अभिजीत दिपके का उमर खालिद पर विवादित बयान, कहा- ‘अगर मैं मुसलमान या उमर खालिद होता तो अब तक जेल में होता’
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान CJP संस्थापक के बयान पर छिड़ी नई बहस, छात्रों की आत्महत्या और शिक्षा घोटालों को लेकर भी सरकार पर साधा निशाना
नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके अपने एक बयान को लेकर विवादों में आ गए हैं। जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन के दौरान दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने दिल्ली दंगा मामले के आरोपी उमर खालिद का नाम लेते हुए कहा, “अगर मैं उमर खालिद होता या मुसलमान होता, तो अब तक जेल में होता। इसकी मुझे अवेयरनेस है।” उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में नई बहस शुरू हो गई है।
क्या बोले अभिजीत दिपके?
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान दिए इंटरव्यू में अभिजीत दिपके ने कहा कि अगर वह उमर खालिद या मुस्लिम समुदाय से होते तो अब तक जेल में होते। उनके इस बयान को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। उल्लेखनीय है कि उमर खालिद दिल्ली दंगा मामले में आरोपी हैं और उनका मामला अदालत में लंबित है।
शिक्षा घोटालों को लेकर कर रहे हैं प्रदर्शन
अभिजीत दिपके इन दिनों शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। उनका आरोप है कि NEET, NTA, SSC पेपर लीक और अन्य परीक्षा विवादों ने लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित किया है। इसी मुद्दे पर वह जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे हैं।
छात्रों की आत्महत्या का भी किया जिक्र
दिपके ने अपने बयान में उन छात्रों का भी जिक्र किया, जिन्होंने कथित तौर पर परीक्षा विवादों के बाद आत्महत्या की। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के किसी भी प्रतिनिधि ने पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर संवेदना तक व्यक्त नहीं की।
उन्होंने कहा कि बच्चों को वापस नहीं लाया जा सकता, लेकिन सरकार कम से कम परिवारों से मिलकर दुख व्यक्त कर सकती थी। उन्होंने दीप मेघवाल, आकांक्षा चतुर्वेदी, अमायरा कुमार और कहान पटेल जैसे छात्रों के परिवारों का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्हें न्याय के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।
आंदोलन को मिल रहा समर्थन
अभिजीत दिपके के आंदोलन को सामाजिक कार्यकर्ता और पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक का समर्थन मिला है। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन में परीक्षा विवादों से प्रभावित छात्रों और उनके परिजन भी शामिल हो रहे हैं।
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