कागजी नोटों के विदाई की तैयारी! 6 गुना ज्यादा टिकाऊ होंगे नए पॉलीमर नोट, विदेशी कंपनियों ने लगाईं बोलियां

मुंबई। भारतीय अर्थव्यवस्था और आम जनता की जेब में जल्द ही एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। भारतीय रिजर्व बैंक पारंपरिक सूती और कागजी नोटों की जगह टिकाऊ और आधुनिक प्लास्टिक यानि पॉलीमर नोट लाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। रिजर्व बैंक की पूर्ण स्वामित्व वाली अनुषंगी कंपनी भारतीय रिजर्व बैंक नोट मुद्रण प्राइवेट लिमिटेड (BRBNMPL) ने इसके लिए वैश्विक टेंडर जारी किया है, जिसमें एक भारतीय कंपनी और दो विदेशी दिग्गजों ने अपनी बोलियां जमा की हैं। शुरुआती चरण में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर 10 और 20 रुपये मूल्यवर्ग के नोटों को पॉलीमर सबस्ट्रेट पर छापने की तैयारी है।

टेंडर की 2 सबसे सख्त शर्तें: सुरक्षा और धार्मिक संवेदनशीलता सर्वोपरि

BRBNMPL ने देश की सुरक्षा और सांस्कृतिक संवेदनाओं को ध्यान में रखते हुए बोलीदाताओं के सामने दो नॉन नेगोशिएबल शर्तें रखी हैं:

चीन और पाकिस्तान से पूर्ण फायरवॉल: बोली लगाने वाली सभी कंपनियों को आधिकारिक हलफनामा देना होगा कि भारत में उनके ऑपरेशन्स का चीन या पाकिस्तान में स्थित उनकी किसी भी गतिविधि से कोई संबंध नहीं होगा।

जानवरों की चर्बी पर पूर्ण प्रतिबंध: कंपनियों को प्रमाणित करना होगा कि सप्लाई की जाने वाली पॉलीमर शीट में किसी भी प्रकार की जानवरों की चर्बी या उसका DNA शामिल नहीं है। गौरतलब है कि ब्रिटेन में पॉलीमर नोटों में एनिमल फैट के इस्तेमाल पर भारी विवाद हुआ था, जिससे सबक लेते हुए RBI पहले से ही पूरी तरह सतर्क है।

68,000 रीम पॉलीमर शीट की तत्काल मांग, अलग-अलग मौसमों में होगा टेस्ट

BRBNMPL ने शुरुआत में 68,000 रीम पॉलीमर सबस्ट्रेट की मांग की है। एक रीम में 500 पॉलीमर शीट्स होंगी। टेंडर प्रक्रिया के तहत कंपनियों को अपने सैंपल्स जमा करने होंगे। इन शीट्स को भारत के अत्यधिक गर्म, नमी और ठंडे मौसम वाले क्षेत्रों में कड़े टेस्ट से गुजारा जाएगा। इस कसौटी पर खरा उतरने वाली कंपनियों को ही फाइनल टेंडर में शामिल किया जाएगा।

रेस में शामिल ये तीन दिग्गज कंपनियां

पॉलीमर नोटों की सप्लाई हासिल करने के लिए वैश्विक स्तर पर तीन बड़े खिलाड़ी मैदान में हैं:

Cosmo First & De La Rue: भारत की सबसे बड़ी BOPP निर्यातक कंपनी कॉस्मो फर्स्ट ने ब्रिटेन की विख्यात बैंक नोट निर्माता ‘De La Rue’ के साथ रणनीतिक साझेदारी की है।

CCL Secure: ऑस्ट्रेलिया की यह कंपनी दुनिया के 40 से अधिक केंद्रीय बैंकों को पॉलीमर नोट समाधान दे रही है। कंपनी का दावा है कि उनके नोट साधारण कॉटन नोटों से 6 गुना अधिक टिकाऊ हैं।

Q&T High-Tech: वियतनाम की इस कंपनी ने अपने देश में पारंपरिक करेंसी की तुलना में 78% लागत बचाने का दावा करते हुए भारतीय टेंडर में बोली लगाई है।

कागजी नोटों के मुकाबले पॉलीमर नोट क्यों हैं बेहतर?

ये नोट पानी, पसीने, नमी और धूल-मिट्टी से खराब नहीं होते और कटते-फटते नहीं हैं। पॉलीमर शीट पर ट्रांसपेरेंट विंडो और उन्नत सुरक्षा धागे लगाना संभव होता है, जिनकी नकल करना जालसाजों के लिए लगभग नामुमकिन है। इन नोटों पर बैक्टीरिया और धूल आसानी से नहीं चिपकते, जिससे इनसे संक्रमण फैलने का खतरा न के बराबर रहता है।

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