‘अब खुद चलाना होगा राजकाम…’; छत्तीसगढ़ के नगरीय निकायों में बदला नियम, जानिए क्यों कटा ‘पार्षद पतियों’ का पत्ता!
रायपुर। छत्तीसगढ़ के नगरीय निकायों में अब महिला जनप्रतिनिधियों की जगह उनके पतियों या परिवार के सदस्यों की दादागिरी और दखलअंदाजी पूरी तरह खत्म होने जा रही है। साय सरकार के नगरीय प्रशासन विभाग ने राजपत्र में अधिसूचना जारी कर नियमों में बड़ा और कड़ा संशोधन कर दिया है। नए आदेश के तहत अब कोई भी महिला पार्षद के नाम पर उनका पति, बेटा-बेटी, भाई-बहन या करीबी रिश्तेदार प्रतिनिधि या समन्वयक बनकर काम नहीं संभाल सकेगा।
संवैधानिक बैठकों में नो-एंट्री!
राजधानी रायपुर नगर निगम समेत प्रदेश भर के कई निकायों में यह देखा जा रहा था कि महिला पार्षदों की जगह उनके पति ही दफ्तरों से लेकर सरकारी काम और बैठकों की कमान संभाल रहे थे।
नए नियमों के लागू होने के बाद अब निकायों की किसी भी संवैधानिक या आधिकारिक बैठक में महिला जनप्रतिनिधि की जगह परिवार का कोई भी सदस्य हिस्सा नहीं ले पाएगा। सरकार के इस फैसले से महिला पार्षदों को खुद अपनी भूमिका निभाने और प्रशासनिक फैसलों में आत्मनिर्भर बनने का सीधा मौका मिलेगा।

