।

सर्वाधिक जब्ती देवभोग थाना क्षेत्र में हुई, जहां पुलिस ने 41 वाहनों से 1576 क्विंटल धान पकड़ा। अन्य सीमावर्ती थानों ने भी मिलकर इस अभियान में बड़ी सफलता हासिल की। तत्कालीन पुलिस कप्तान निखिल राखेचा और वर्तमान एसपी वेद व्रत सिरमौर्य की रणनीति के तहत नाकेबंदी, चेकिंग और सतत निगरानी बढ़ाई गई थी, जिसका असर साफ दिखा।

इसके अलावा राजस्व, सहकारिता, मंडी और खाद्य विभाग ने भी 30 से अधिक वाहनों को पकड़ा और 5 हजार क्विंटल से ज्यादा ओडिशा का धान रोका। लगातार कार्रवाई और सख्ती के चलते जब्त मात्रा से तीन गुना ज्यादा धान की आवक थम गई।

टोकन निरस्त होने से 259 किसान प्रभावित

कार्रवाई का सीधा असर खरीदी केंद्रों पर पड़ा। ओडिशा का धान समय पर उपलब्ध न होने से कई किसानों के टोकन निरस्त हो गए। देवभोग ब्रांच मैनेजर के अनुसार, 9 केंद्रों में 112 किसानों का 6110 क्विंटल का टोकन निरस्त हुआ। गोहरापदर ब्रांच में 12 केंद्रों पर 147 किसानों का 6900 क्विंटल का टोकन कट गया। कुल 259 किसानों का 13 हजार क्विंटल धान उपलब्ध नहीं कराया जा सका।

जिला खाद्य अधिकारी का बयान

जिला खाद्य अधिकारी अरविंद दुबे ने कहा, “कार्रवाई और निगरानी का सकारात्मक असर है कि धान की आवक केंद्रों में स्थानीय उत्पादन के अनुपात में बनी रही। टोकन निरस्त होने के कई कारण हो सकते हैं, लेकिन ओडिशा से धान उपलब्ध न होना प्रमुख वजह है। इलाके में औसत उपज 15 क्विंटल प्रति एकड़ है, ऐसे में अतिरिक्त मात्रा के लिए ओडिशा पर निर्भरता थी, जिस पर अब लगाम लगी है।”

तहसीलदार ने बताया बोगस खरीदी पर अंकुश

देवभोग तहसीलदार अजय चंद्रवंशी ने कहा, “कार्रवाई से बोगस खरीदी पर पूरी तरह लगाम लग गई है। ओडिशा पर निर्भरता खत्म हुई। जहां उत्पादन कम है, वहां किसानों का रकबा समर्पण कराया जा रहा है। पटवारियों से जल्द भौतिक सत्यापन कराया जाएगा ताकि किसानों के पास वास्तविक धान की मात्रा का रिकॉर्ड बने।”

इस कार्रवाई से गरियाबंद में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी अधिक पारदर्शी और स्थानीय उत्पादकों के हित में हुई है। पुलिस और प्रशासन की सतर्कता से ओडिशा से अवैध धान की तस्करी पर ब्रेक लगा है, जिससे छत्तीसगढ़ के किसानों को सीधा लाभ मिल रहा है।

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