कर्मचारियों के लिए खुशखबरी: लागू होगा EPFO का नया नियम, 51 लाख लोगों का बढ़ेगा रिटायरमेंट फंड

नई दिल्ली। देश के करोड़ों कर्मचारियों के भविष्य और सामाजिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। केंद्रीय कैबिनेट ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के तहत अनिवार्य कवरेज की वेतन सीमा (Wage Limit) बढ़ाने को हरी झंडी दे दी है। अब यह सीमा 15,000 से बढ़ाकर 25,000 रुपये प्रति माह कर दी गई है। यह नया नियम कल यानी 17 सितंबर से लागू हो जाएगा। सरकार के इस फैसले से करीब 51 लाख अतिरिक्त कर्मचारियों को सीधा लाभ मिलेगा और वे अनिवार्य पीएफ व पेंशन के दायरे में आ सकेंगे।

12 साल बाद हुआ नियमों में बदलाव

इससे पहले सरकार ने सितंबर 2014 में पीएफ कवरेज की सीमा बढ़ाकर 15,000 रुपये की थी। यानी पूरे 12 साल बाद इसमें संशोधन किया गया है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि पिछले एक दशक में कर्मचारियों की आय और संगठित क्षेत्र में नौकरियों का दायरा काफी बढ़ा है। इसी को देखते हुए कर्मचारियों को बेहतर सामाजिक सुरक्षा और पेंशन का लाभ देने के लिए यह कदम उठाया गया है।

आपकी जेब और बचत पर क्या असर होगा?

पीएफ नियम में कर्मचारी और कंपनी दोनों मिलकर 12-12% का योगदान करते हैं। कंपनी के हिस्से का एक भाग कर्मचारी की पेंशन (EPS) में जाता है।

पुराना नियम: मान लीजिए किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी 20,000 महीना है। पुराने नियम में 15,000 की तय सीमा के कारण उसका पीएफ केवल 1,800 कटता था और कंपनी भी 1,800 ही मिलाती थी।

नया नियम: अब पूरी 20,000 सैलरी पर 12% के हिसाब से 2,400 पीएफ कटेगा और कंपनी भी अपनी ओर से पूरे 2,400 जमा करेगी।

असर: कर्मचारी के हाथ में आने वाली सैलरी में कुछ सौ रुपये कम जरूर दिखेंगे, लेकिन कंपनी के बड़े योगदान से पीएफ खाते में हर महीने ज्यादा पैसा जमा होगा, जिससे रिटायरमेंट के समय एक बहुत बड़ा फंड तैयार होगा।

सरकार पर पड़ेगा 11,339 रुपये करोड़ का अतिरिक्त बोझ

पेंशन में सरकार के तय अंशदान के चलते इस फैसले से केंद्र सरकार के खजाने पर सालाना लगभग 11,339 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ेगा। मौजूदा समय में सरकार की वार्षिक बजटीय मदद करीब 10,250 करोड़ रुपये है। अनुमान है कि अगले 5 वर्षों में सरकार का कुल खर्च बढ़कर लगभग 56,696 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। सरकार का मानना है कि यह बदलाव कर्मचारियों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाएगा और बुढ़ापे में उनकी पेंशन व जमा पूंजी को पहले से कहीं ज्यादा सुरक्षित करेगा।

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