Pune Rave Party: दिग्गज नेता एकनाथ का दामाद रेव पार्टी में रंगे हाथ पकड़ा गया, ड्रग्स-शराब-हुक्का बरामद, महाराष्ट्र की सियासत में खलबली
Pune Rave Party
पुणे। Pune Rave Party: महाराष्ट्र की राजनीति में उस वक्त हड़कंप मच गया जब पुणे पुलिस ने एक लग्जरी लॉज में देर रात छापेमारी कर एक रेव पार्टी का भंडाफोड़ किया। इस पार्टी से न केवल ड्रग्स, शराब और हुक्का जब्त किया गया, बल्कि जो नाम सामने आया उसने पूरे राजनीतिक गलियारों में सनसनी फैला दी। पकड़े गए लोगों में एक नाम था प्रांजल खेवलकर, जो राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP-SCP) की कद्दावर नेत्री रोहिणी खडसे के पति और वरिष्ठ नेता एकनाथ खडसे के दामाद हैं।
देर रात पुणे पुलिस की रेड, सात लोग हिरासत में
पुणे पुलिस ने शनिवार देर रात पुणे के कोरेगांव पार्क स्थित एक लग्जरी अपार्टमेंट में छापा मारा, जहां रेव पार्टी चल रही थी। पुलिस को पहले से सूचना मिली थी कि यहां ड्रग्स और शराब के साथ एक हाई-प्रोफाइल पार्टी हो रही है। छापेमारी के दौरान पुलिस ने 5 पुरुष और 2 महिलाओं को हिरासत में लिया, जिनमें से सभी नशे की हालत में थे।
मौके से भारी मात्रा में नशा और हुक्का बरामद
रेड के दौरान पुलिस को हुक्का, ड्रग्स (मादक पदार्थ), और शराब की कई बोतलें मिलीं। पार्टी में मौजूद सभी युवक-युवतियां नशे में धुत पाए गए। पुलिस ने सभी के खिलाफ NDPS एक्ट और भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है।
सबसे चौंकाने वाला नाम: प्रांजल खेवलकर
इस रेड को लेकर जितनी चर्चा ड्रग्स और नशे की हो रही है, उससे कहीं ज्यादा सियासी हलकों में नाम को लेकर हो रही है। पुलिस की हिरासत में लिए गए प्रांजल खेवलकर की पहचान होते ही इस मामले ने नया मोड़ ले लिया। खेवलकर की पत्नी रोहिणी खडसे एनसीपी (शरद पवार गुट) की विधायक और चर्चित चेहरा हैं, जबकि उनके ससुर एकनाथ खडसे महाराष्ट्र की राजनीति के दिग्गज नेता रह चुके हैं।
सियासी गलियारों में खामोशी, जनता कर रही कार्रवाई की तारीफ
रेव पार्टी में नेताओं के रिश्तेदार का नाम सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में चुप्पी और दबाव साफ नजर आने लगा है। एक ओर जहां आम लोग पुणे पुलिस की इस कार्रवाई की सराहना कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सत्ताधारी वर्ग इस मसले पर प्रतिक्रिया देने से बच रहा है।
रसूख और सत्ता पर उठे सवाल
इस घटनाक्रम ने एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं कि क्या सत्ता से जुड़े लोग कानून से ऊपर हैं? क्या रसूख और राजनीतिक पहुंच के बल पर ऐसे मामले दबा दिए जाएंगे या पुलिस कानून के मुताबिक आगे भी सख्त कार्रवाई करेगी?
प्रांजल खेवलकर की गिरफ्तारी सिर्फ एक रेव पार्टी का मामला नहीं, बल्कि यह सत्ता, नैतिकता और कानून के बीच टकराव की एक बानगी है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या इस मामले में जांच निष्पक्ष होती है या राजनीतिक दबाव में बात ठंडी कर दी जाती है। फिलहाल, पुणे पुलिस ने सख्त रुख अपनाया है और जांच जारी है।
