₹10-₹20 के नोट बदलने वाले हैं? आएंगे प्लास्टिक के नोट, जानें पुराने नोटों का क्या होगा!

केंद्र सरकार ने दी मंजूरी, RBI का ग्लोबल टेंडर जारी, 18 अगस्त तक जमा कर सकते हैं

 

Plastic Notes in India: बाजार में जल्द ही ₹10 और ₹20 के प्लास्टिक नोट नजर आएंगे। रिजर्व बैंक 100-100 करोड़ यानी टोटल 200 करोड़ पॉलीमर यानी प्लास्टिक से बने नोट छापेगा। यह प्लास्टिक करेंसी का ट्रायल होगा, अगर यह सफल होता है तो आगे और नोट भी छापे जाएंगे।

केंद्र सरकार ने इसकी मंजूरी दे दी है। यह जानकारी वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने सोमवार को लोकसभा में दी। हालांकि, पॉलीमर नोटों का ट्रायल कब शुरू होगा, इसकी तारीख का ऐलान अभी नहीं किया गया है।

पॉलीमर बैंकनोट के ट्रायल सफल होने के बाद RBI ₹10 और ₹20 दोनों वैल्यू के नोटों को रेगुलर तौर पर जारी करेगा। हालांकि कागज की मौजूदा करेंसी भी चलती रहेगी। इसे बंद नहीं किया जाएगा।

10 दिन पहले मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया था कि RBI जल्द ही देश में पॉलीमर से बने नोटों का पहला पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने जा रहा है। यह देश में नए जनरेशन की करेंसी लाने के RBI के प्लान का अगला कदम है।

सवाल-जवाब में जानें इस खबर से जुड़ी जरूरी बातें…

1. पॉलीमर नोट क्या होते हैं और सरकार इन्हें क्यों ला रही?

पॉलीमर बैंकनोट्स कागज के बजाय एक खास किस्म के प्लास्टिक मटेरियल यानी पॉलीमर सबस्ट्रेट पर छापे जाते हैं। ये छूने में तो सामान्य नोटों जैसे ही हल्के होते हैं, लेकिन पानी में भीगने पर भी नहीं गलते और लंबे समय तक चलते हैं।

इन्हें लाने की मुख्य वजहें

लंबी उम्र: ये नोट पानी, धूल और गंदगी से खराब नहीं होते और आसानी से फटते भी नहीं हैं।

नकली नोटों पर लगाम: पॉलीमर शीट पर एडवांस सिक्योरिटी फीचर्स आसानी से जोड़े जा सकते हैं, जिससे नकली नोट बनाना लगभग नामुमकिन हो जाएगा।

छपाई खर्च में बचत: कागजी नोट जल्दी खराब होते हैं, जिससे छपाई का खर्च बढ़ता है। FY25 में RBI ने कागजी नोटों की छपाई पर ₹6,372.8 करोड़ खर्च किए थे। पॉलीमर नोट लंबे चलेंगे, जिससे बार-बार छापने का खर्च घटेगा।

2. ये पॉलीमर नोट कब तक मार्केट में आएंगे?

फिलहाल यह एक ट्रायल यानी पायलट प्रोजेक्ट है। RBI की नोट-प्रिंटिंग यूनिट ने पॉलीमर सबस्ट्रेट शीट की सप्लाई के लिए ग्लोबल टेंडर जारी किया है, जिसमें बोलियां जमा करने की आखिरी तारीख 18 अगस्त तय की गई है।

टेंडर प्रक्रिया पूरी होने, कच्चा माल मिलने और छपाई के बाद ही यह नोट अलग-अलग चरण में बाजार में देखने को मिलेंगे। यदि यह ट्रायल सफल रहता है, तो आगे और भी नोट पॉलीमर में छापे जाएंगे।

3. क्या पुराने ₹10 और ₹20 के कागजी नोट बंद हो जाएंगे?

बिल्कुल नहीं। सरकार और RBI ने पूरी तरह साफ किया है कि पॉलीमर नोट आने से पुराने कागजी नोट चलन से बाहर नहीं होंगे।

को-एग्जिस्टेंस: बाजार में पॉलीमर और पेपर दोनों ही तरह के नोट एक साथ चलते रहेंगे।

फेज में बदलाव: यह बदलाव धीरे-धीरे और फेज मैनर यानी अलग-अलग चरण में किया जाएगा।

सर्कुलेशन जारी रहेगा: जब तक नए नोट पूरी तरह स्थापित नहीं होते, तब तक कागजी नोट सर्कुलेशन में बने रहेंगे।

4. पॉलीमर नोट का प्रस्ताव कब आया था?

