तहसील भवन जर्जर, आरक्षण केंद्र बंद : रेलवे को एक कमरा तक नहीं दे पा रहा प्रशासन, कई बार लिख चुका पत्र
बिलासपुर। शहर के बीचोंबीच यात्रियों को रेलवे टिकट की सुविधा देने के लिए खोला गया आरक्षण काउंटर अब खुद ही व्यवस्था की तलाश में है। जिस भवन में बैठकर रेलवे कर्मचारी वर्षों तक यात्रियों के टिकट बनाते रहे, वही भवन इतना जर्जर हो गया कि वहां कर्मचारियों को बैठाना खतरे से खाली नहीं रहा। रेलवे ने जिला प्रशासन को कई बार पत्र लिखकर या तो भवन की मरम्मत कराने या फिर करीब 10×10 फीट का कमरा उपलब्ध कराने का आग्रह किया, लेकिन अब तक बात आगे नहीं बढ़ी।
नतीजा यह है कि तहसील कार्यालय का रेलवे आरक्षण केंद्र बंद हो चुका है और शहर के बीच टिकट बुक कराने की सुविधा से वंचित लोगों को अब उसलापुर या बिलासपुर स्टेशन का रुख करना पड़ रहा है। यानी सुविधा घर के पास थी, भवन ने साथ छोड़ा तो टिकट के लिए फिर स्टेशन की दूरी तय करनी पड़ रही है।
2005 में शुरू हुई थी सुविधा, हजारों लोगों को मिलता था फायदा
नेहरू चौक स्थित तहसील कार्यालय भवन में रेलवे ने वर्ष 2005 में यात्री आरक्षण केंद्र शुरू किया था। इसका उद्देश्य शहर के बीच ही लोगों को टिकट बुकिंग की सुविधा देना था।
इससे कुदुदंड, मंगला, नेहरू चौक, सरकंडा और आसपास के इलाकों के हजारों यात्रियों को फायदा मिलता था। लोगों को सामान्य टिकट या आरक्षण के लिए रेलवे स्टेशन तक जाने की जरूरत नहीं पड़ती थी। खासकर नेहरू चौक के आसपास स्थित कलेक्टोरेट, तहसील कार्यालय, नगर निगम सहित अन्य सरकारी कार्यालयों में आने-जाने वाले लोगों के लिए यह काउंटर सुविधाजनक था।
सुविधा देने वाला भवन ही बना परेशानी की वजह
समय के साथ आरक्षण कार्यालय की हालत खराब होती चली गई। भवन की दीवारों से प्लास्टर उखड़ने लगा और सीपेज की समस्या बढ़ती गई। शौचालय की स्थिति भी खराब हो गई। आरक्षण केंद्र में तैनात रेलवे कर्मचारियों ने भवन की स्थिति से अपने अधिकारियों को अवगत कराया। कर्मचारियों की सुरक्षा को देखते हुए रेल अधिकारियों ने जिला प्रशासन को पत्र भेजकर मरम्मत कराने का आग्रह किया। इसके साथ ही रेलवे की ओर से विकल्प के तौर पर दूसरे स्थान पर 10×10 फीट का कमरा उपलब्ध कराने की मांग भी की गई।
पत्र पर पत्र… लेकिन जगह का इंतजार खत्म नहीं हुआ
रेल प्रशासन का कहना है कि जिला प्रशासन को कई बार पत्र भेजे गए। लेकिन न जर्जर भवन की मरम्मत हो सकी और न ही आरक्षण केंद्र को दूसरी जगह शिफ्ट करने के लिए स्थान मिल पाया। ऐसे में रेलवे के सामने कर्मचारियों की सुरक्षा का सवाल था। आखिरकार तहसील कार्यालय में संचालित पीआरएस (Passenger Reservation System) केंद्र को बंद कर दिया गया। अब स्थिति यह है कि रेलवे सुविधा दोबारा शुरू करने के लिए जगह की तलाश कर रहा है, जबकि प्रशासन की ओर से स्थान उपलब्ध कराने का इंतजार जारी है।
कभी टिकट के लिए लगती थी कतार, अब खाली पड़ा है काउंटर
जिस आरक्षण कार्यालय में कभी टिकट बनवाने के लिए यात्रियों की कतार लगती थी, वहां अब सन्नाटा है। तहसील कार्यालय के समय के अनुसार ही आरक्षण केंद्र का संचालन होता था। सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक यात्रियों को टिकट बुकिंग की सुविधा मिलती थी। सरकारी कार्यालयों के काम से आने वाले लोग भी इसी दौरान अपना टिकट बनवा लेते थे। काउंटर बंद होने के बाद यात्रियों के सामने अब दो विकल्प बचते हैं—बिलासपुर स्टेशन या उसलापुर स्टेशन तक जाना।
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आरक्षण केंद्र बंद हुआ, प्रसाधन की परेशानी बरकरार
जर्जर आरक्षण कार्यालय बंद होने के बाद भी तहसील कार्यालय परिसर से जुड़ी दूसरी समस्याएं खत्म नहीं हुई हैं। आरक्षण केंद्र के सामने महिला और पुरुषों के लिए अलग-अलग प्रसाधन बनाए गए थे। पुरुष प्रसाधन की स्थिति खराब बताई जा रही है। वहां साफ-सफाई और पानी की समस्या बनी हुई है। महिला प्रसाधन का उपयोग तहसील कार्यालय की महिला कर्मचारी करती हैं और बाद में उसमें ताला लगा दिया जाता है। ऐसे में तहसील कार्यालय आने वाले आम लोगों को प्रसाधन की सुविधा के लिए भी परेशानी उठानी पड़ रही है।
रेलवे को अब भी नई जगह का इंतजार
रेलवे का कहना है कि आरक्षण केंद्र की पुरानी बिल्डिंग जर्जर होने के कारण वहां काम करना सुरक्षित नहीं था। इसी वजह से जिला प्रशासन से मरम्मत या वैकल्पिक स्थान की मांग की गई थी। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, जब तक नई जगह उपलब्ध नहीं होती, तब तक आरक्षण केंद्र को दोबारा शुरू करने का निर्णय नहीं लिया गया है। सीनियर डीसीएम अनुराग कुमार सिंह के अनुसार, जिला प्रशासन से नई जगह उपलब्ध कराने का आग्रह किया गया है। जगह मिलने के बाद आरक्षण केंद्र को दोबारा शुरू करने पर निर्णय लिया जाएगा।
सवाल सुविधा का नहीं, व्यवस्था का है
बिलासपुर में करीब दो दशक पहले शुरू हुई रेलवे आरक्षण सुविधा ने हजारों लोगों को स्टेशन जाने की परेशानी से बचाया। लेकिन जिस भवन में यह सुविधा चल रही थी, उसकी हालत पर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया। अब रेलवे कार्यालय बंद है, यात्री स्टेशन जाने को मजबूर हैं और रेलवे 10×10 के कमरे के लिए प्रशासन की ओर देख रहा है। ऐसे में सवाल यही है कि एक छोटी-सी जगह के लिए आखिर कब तक कागजों और पत्रों का सफर चलता रहेगा?
