CJP चीफ अभिजीत दिपके का बड़ा ऐलान: ‘राजनीतिक पार्टी नहीं बनाएंगे, रिस्पॉन्स ग्रुप के जरिए लड़ेंगे छात्रों की लड़ाई’
नई दिल्ली। संसद से एंटी पेपर लीक संशोधन विधेयक पारित होने के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने एक विस्तृत इंटरव्यू में छात्र आंदोलन, सरकार की कार्यशैली, नए शिक्षा मंत्री, सोनम वांगचुक, विपक्ष के समर्थन और भविष्य की रणनीति सहित कई मुद्दों पर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि उनका आंदोलन छात्रों के हितों के लिए था और आगे भी लोकतांत्रिक तरीके से जारी रहेगा।
‘यह बिल पेपर लीक रोकने का नहीं, बाद की कार्रवाई का कानून’
अभिजीत दिपके ने कहा कि उनकी समझ के अनुसार संशोधन विधेयक का फोकस पेपर लीक रोकने पर नहीं, बल्कि पेपर लीक होने के बाद की कानूनी कार्रवाई पर है। उन्होंने कहा, “जितना मैंने इस बिल को समझा है, उससे साफ है कि यह पेपर लीक रोकने के लिए नहीं, बल्कि पेपर लीक हो जाने के बाद क्या किया जाए, इस पर केंद्रित है। हमारी मांग थी कि पेपर लीक हो ही न, लेकिन पूरा फोकस उसके बाद के कदमों पर है।” उन्होंने यह भी कहा कि केवल सजा बढ़ाने से समस्या का समाधान नहीं होगा और सरकार को रोकथाम की व्यवस्था मजबूत करनी चाहिए।
पीड़ित परिवारों के मुआवजे पर उठाए सवाल
दिपके ने कहा कि आंदोलन के दौरान पीड़ित परिवारों को एक करोड़ रुपये मुआवजा देने की मांग उठाई गई थी, लेकिन अब तक इस पर कोई ठोस निर्णय सामने नहीं आया। उन्होंने कहा, “सरकार ने आश्वासन तो दिया, लेकिन अब तक कुछ नहीं हुआ। जब बड़े फैसलों के लिए करोड़ों रुपये तुरंत उपलब्ध हो सकते हैं, तो पीड़ित परिवारों को मुआवजा देने में इतनी देरी क्यों?”
‘शिक्षा पर बात करने को मजबूर हुई सरकार’
सरकार के फैसलों पर प्रतिक्रिया देते हुए अभिजीत दिपके ने कहा कि छात्र आंदोलन का असर दिखा और सरकार को शिक्षा के मुद्दे पर चर्चा करनी पड़ी। उन्होंने कहा, “मुझे खुशी है कि जो प्रधानमंत्री बीते दस-बारह साल से सिर्फ हिंदू-मुस्लिम राजनीति करते रहे, वे अब शिक्षा पर बात करने और इंस्टाग्राम पर रील्स डालने को मजबूर हुए हैं। यह छात्रों और युवाओं की बड़ी जीत है।” साथ ही उन्होंने नए शिक्षा मंत्री की नियुक्ति पर भी सवाल उठाए और कहा कि इससे गलत संदेश जाता है।
‘प्रदर्शनकारियों पर दर्ज केस वापस होने चाहिए’
20 जुलाई के छात्र आंदोलन के दौरान दर्ज मामलों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यदि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर दर्ज केस वापस नहीं लिए गए, तो आंदोलन फिर शुरू हो सकता है। उन्होंने कहा, “अगर शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर लगे केस वापस नहीं लिए गए और उन्हें परेशान किया गया, तो हमारे पास फिर सड़क पर उतरने के अलावा कोई विकल्प नहीं होगा।”
सोनम वांगचुक से मुलाकात नहीं होने का किया जिक्र
इंटरव्यू में दिपके ने बताया कि उन्होंने कई बार सोनम वांगचुक से मिलने की कोशिश की, लेकिन उन्हें मिलने की अनुमति नहीं मिली। उन्होंने कहा, “मैं उनसे मिलने की कोशिश करता रहा, लेकिन मिलने नहीं दिया गया। मैंने खुद उनसे अनशन तोड़ने का अनुरोध किया था क्योंकि उनकी सेहत को लेकर चिंतित था।”
‘आंदोलन किसी राजनीतिक दल का नहीं था’
विपक्षी दलों के समर्थन को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि आंदोलन पूरी तरह जनता द्वारा संचालित था। उन्होंने कहा, “भीड़ में अलग-अलग पार्टियों के लोग रहे होंगे, लेकिन आंदोलन खड़ा करने में किसी पार्टी का हाथ नहीं था। ज़्यादातर लोग पहली बार किसी प्रदर्शन में शामिल हुए थे।” उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी राजनीतिक दल को अपने झंडे या एजेंडे के साथ आंदोलन का हिस्सा बनने की अनुमति नहीं थी।
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राजनीतिक पार्टी बनाने से किया इनकार
भविष्य की रणनीति पर बोलते हुए अभिजीत दिपके ने कहा कि वे फिलहाल कोई राजनीतिक पार्टी नहीं बनाएंगे। उन्होंने कहा, “हम कोई राजनीतिक पार्टी ज्वाइन नहीं करेंगे। यह एक रिस्पॉन्स ग्रुप है, जो शिक्षा, बेरोजगारी और व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर जनता और युवाओं की आवाज़ उठाता रहेगा।”
मीडिया कवरेज पर भी जताई नाराजगी
इंटरव्यू के अंत में उन्होंने मीडिया की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि आंदोलन के शुरुआती दिनों में पर्याप्त कवरेज नहीं मिला। उन्होंने कहा, “हम 36 दिनों तक धरने पर बैठे रहे, लेकिन शुरुआती 20 दिनों तक मीडिया ने कोई कवरेज नहीं दी। उम्मीद है कि आगे जनता के असली मुद्दों को प्राथमिकता मिलेगी।”
