“बिजली निजी हाथों में, भाजपा सरकार का जनता की जेब पर डाका” : विनोद चंद्राकर ने सरकार को घेरा

विनोद चंद्राकर

महासमुंद। छत्तीसगढ़ में बिजली वितरण व्यवस्था को निजी हाथों में सौंपने की संभावित कवायद को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। महासमुंद के पूर्व विधायक एवं पूर्व संसदीय सचिव विनोद सेवन लाल चंद्राकर ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया है कि स्मार्ट मीटर के बाद अब बिजली वितरण के निजीकरण की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं। चंद्राकर के मुताबिक, टाटा पावर ने छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग के समक्ष रायपुर, धरसींवा, मंदिर हसौद और अभनपुर तहसीलों में बिजली वितरण लाइसेंस हासिल करने के लिए आवेदन किया है। उन्होंने इस प्रस्ताव को आम उपभोक्ताओं, किसानों और गरीब परिवारों के हितों के खिलाफ बताया है।

‘बिजली मूलभूत जरूरत, मुनाफे का कारोबार नहीं’

विनोद चंद्राकर ने कहा कि बिजली हर परिवार की मूलभूत जरूरत है और इसे केवल मुनाफे के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी के पास पहले से ही व्यापक नेटवर्क, जरूरी अधोसंरचना और अनुभवी कर्मचारी मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि मौजूदा व्यवस्था को बेहतर बनाने के बजाय निजी कंपनियों को बिजली वितरण में प्रवेश देना उचित नहीं होगा। सरकार को सरकारी बिजली वितरण कंपनी की क्षमता बढ़ाने और व्यवस्था में सुधार करने पर ध्यान देना चाहिए।

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निजीकरण से बढ़ सकती हैं बिजली दरें?

पूर्व विधायक ने आशंका जताई कि निजी कंपनी के लिए मुनाफा प्राथमिकता होगी, जिसका असर भविष्य में बिजली उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है। उनके अनुसार, बिजली वितरण के निजीकरण से बिजली दरों में बढ़ोतरी और उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने किसानों और गरीब परिवारों के साथ-साथ बिजली विभाग के कर्मचारियों के हितों को लेकर भी चिंता जताई। उनका कहना है कि निजीकरण की स्थिति में विभाग में काम कर रहे हजारों कर्मचारियों के भविष्य को लेकर सवाल खड़े हो सकते हैं।

1 अक्टूबर को जनसुनवाई

चंद्राकर ने बताया कि बिजली वितरण लाइसेंस से जुड़े प्रस्ताव पर छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग ने 1 अक्टूबर को जनसुनवाई निर्धारित की है। उन्होंने राज्य सरकार से मांग की कि जनसुनवाई के दौरान उपभोक्ताओं और बिजली कर्मचारियों की चिंताओं को गंभीरता से सुना जाए। उन्होंने सरकार से निजी कंपनियों को बिजली वितरण की जिम्मेदारी देने की प्रक्रिया पर रोक लगाने और छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी को मजबूत करने की मांग की है। हालांकि, बिजली वितरण के निजीकरण को लेकर अंतिम निर्णय नियामक प्रक्रिया और संबंधित प्राधिकरणों के फैसले के बाद ही स्पष्ट होगा।

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