यात्री बसें बनीं माल ढोने का जरिया, लंबी दूरी की सेवाओं में नियमों की अनदेखी पर सवाल

लंबी दूरी की यात्री बसों में अब यात्रियों से ज्यादा सामान ढोने का चलन तेजी से बढ़ता जा रहा है। बस ऑपरेटर डीजल की बढ़ी लागत की भरपाई के लिए यात्रियों के बजाय माल परिवहन पर अधिक ध्यान दे रहे हैं। इससे न केवल यात्री सुविधाएं प्रभावित हो रही हैं, बल्कि सड़क सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

सूत्रों के मुताबिक कई रूटों पर चलने वाली बसों में ऑनलाइन बुकिंग के जरिए माल की ढुलाई की जा रही है। बस स्टैंड की बजाय कई जगहों पर सड़कों और सर्विस लेन पर ही बसों की छतों पर सामान लोड किया जाता है, जो नियमों का खुला उल्लंघन है।

यात्री सुरक्षा पर खतरे की आशंका

यात्री बसों में तय सीमा से अधिक सामान लोड करने से वाहनों का संतुलन बिगड़ने और दुर्घटना की आशंका बढ़ने की बात विशेषज्ञों द्वारा कही जा रही है। नियमों के अनुसार यात्री बसों में केवल यात्रियों का सामान ही ले जाया जा सकता है, लेकिन इसका पालन कई जगहों पर नहीं हो रहा है।

कार्रवाई के नाम पर केवल चालान

परिवहन विभाग और ट्रैफिक पुलिस द्वारा समय-समय पर जांच और कार्रवाई की जाती है, लेकिन आरोप है कि यह कार्रवाई केवल औपचारिकता तक सीमित रहती है। मामूली जुर्माना लगाकर मामलों को निपटा दिया जाता है, जिससे बस ऑपरेटरों के हौसले और बढ़ते जा रहे हैं।

बसों में अवैध माल ढुलाई के मामले पहले भी आए सामने

पहले भी कई बार यात्री बसों में संदिग्ध और अवैध सामान की ढुलाई के मामले सामने आ चुके हैं। एक मामले में बस में बड़ी मात्रा में छोटे नोटों का जखीरा मिलने की घटना ने भी सवाल खड़े किए थे कि आखिर बसों के जरिए क्या-क्या ढोया जा रहा है।

किन रूटों पर ज्यादा स्थिति गंभीर

जानकारी के अनुसार रायपुर से ओडिशा, इंदौर और मध्य प्रदेश की ओर जाने वाले रूटों पर बसों में माल ढुलाई अधिक देखी जा रही है। कई बार बसों में यात्रियों की तुलना में सामान ज्यादा लोड किया जाता है, जिससे सुरक्षा मानकों पर असर पड़ रहा है।

परिवहन विभाग की चेतावनी

अपर परिवहन आयुक्त ने मामले को गंभीर बताते हुए सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है। उन्होंने कहा है कि परमिट शर्तों का उल्लंघन करने वाली बसों पर भारी जुर्माना और आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी। नियमों के अनुसार यात्री बसों में निर्धारित सीमा से अधिक माल ढोना पूरी तरह प्रतिबंधित है।

अब निगरानी बढ़ाने की जरूरत

लगातार सामने आ रही अनियमितताओं के बाद अब परिवहन व्यवस्था पर निगरानी बढ़ाने की मांग उठने लगी है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए तो यह स्थिति सड़क सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन सकती है।

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