आम आदमी पर महंगाई की मार, तीन महीने में दूसरी बार महंगा हुआ LPG सिलेंडर…जानें आपके शहर का रेट

ईरान संकट का बहाना बनाकर पेट्रोलियम कंपनियों को छूट, जनता पर बोझ, तीन महीने में दूसरी बढ़ोतरी, सरकार चुप्पी साधे बैठी

 

देश की आम जनता एक बार फिर महंगाई की चक्की में पिस रही है। घरेलू उपयोग के LPG सिलेंडर की कीमत में ₹29 की बढ़ोतरी कर दी गई है। नई कीमत आज 7 जून 2026 से लागू हो गई है। मात्र तीन महीनों के अंदर यह दूसरी बड़ी बढ़ोतरी है। मार्च 2026 में ही ₹60 प्रति सिलेंडर महंगा किया गया था। कुल मिलाकर छह महीने के भीतर घरेलू गैस पर ₹89 का बोझ आम आदमी के कंधे पर डाल दिया गया है।

 

दिल्ली में 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू LPG सिलेंडर की पुरानी कीमत 913 रुपये थी, जो अब बढ़कर 942 रुपये हो गई है। मुंबई में यह 941.50 रुपये, कोलकाता में 968 रुपये, चेन्नई में 957.50 रुपये, पटना में 1031.50 रुपये और हैदराबाद में 996 रुपये पहुंच गई है। अन्य प्रमुख शहरों जैसे लखनऊ, जयपुर, बेंगलुरु में भी इसी अनुपात में कीमतें बढ़ाई गई हैं।

 

सरकार और पेट्रो कंपनियां इस बढ़ोतरी के लिए ईरान के संकट और खाड़ी क्षेत्र की अस्थिरता का हवाला दे रही हैं। लेकिन सवाल यह है कि जब भी वैश्विक स्तर पर कोई समस्या आती है, तो उसका पूरा बोझ क्यों आम उपभोक्ता के सिर पर पड़ता है? सरकार की नीतियां किस हद तक विफल हैं कि हर बार महंगाई का थोपना आम आदमी पर ही होता है?

 

जनता की जेब कट रही है, सरकार की चुप्पी सवालों घेरे में

 

घरेलू LPG सिलेंडर मध्यम वर्ग और गरीब परिवारों की रसोई का आधार है। रोटी-दाल-सब्जी बनाने के लिए गैस जरूरी है। कीमत बढ़ने से मासिक खर्च में 60-100 रुपये का सीधा इजाफा हो जाएगा। कई परिवार पहले ही महंगाई से जूझ रहे हैं। पेट्रोल, डीजल, CNG, खाने-पीने की चीजें हर चीज महंगी हो रही है। ऐसे में LPG की यह बढ़ोतरी एक और झटका है।

 

सरकार दावा करती है कि वैश्विक कीमतों का पूरा बोझ उपभोक्ताओं पर नहीं डाला गया है। लेकिन हकीकत यह है कि पिछले कुछ हफ्तों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कुल ₹7.50 प्रति लीटर की बढ़ोतरी हो चुकी है। CNG भी ₹6 प्रति किलो महंगा हो गया है। कंपनियां कह रही हैं कि उन्हें पेट्रोल पर ₹11 और डीजल पर ₹33.60 प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है। फिर भी दाम बढ़ाए जा रहे हैं। सवाल उठता है अगर नुकसान हो रहा है तो सब्सिडी क्यों नहीं बढ़ाई जा रही? या फिर टैक्स क्यों नहीं कम किए जा रहे?

 

मोदी सरकार के कार्यकाल में पेट्रोलियम उत्पादों पर एक्साइज ड्यूटी और अन्य टैक्सों से भारी राजस्व कमाया गया है। लेकिन जब कीमतें बढ़ती हैं तो उपभोक्ता को राहत देने के बजाय कंपनियों को छूट दी जाती है। ईरान संकट को बहाना बनाया जा रहा है, जबकि असल समस्या घरेलू उत्पादन बढ़ाने, आयात पर निर्भरता कम करने और सही नीतियों की कमी है।

 

 कमर्शियल सिलेंडर पर भी प्रहार

 

1 जून को 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमत में भी भारी वृद्धि की गई थी। दिल्ली में 42 रुपये बढ़कर 3113.50 रुपये हो गया, जबकि कोलकाता में 53.50 रुपये की बढ़ोतरी हुई। छोटे व्यापारियों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले 5 किलोग्राम के FTL सिलेंडर में भी 11 रुपये का इजाफा किया गया। इससे छोटे होटल, ढाबे, चाय की दुकानें और स्ट्रीट वेंडर्स की लागत बढ़ जाएगी। अंत में यह बढ़ोतरी आम उपभोक्ता तक ही पहुंचेगी महंगे खाने और सेवाओं के रूप में।

 

सरकार की नीति स्पष्ट रूप से बड़े उद्योगों और कंपनियों के पक्ष में है। आम आदमी की रसोई और छोटे व्यवसाय को कोई राहत नहीं दी जा रही। विपक्ष लगातार कह रहा है कि केंद्र सरकार की गलत विदेश नीति और आर्थिक प्रबंधन के कारण देश बार-बार ऐसे संकटों का सामना कर रहा है। ईरान के साथ संबंधों में तनाव और खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता का असर सीधे भारतीय उपभोक्ता पर पड़ रहा है।

 

महंगाई नियंत्रण में सरकार पूरी तरह असफल

 

यह पहली बार नहीं है जब ईरान या अंतरराष्ट्रीय संकट का हवाला देकर दाम बढ़ाए गए हों। हर बार सरकार कहती है कि स्थिति सामान्य होने पर दाम कम कर दिए जाएंगे, लेकिन सामान्य स्थिति कभी नहीं आती। इसके बजाय नई-नई बहाने गढ़े जाते हैं।

 

देश में मुद्रास्फीति नियंत्रण से बाहर हो रही है। RBI भी चिंता जता चुका है। लेकिन सरकार का फोकस राहत पैकेज देने या सब्सिडी बढ़ाने पर नहीं, बल्कि कीमतें बढ़ाने पर है। Ujjwala योजना के तहत दिए जाने वाले सिलेंडरों की सब्सिडी भी पर्याप्त नहीं है। कई लाभार्थी शिकायत करते हैं कि सब्सिडी समय पर नहीं मिलती या राशि कम है।

 

आम नागरिक अब पूछने लगा है आखिर कब तक जनता को महंगाई का शिकार बनाया जाएगा? क्या सरकार की प्राथमिकता केवल राजस्व बढ़ाना है या जन कल्याण? पेट्रोलियम मंत्री और वित्त मंत्री को स्पष्ट जवाब देना चाहिए कि आखिर क्यों हर संकट का बोझ गरीब और मध्यम वर्ग पर ही पड़ता है।

 

LPG सिलेंडर की ₹29 की बढ़ोतरी सिर्फ एक आंकड़ा नहीं है। यह सरकार की जन-विरोधी नीतियों का प्रतीक है। जब रसोई गैस महंगी होती है तो महिलाओं, गृहिणियों और गरीब परिवारों पर सबसे ज्यादा असर पड़ता है।

तीन महीने में दो बढ़ोतरी और लगातार पेट्रोल-डीजल-CNG महंगे होना साबित करता है कि सरकार की आर्थिक प्रबंधन क्षमता पर सवालिया निशान लग गया है।

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