यूरोप में भीषण गर्मी का कहर: कई देशों में रिकॉर्ड तापमान, फ्रांस में 1000 से ज्यादा मौतें

Europe heatwave record 2026 deaths

फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन, स्विट्जरलैंड और इटली समेत कई देशों में जून की रिकॉर्डतोड़ गर्मी, सड़कें पिघलने लगीं, रेड अलर्ट जारी

 

पेरिस/बर्लिन। यूरोप इस समय भीषण गर्मी की चपेट में है। फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन, इटली, स्पेन, स्विट्जरलैंड और डेनमार्क समेत कई देशों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के आसपास या उससे ऊपर पहुंच गया है। लगातार पड़ रही भीषण गर्मी के कारण जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। फ्रांस में चार दिनों के भीतर 1,000 से अधिक लोगों की मौत की खबर है, जबकि कई देशों में जून महीने के तापमान के पुराने रिकॉर्ड टूट गए हैं।

 

फ्रांस में चार दिनों में 1000 से ज्यादा मौतें

फ्रांस की स्वास्थ्य एजेंसी के अनुसार 24 जून से 27 जून के बीच हीटवेव के कारण 1,000 से अधिक लोगों की मौत हुई है। मृतकों में लगभग 85 प्रतिशत बुजुर्ग बताए गए हैं। अधिकांश मौतें घरों और वृद्ध देखभाल केंद्रों में हुई हैं। अधिकारियों का कहना है कि विस्तृत रिपोर्ट आने के बाद मृतकों की संख्या और बढ़ सकती है।

 

स्पेन में भी गर्मी का असर गंभीर है। वहां के MoMo मॉनिटरिंग सिस्टम के अनुसार रविवार से गुरुवार के बीच 327 लोगों की मौत दर्ज की गई है।

 

जर्मनी, स्विट्जरलैंड और डेनमार्क में टूटे रिकॉर्ड

जर्मनी में लगातार दूसरे दिन नया तापमान रिकॉर्ड दर्ज किया गया। मॉकर्न-ड्रेविट्ज में 41.5 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया, जबकि एक दिन पहले सारब्रुकन में 41.3 डिग्री दर्ज हुआ था। भीषण गर्मी के कारण कई स्थानों पर सड़कें पिघलने लगी हैं।

 

स्विट्जरलैंड के बासेल शहर में जून का नया रिकॉर्ड 39 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं डेनमार्क में 1874 से रिकॉर्ड शुरू होने के बाद सबसे अधिक 37 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया। चेक गणराज्य में 40.8 डिग्री सेल्सियस के साथ नया ऑल-टाइम रिकॉर्ड बना, जबकि ब्रिटेन के सफोक स्थित सेंटन डाउनहैम में जून का नया रिकॉर्ड 37.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

 

इटली और ब्रिटेन में रेड अलर्ट

इटली के 18 प्रमुख शहरों, जिनमें रोम, मिलान, वेनिस, फ्लोरेंस और ट्यूरिन शामिल हैं, में रेड हीट अलर्ट जारी किया गया है। वहीं ब्रिटेन में भीषण गर्मी के चलते 1,000 से अधिक स्कूल बंद कर दिए गए हैं। लंदन एम्बुलेंस सेवा के अनुसार आपातकालीन 999 कॉल्स में करीब 50 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।

 

 

इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी पड़ा असर

गर्मी का असर केवल लोगों की सेहत तक सीमित नहीं है। जर्मनी, डेनमार्क और ब्रिटेन में कई जगह सड़कें पिघलने लगी हैं, जबकि ब्रिटेन के शेफील्ड शहर में ट्राम सेवा को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार इस बार की भीषण गर्मी का मुख्य कारण ‘हीट डोम’ नामक उच्च दबाव प्रणाली है, जिसने यूरोप के बड़े हिस्से को अपनी चपेट में ले लिया है।

 

 

Read more- 

Palamu Wildlife Smuggling: पलामू में इंटरनेशनल वाइल्डलाइफ तस्करी रैकेट का खुलासा: सांप का जहर और पेंगोलिन शल्क की बड़ी बरामदगी

 

Youthwings