अपनी ही सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे पूर्व गृह मंत्री ननकीराम कंवर, पुलिस ने घेराबंदी कर रोका
छत्तीसगढ़ की राजनीति में इस समय बड़ा बवाल खड़ा हो गया है। भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व गृहमंत्री ननकीराम कंवर ने अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए मुख्यमंत्री निवास के बाहर धरने की घोषणा कर दी। कंवर का आरोप है कि कोरबा कलेक्टर अजित वसंत भ्रष्टाचार और प्रशासनिक अनियमितताओं में संलिप्त हैं, लेकिन सरकार उनकी शिकायतों पर कार्रवाई नहीं कर रही।
नजरबंद किए गए पूर्व मंत्री
शनिवार सुबह कंवर रायपुर में सीएम हाउस के बाहर धरने के लिए निकले थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें एम्स के पास रोक लिया और गहोई भवन में नजरबंद कर दिया। प्रशासन ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए उन्हें गंतव्य तक पहुंचने से पहले ही रोक लिया। सूत्रों के अनुसार, कंवर नजरबंदी के बावजूद बाहर निकलने की कोशिश कर रहे थे और किसी भी हालत में धरना देने पर अड़े हुए थे।
14 गंभीर आरोपों की लिस्ट
ननकीराम कंवर ने कोरबा कलेक्टर के खिलाफ 14 गंभीर आरोपों की विस्तृत शिकायत दी थी। इन आरोपों में भ्रष्टाचार, सरकारी योजनाओं में अनियमितता, फर्जी मुआवजा प्रकरण, और भाजपा कार्यकर्ताओं व पत्रकारों को टारगेट करने जैसे मुद्दे शामिल हैं।
उनका दावा है कि—
- स्व-सहायता समूह की 40,000 महिलाओं से अरबों की ठगी की गई।
- मालगाँव और रलिया में फर्जी मुआवजों के नाम पर करोड़ों की हेराफेरी हुई।
- भाजपा कार्यकर्ताओं और पत्रकारों को प्रताड़ित करने के लिए मकान गिराने और व्यवसाय सील करने जैसी कार्रवाई की गई।
कंवर ने स्पष्ट चेतावनी दी थी कि यदि 4 अक्टूबर तक सरकार कार्रवाई नहीं करती, तो वे राजधानी में धरना देंगे।
भाजपा में बढ़ती खींचतान
ननकीराम कंवर का यह विरोध भाजपा संगठन के भीतर भी हलचल पैदा कर रहा है। उन्होंने यहां तक कह दिया कि यदि सरकार का यही रवैया रहा, तो अगले चुनावों में भाजपा को नुकसान उठाना पड़ेगा। यह बयान सत्ता और संगठन के बीच तनाव को और उजागर करता है।
शासन ने मांगी जांच रिपोर्ट
मामले की गंभीरता को देखते हुए शासन ने बिलासपुर संभागायुक्त सुनील जैन से जांच प्रतिवेदन मांगा है। हालांकि, जैन का कहना है कि उन्हें अभी तक लिखित आदेश प्राप्त नहीं हुआ है। आदेश मिलते ही वे जांच शुरू करेंगे। जांच प्रक्रिया में देरी ने पूर्व मंत्री और उनके समर्थकों की नाराज़गी और बढ़ा दी है।
विवादित रहा है कलेक्टर का रवैया
कलेक्टर अजित वसंत का नाम पहले भी विवादों में रहा है। पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल को उन्होंने फेसबुक पोस्ट पर नोटिस थमा दिया था, यह कहते हुए कि पोस्ट प्रशासन की छवि खराब करता है और सामाजिक वैमनस्य फैलाता है। यह घटना बताती है कि कलेक्टर और राजनीतिक नेताओं के बीच टकराव नया नहीं है।
लोकतांत्रिक अधिकारों पर सवाल
यह पूरा घटनाक्रम केवल भ्रष्टाचार के आरोपों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लोकतांत्रिक अधिकारों और राजनीतिक विरोध की स्वतंत्रता पर भी सवाल उठाता है। खासकर तब, जब सत्ताधारी दल का एक वरिष्ठ नेता ही सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतरने को मजबूर हो जाए। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार जांच को किस तरह अंजाम देती है और ननकीराम कंवर अपने आंदोलन को आगे किस दिशा में ले जाते हैं।
