बीएड में अब बिना परीक्षा होगा दाखिला: प्रवेश परीक्षा से व्यापम ने किया इंकार
रायपुर – छत्तीसगढ़ में बीए-बीएड और बीएससी-बीएड जैसे चार वर्षीय इंटीग्रेटेड पाठ्यक्रमों में अब प्रवेश परीक्षा नहीं होगी। व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापम) ने इन पाठ्यक्रमों के लिए परीक्षा आयोजित करने से इंकार कर दिया है। इसके चलते अब विद्यार्थियों को 12वीं कक्षा के अंकों के आधार पर दाखिला दिया जाएगा।
परीक्षा न कराने का कारण – देर से भेजा गया प्रस्ताव:
इस फैसले के पीछे मुख्य कारण यह है कि राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT) ने व्यापम को परीक्षा आयोजन के लिए बहुत देर से पत्र भेजा था। सूत्रों के अनुसार, 29 मई को भेजे गए प्रस्ताव को व्यापम ने विलंबित मानते हुए अस्वीकार कर दिया।
व्यापम ने स्पष्ट किया कि प्रवेश परीक्षा के आयोजन के लिए अधिसूचना, परीक्षा तिथियां, सिलेबस, एडमिट कार्ड, परीक्षा केंद्र, प्रश्नपत्र निर्माण और मॉडल उत्तर जैसी तमाम प्रक्रियाएं समय रहते पूरी करनी होती हैं। चूंकि व्यापम आमतौर पर अप्रैल के अंत या मई के पहले सप्ताह में परीक्षाएं शुरू कर देता है, और इसकी तैयारी मार्च में शुरू होती है, इसलिए इतने कम समय में परीक्षा कराना संभव नहीं था।
प्रदेश में कुल 200 सीटें, सिर्फ तीन कॉलेजों में संचालन:
छत्तीसगढ़ में इन दोनों पाठ्यक्रमों के लिए केवल 200 सीटें उपलब्ध हैं – बीए-बीएड के लिए 100 और बीएससी-बीएड के लिए 100। ये पाठ्यक्रम राज्य के सिर्फ तीन महाविद्यालयों में संचालित हो रहे हैं: विंध्यवासिनी शैलदेवी महाविद्यालय, दुर्ग, संदीपनी अकैडमी, अछौटी, श्री साईं आदर्श महाविद्यालय, अंबिकापुर। ये कोर्स राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत शुरू किए गए हैं और बीएड की तरह ही इनकी संरचना की गई है।
पहले भी हुई है ऐसी व्यवस्था:
निजी महाविद्यालय संघ के अध्यक्ष राजीव गुप्ता ने बताया कि वर्ष 2020-21 में भी कोविड-19 के कारण प्रवेश परीक्षा आयोजित नहीं हो सकी थी और तब भी 12वीं के अंकों के आधार पर दाखिले दिए गए थे। उन्होंने कहा कि इस वर्ष भी उसी तरह की व्यवस्था लागू होनी चाहिए।
दाखिले के लिए न्यूनतम योग्यता तय:
प्रवेश के लिए छात्रों को न्यूनतम योग्यता अंक (जैसे 50% या अन्य) के आधार पर चयनित किया जाएगा। चूंकि पाठ्यक्रम को जीरो ईयर घोषित करना संभव नहीं है, इसलिए बिना परीक्षा के दाखिले की प्रक्रिया को ही प्राथमिकता दी जा रही है।
