भूमि रिकॉर्ड में बड़ा खेल? 300 परिवारों की जमीन पर संकट…
सूरजपुर जिले के नवापाराकला गांव में भूमि स्वामित्व को लेकर लंबे समय से चल रहा विवाद अब प्रशासनिक स्तर तक पहुंच गया है। अपनी जमीनों के अधिकार की मांग को लेकर बड़ी संख्या में ग्रामीण कलेक्ट्रेट पहुंचे और कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। ग्रामीणों का कहना है कि राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज त्रुटियों के कारण कई परिवार वर्षों से परेशान हैं और उन्हें अपनी ही जमीन पर अधिकार साबित करने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।
रिकॉर्ड और वास्तविक कब्जे में बताया जा रहा अंतर
ग्रामीणों के अनुसार गांव में कई ऐसे मामले हैं, जहां जमीन का वास्तविक उपयोग और कब्जा किसी व्यक्ति के पास है, लेकिन सरकारी दस्तावेजों में उसका नाम दर्ज नहीं है। वहीं कुछ लोगों के नाम रिकॉर्ड में दर्ज होने के बावजूद उनका जमीन से कोई सीधा संबंध नहीं बताया जा रहा। इसी विसंगति के चलते गांव में लगातार विवाद और तनाव की स्थिति बनी हुई है।
सैकड़ों ग्रामीणों ने जताई चिंता
ज्ञापन में ग्रामीणों ने दावा किया कि राजस्व अभिलेखों की खामियों का असर 300 से अधिक लोगों पर पड़ रहा है। उनका कहना है कि जमीन संबंधी दस्तावेजों की गलतियों के कारण कई परिवार आर्थिक और सामाजिक परेशानियों का सामना कर रहे हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से रिकॉर्ड का दोबारा सत्यापन कराने और वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।
सार्वजनिक संपत्तियों पर भी खतरे का आरोप
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि गांव की कुछ सार्वजनिक जमीनों पर भी विवाद की स्थिति पैदा हो गई है। उन्होंने दावा किया कि वर्षों पुराने शासकीय विद्यालय की भूमि को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की गई है।
भू-माफियाओं की सक्रियता पर उठाए सवाल
ग्रामीणों का आरोप है कि रिकॉर्ड में मौजूद कमियों का फायदा उठाकर कुछ लोग विवादित जमीनों के सौदे कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो भविष्य में भूमि विवाद और बढ़ सकते हैं। इसलिए विवादित जमीनों के क्रय-विक्रय पर तत्काल रोक लगाने की मांग भी प्रशासन के सामने रखी गई।
प्रशासन ने जांच का भरोसा दिलाया
कलेक्ट्रेट पहुंचे ग्रामीणों को प्रशासन की ओर से मामले की जांच का आश्वासन दिया गया है। कलेक्टर रेना जमील ने शिकायतों की गंभीरता को देखते हुए संबंधित अधिकारियों को तथ्यों की जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। जांच के बाद आवश्यक कार्रवाई किए जाने की बात कही गई है।
कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन की तैयारी
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ और भूमि रिकॉर्ड में सुधार की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करने को मजबूर होंगे। फिलहाल पूरे मामले को लेकर गांव के लोगों की निगाहें प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।
