BRICS में न्योता नहीं, तो भारत से 101 समझौते रद्द? बांग्लादेश की BNP सरकार ने दिए कड़े फैसले के संकेत!
ढाका। बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के बाद भारत और बांग्लादेश के कूटनीतिक रिश्तों में तनाव और तल्खी बढ़ती दिख रही है। बांग्लादेश की सत्ताधारी पार्टी ‘बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी’ की सरकार भारत के साथ पूर्ववर्ती सरकारों द्वारा हस्ताक्षरित सभी 101 सहमति पत्रों यानि MoU और समझौतों की समीक्षा कर रही है। संसद में BNP के चीफ व्हिप नूरुल इस्लाम मोनी ने शुक्रवार को यह बड़ा खुलासा करते हुए संकेत दिए कि राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर सरकार कई अहम समझौतों को रद्द या संशोधित करने पर विचार कर रही है, जिससे भारत को रणनीतिक और व्यापारिक झटका लग सकता है।
‘बहुत जल्द सामने आएगा 101 समझौतों का नतीजा’
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, 13वीं संसद के तीसरे सत्र के समापन के बाद संसद मीडिया सेंटर में संवाददाताओं से बातचीत करते हुए नूरुल इस्लाम मोनी ने यह बयान दिया। जब उनसे सवाल किया गया कि क्या मित्र देशों के जहाजों द्वारा रणनीतिक चट्टोग्राम और मोंगला बंदरगाहों के इस्तेमाल की अनुमति देने वाले समझौतों को रद्द किया जाएगा, तो मोनी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि हम भारत के साथ हुए समझौतों, यानी सभी 101 सहमति पत्रों की बिंदुवार समीक्षा कर रहे हैं। इसका नतीजा आपको बहुत जल्द, बहुत जल्द देखने को मिल जाएगा।
हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि किन-किन समझौतों को जारी रखा जाएगा और किन्हें निरस्त या संशोधित किया जाएगा, लेकिन उन्होंने जोर देकर कहा कि मौजूदा सरकार किसी भी ऐसे समझौते को आगे नहीं बढ़ाएगी जो देश की संप्रभुता और आर्थिक हितों के खिलाफ हो।
‘पिछली सरकार के अनैतिक समझौतों से पीछे हटेगी सरकार’
मोनी ने पूर्ववर्ती अवामी लीग सरकार के दौरान हुए समझौतों को ‘अनुचित और एकतरफा’ करार देते हुए कहा कि पहले ऐसी बंदरगाह नीतियां बनाई गई थीं, जिनमें अपने ही घरेलू जहाजों की अनदेखी कर विदेशी जहाजों को अनुचित प्राथमिकता दी गई थी।
उन्होंने दो टूक कहा कि बांग्लादेश अब ‘राष्ट्रीय हित प्रथम’ की नीति पर काम कर रहा है और अतीत के ऐसे सभी ‘अनैतिक’ समझौतों से देश पीछे हट रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बांग्लादेश के भविष्य के अंतरराष्ट्रीय और द्विपक्षीय संबंध केवल और केवल संप्रभुता और घरेलू हितों के संरक्षण के आधार पर तय होंगे।
दिल्ली ब्रिक्स समिट में न्योता न मिलने पर भड़की BNP
इस बीच, नई दिल्ली में आयोजित हो रहे 18वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन को लेकर भी बांग्लादेश के राजनीतिक गलियारों में नाराजगी खुलकर सामने आ गई है। बांग्लादेश के प्रमुख समाचार पत्रों के अनुसार, मुख्य सचेतक नूरुल इस्लाम मोनी ने भारत की अध्यक्षता में हो रहे ब्रिक्स सम्मेलन में बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान को आमंत्रित न किए जाने पर गहरी आपत्ति जताई। उन्होंने इसे एक स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र के लिए निराशाजनक बताते हुए कहा कि क्षेत्रीय साझेदारी में बांग्लादेश जैसे महत्वपूर्ण पड़ोसी की उपेक्षा करना उचित दृष्टिकोण नहीं है।
कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि चट्टोग्राम और मोंगला बंदरगाहों से भारत के पूर्वोत्तर राज्यों के लिए माल ढुलाई और ट्रांजिट की सुविधाएं बाधित होती हैं, तो इससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों में नई चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं।
