‘कम बारिश और सूखे की आहट’; MP के 36 जलाशयों में जलसंकट, जानिए क्या है सरकार का इमरजेंसी प्लान?

भोपाल। मध्य प्रदेश में इस साल मानसून की बेरुखी ने सरकार और किसानों की धड़कनें बढ़ा दी हैं। 1 जून से 10 अगस्त के बीच पूरे प्रदेश में औसतन 15 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। कम वर्षा के कारण राज्य के आधे से अधिक हिस्सों पर सूखे और जल संकट का खतरा गहराने लगा है। इस गंभीर स्थिति से निपटने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंत्रालय में मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक आपातकालीन समीक्षा बैठक की। सीएम ने साफ लहजे में निर्देश दिए हैं कि कम बारिश हो या अतिवृष्टि, किसानों और आम नागरिकों को किसी भी स्थिति में परेशानी नहीं होनी चाहिए।

36 बड़े बांधों में केवल 49% पानी

राज्य में अब तक 571 मिलीमीटर सामान्य बारिश की तुलना में केवल 483 मिमी बारिश ही हुई है। पूर्वी मध्य प्रदेश में 513.20 मिमी और पश्चिमी हिस्से में 459.80 मिमी बारिश दर्ज की गई।

10 अगस्त तक प्रदेश के प्रमुख जलाशयों में महज 49 प्रतिशत जलभराव हुआ है जबकि पिछले वर्ष इसी समय तक बांध 75 प्रतिशत तक भर चुके थे। राज्य के 36 प्रमुख जलाशय ऐसे हैं जहां पानी का स्तर 50 फीसदी या उससे भी कम रह गया है, जिससे आने वाले दिनों में सिंचाई और पेयजल आपूर्ति पर संकट मंडरा रहा है।

कम पानी वाली फसलों पर फोकस

प्रदेश में धान की 84% बोवनी पूरी हो चुकी है लेकिन आगामी रबी सीजन के लिए किसानों को कम सिंचाई वाली फसलों की ओर मोड़ने की योजना बनाई जा रही है। विशेष रूप से चने की फसल को बढ़ावा देने और एडवांस बीज स्टॉक रखने के निर्देश दिए गए हैं।

खाद-बीज की कालाबाजारी रोकने के लिए सख्त निगरानी के आदेश दिए गए हैं। मूंग खरीदी में सामने आई अनियमितताओं की जांच के लिए स्पेशल टीमें गठित कर कार्रवाई की जा रही है।

आपदा प्रबंधन, बिजली और स्वास्थ्य पर सख्त दिशा-निर्देश

बाढ़ और जलभराव की स्थिति पर नजर रखने के लिए राज्य और जिला स्तरीय आपदा नियंत्रण कक्ष चौबीसों घंटे चालू रहेंगे। वहीं निचले इलाकों में जनहानि रोकने के लिए बांधों से पानी छोड़ने से पहले समय रहते अलर्ट जारी करना अनिवार्य होगा।

अतिवृष्टि या जलभराव से हुई फसल क्षति का पारदर्शी सर्वे कर राहत राशि वितरित की जाएगी। सिंचाई के लिए निर्बाध बिजली दी जाएगी और मौसमी बीमारियों से निपटने के लिए सभी अस्पतालों में दवाओं का पर्याप्त स्टॉक सुनिश्चित किया जाएगा।

Youthwings