2012: भारत ने पहली बार नोटों की शेल्फ लाइफ बढ़ाने के लिए पॉलीमर नोट लाने का प्रयास किया था, लेकिन तकनीकी वजहों से प्रोजेक्ट रुक गया था।

मई-जून 2026: मीडिया रिपोर्ट्स और RBI की रिपोर्ट में शेल्फ लाइफ बढ़ाने के लिए पॉलीमर नोटों पर विचार की बात आई। जून में RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने पुष्टि की कि पॉलीमर नोटों का प्रस्ताव विचाराधीन है और इसके नफा-नुकसान का वैल्यूएशन किया जा रहा है।

हालिया फैसला: वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने संसद में पुष्टि की कि केंद्र सरकार ने 200 करोड़ पॉलीमर नोटों के ट्रायल को मंजूरी दे दी है।

5. दुनिया के किन देशों में प्लास्टिक नोट चलते हैं?

दुनिया के 60 से ज्यादा देशों में पॉलीमर बैंकनोट्स चलन में शामिल किए जा चुके हैं। इनमें ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, यूनाइटेड किंगडम (यूके) और न्यूजीलैंड जैसे देश शामिल हैं।

6. भारत में अभी कितने मूल्य के नोट चलन में हैं?

भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी किए जाने वाले और बाजार में मुख्य रूप से 6 प्रकार के नोट चलते हैं:

  • ₹10 का नोट (महात्मा गांधी सीरीज/नया चॉकलेट ब्राउन नोट)
  • ₹20 का नोट (पुराना लाल-कांस्य नोट और नया हरा-पीला नोट)
  • ₹50 का नोट (पुराना और नया फ्लोरोसेंट ब्लू नोट)
  • ₹100 का नोट (पुराना नीला नोट और नया लेवेंडर/बैंगनी नोट)
  • ₹200 का नोट (ब्राइट येलो/चमकीला पीला नोट)
  • ₹500 का नोट (स्टोन ग्रे रंग का नया नोट)

नोट: ₹1, ₹2 और ₹5 के कागजी नोटों की छपाई अब बंद कर दी गई है (क्योंकि इनकी जगह सिक्के जारी किए जाते हैं), लेकिन यदि आपके पास पुराने पड़े हैं तो वे अब भी वैध हैं।

7. भारत में कब-कब नोट बदले गए?

आजादी से लेकर अब तक भारत में बड़े पैमाने पर 3 बार नोटबंदी या बड़े मूल्य के नोटों को बंद करने का फैसला लिया गया है

पहली बार – जनवरी 1946 (ब्रिटिश काल): ₹500, ₹1000 और ₹10,000 के नोट बंद किए गए।

दूसरी बार – जनवरी 1978 (मोरारजी देसाई सरकार): ₹1,000, ₹5,000 और ₹10,000 के नोट बंद किए गए।

तीसरी बार – 8 नवंबर 2016 (नरेंद्र मोदी सरकार): ₹500 और ₹1,000 के नोट बंद किए गए, ₹2,000 का नोट जारी किया गया (जिसे मई 2023 में वापस लिया गया)।

RBI ने जारी किया ग्लोबल टेंडर

RBI की नोट-प्रिंटिंग यूनिट ने कुछ दिनों पहले ही ग्लोबल लेवल पर ‘एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट’ (EOI) जारी किया। यह टेंडर विशेष प्रकार की ‘पॉलीमर सबस्ट्रेट शीट’ की मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई के लिए मंगाया गया है, जिसका इस्तेमाल इन नोटों को छापने के लिए किया जाता है।

डॉक्यूमेंट्स के मुताबिक, दुनिया भर के मैन्युफैक्चरर को एडवांस सेफ्टी फीचर्स से लैस पॉलीमर सबस्ट्रेट की सप्लाई के लिए इनवाइट किया गया है। इस टेंडर के तहत बोलियां जमा करने की आखिरी तारीख 18 अगस्त तय की गई है।

नए नोट फटेंगे नहीं, पानी-धूल से सुरक्षित रहेंगे

पॉलीमर से बने बैंकनोट ट्रेडिशनल कागजी नोटों की तुलना में बहुत ज्यादा टिकाऊ होते हैं। यह नोट पानी, गंदगी और धूल में भी सुरक्षित रहते हैं। इसके अलावा यह नोट आसानी से फटते भी नहीं हैं। इस वजह से ये बाजार में लंबे समय तक बिना फटे और साफ-सुथरे बने रहते हैं।

पॉलीमर शीट का सबसे बड़ा फायदा यह भी है कि इसमें एडवांस सेफ्टी फीचर्स को आसानी से जोड़ा जा सकता है। इससे नकली नोट बनाने वाले जालसाजों के लिए इनकी नकल करना लगभग नामुमकिन हो जाता है, जिससे देश का सेफ्टी सिस्टम और मजबूत होगा।

फिलहाल, इस ट्रायल प्रोजेक्ट की सफलता पर ही आगे के निर्णय निर्भर होंगे। यदि यह सफल रहा, तो भारत भी उन देशों की सूची में शामिल हो जाएगा जहां प्लास्टिक करेंसी चलन में है।

 

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