‘8 श्रद्धालुओं की मौत का जिम्मेदार कौन?’ मां बगलामुखी मंदिर के पास उफनते नाले में बही कार; कैमरे से बचते दिखे कलेक्टर
आगर मालवा (नलखेड़ा)। विश्व प्रसिद्ध मां बगलामुखी धाम नलखेड़ा के समीप एक अत्यंत हृदयविदारक हादसा सामने आया है। यहां उफनते बरसाती नाले के तेज बहाव में श्रद्धालुओं से भरी एक कार बह गई, जिससे उसमें सवार सभी 8 श्रद्धालुओं की दर्दनाक मौत हो गई। रेस्क्यू टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद सभी आठों शवों को पानी से बाहर निकाल लिया है। मृतकों में तीन मासूम बच्चे, दो महिलाएं और तीन पुरुष शामिल हैं। पुलिस और प्रशासन द्वारा फिलहाल शवों की शिनाख्त की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। इस दर्दनाक घटना के बाद पूरे इलाके में कोहराम मच गया है और स्थानीय प्रशासन, पुलिस व मंदिर प्रबंधन की घोर लापरवाही को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
खतरे के बावजूद क्यों नहीं थी बैरिकेडिंग और पुलिस तैनाती?
हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब बरसाती नाले में जलस्तर और पानी का बहाव जानलेवा स्तर तक पहुंच चुका था, तो श्रद्धालुओं की आवाजाही को समय रहते क्यों नहीं रोका गया? स्थानीय निवासियों का कहना है कि पूर्व में जब भी इस पुलिया पर पानी आता था, तो प्रशासन द्वारा तुरंत बैरिकेडिंग लगाकर रास्ता बंद कर दिया जाता था। इस बार न तो कोई चेतावनी बोर्ड लगाया गया और न ही पुलिया के पास किसी सुरक्षाकर्मी या पुलिस बल की तैनाती की गई थी। अब यह जांच का मुख्य विषय है कि जलस्तर की सतत निगरानी कौन सा विभाग कर रहा था और सूचना होने के बावजूद पुलिया पर आवागमन पूरी तरह प्रतिबंधित क्यों नहीं किया गया।
प्रशासन और मंदिर प्रबंधन की भूमिका सवालों के घेरे में
इस भीषण त्रासदी ने स्थानीय प्रशासन और मंदिर प्रबंधन की जवाबदेही पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। हर दिन हजारों श्रद्धालुओं की आवक वाले इस संवेदनशील तीर्थ क्षेत्र में आपातकालीन सुरक्षा प्रोटोकॉल पूरी तरह नदारद दिखा।
क्या बारिश के दौरान मौके का मुआयना किया गया था? पुलिया पर जलस्तर बढ़ने की स्थिति में रास्ता तुरंत बंद कराने की प्राथमिक जिम्मेदारी किसकी तय की गई थी?
ये ऐसे सवाल हैं जिनकी उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है। आठ जिंदगियों का खात्मा केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि सीधे तौर पर सुरक्षा व्यवस्था की विफलता को दर्शाता है।
लोगों का फूटा गुस्सा, सवालों से बचते दिखे कलेक्टर
हादसे की खबर फैलते ही स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं में गहरा आक्रोश फैल गया। गुस्साई भीड़ ने मौके पर प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और लापरवाह अधिकारियों पर गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज कर सख्त कार्रवाई की मांग की।
घटना की सूचना मिलने पर कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक मां बगलामुखी मंदिर क्षेत्र पहुंचे। हालांकि, जब मीडियाकर्मियों ने प्रशासनिक विफलता और बैरिकेडिंग न होने को लेकर सवाल पूछे, तो कलेक्टर जवाब देने के बजाय कैमरे से बचते और पल्ला झाड़ते नजर आए। अधिकारियों के इस गैर-जिम्मेदाराना रवैये ने स्थानीय लोगों के गुस्से को और अधिक भड़का दिया है।
