मतगणना से पहले कांग्रेस का बड़ा फैसला, पूर्व विधायक राजेंद्र भारती निलंबित

राजेंद्र भारती

भोपाल। मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा उपचुनाव की मतगणना से पहले कांग्रेस ने बड़ा संगठनात्मक कदम उठाते हुए पूर्व विधायक राजेंद्र भारती को पार्टी से निलंबित कर दिया है। उन पर उपचुनाव के दौरान पार्टी प्रत्याशी घनश्याम सिंह के खिलाफ काम करने और भीतरघात करने के आरोप लगाए गए थे। मतदान के बाद और मतगणना से ठीक पहले हुई इस कार्रवाई ने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।

भीतरघात के आरोपों के बाद कांग्रेस का एक्शन

दतिया उपचुनाव के दौरान कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह ने सार्वजनिक रूप से आरोप लगाया था कि पार्टी के कुछ नेता उनके खिलाफ काम कर रहे हैं। संगठन स्तर पर मिली शिकायतों और चुनावी गतिविधियों की समीक्षा के बाद कांग्रेस ने पूर्व विधायक राजेंद्र भारती को निलंबित करने का निर्णय लिया। माना जा रहा है कि पार्टी ने अनुशासन बनाए रखने के उद्देश्य से यह कार्रवाई की है।

विधायकी जाने के बाद हुआ था उपचुनाव

राजेंद्र भारती की विधानसभा सदस्यता समाप्त होने के बाद दतिया सीट पर उपचुनाव कराया गया। दिल्ली की एक अदालत ने उन्हें धोखाधड़ी से जुड़े मामले में तीन साल की सजा सुनाई थी, जिसके बाद उनकी सदस्यता समाप्त हो गई और सीट रिक्त घोषित की गई। इसके बाद निर्वाचन आयोग ने इस सीट पर उपचुनाव कराया।

3 अगस्त को होगी वोटों की गिनती

दतिया विधानसभा उपचुनाव की मतगणना 3 अगस्त को सुबह 8 बजे से शुरू होगी। जिला निर्वाचन अधिकारी स्वप्निल वानखड़े के अनुसार सबसे पहले डाक मतपत्रों की गिनती की जाएगी, जिसके बाद इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) के मतों की गणना शुरू होगी। 30 जुलाई को हुए मतदान में करीब 71.44 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया था।

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बीजेपी और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला

इस उपचुनाव में मुख्य मुकाबला भाजपा उम्मीदवार आशुतोष तिवारी और कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह के बीच माना जा रहा है। चुनाव मैदान में कुल 21 उम्मीदवार हैं, जिनमें आजाद समाज पार्टी के दामोदर सिंह यादव भी शामिल हैं। भाजपा ने इस बार पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा को टिकट नहीं दिया, जिन्हें वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में राजेंद्र भारती ने हराया था।

नतीजों के राजनीतिक मायने

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दतिया उपचुनाव का परिणाम केवल एक सीट का फैसला नहीं होगा, बल्कि इसे प्रदेश की मौजूदा राजनीतिक स्थिति का संकेत भी माना जाएगा। यदि कांग्रेस सीट बरकरार रखती है तो वह इसे अपने पक्ष में जनसमर्थन का संदेश बताएगी। वहीं भाजपा की जीत को मुख्यमंत्री मोहन यादव और प्रदेश नेतृत्व के लिए सकारात्मक संकेत माना जा सकता है। हालांकि विधानसभा में सरकार के बहुमत पर इस परिणाम का कोई असर नहीं पड़ेगा, लेकिन इसके राजनीतिक संदेश पर सभी की नजर रहेगी।

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