UCC in Madhya Pradesh : मोहन सरकार ने जगदीशपुर से लागू की UCC, 310 साल पहले वहीं से इस्लामी कानून की हुई थी शुरुआत
इतिहास के उसी स्थान पर मंत्री परिषद की बैठक, जहां 1716 में दोस्त मोहम्मद खान ने धोखे से जगदीशपुर पर किया था कब्जा
भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार ने एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने के लिए एक ऐसा स्थान चुना, जिसका अपना एक गौरवशाली और दर्दनाक इतिहास है। आज से 310 साल पहले जहां से भोपाल में इस्लामी कानून लागू हुआ था, आज वहीं पर मंत्री परिषद की बैठक हुई और मध्य प्रदेश में Uniform Civil Code को मंजूरी दी गई।
310 साल पहले, 1716 में, अफगानिस्तान के शातिर अपराधी दोस्त मोहम्मद खान ने धोखे से हिंदू राजा नरसिंह देवड़ा चौहान (जगदीशपुर) की हत्या कर दी और जगदीशपुर पर कब्जा कर लिया। उसने इसका नाम बदलकर इस्लामनगर कर दिया और यहीं से भोपाल क्षेत्र में हिंदू और मुसलमानों के लिए अलग-अलग कानून लागू किए।
310 साल पहले क्या हुआ था?
दोस्त मोहम्मद खान एक भाड़े का हत्यारा था, जिसे अफगानिस्तान से देश निकाला दे दिया गया था। वह भारत आया और मुगलों की सेवा करने लगा। मुगल कमजोर हुए तो वह मालवा में आ गया। हिंदू राज परिवारों में क्लेश तो बहुत था, लेकिन कोई भी हिंदू अपने परिवार के सदस्य की हत्या नहीं करना चाहता था। इसलिए दोस्त मोहम्मद खान को काम मिला और उसका गिरोह बड़ा होता गया।
उसने बैरसिया सहित कई छोटे इलाकों पर कब्जा करके अपनी शक्ति बढ़ाई और 1716 में भोपाल के सबसे शक्तिशाली हिंदू राजा नरसिंह देवड़ा चौहान को धोखे से मारकर जगदीशपुर पर कब्जा कर लिया। इसका नाम बदलकर इस्लामनगर कर दिया।
गद्दार और धोखेबाज दोस्त मोहम्मद खान ने मौलवी मोहम्मद सालेह को काजी (इस्लामी न्यायाधीश) नियुक्त किया। इसी दिन से बैरसिया, जगदीशपुर और बाद में भोपाल शहर में हिंदू और मुसलमान के लिए अलग-अलग कानून हो गए।
आज जगदीशपुर से कानूनी समानता की शुरुआत
मध्य प्रदेश सरकार ने इस्लामनगर को जगदीशपुर बनाकर यहीं से कानूनी समानता की शुरुआत की है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि Uniform Civil Code ऐतिहासिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है।
इस Uniform Civil Code के तहत अब सभी धर्मों के नागरिकों के लिए एक समान कानून लागू होगा। धार्मिक रीति-रिवाज वैसे ही रहेंगे, लेकिन कानूनी पहलू एक समान होंगे।
UCC के मुख्य प्रावधान
1. विवाह: कोई भी व्यक्ति एक से अधिक विवाह नहीं कर सकेगा। सभी विवाहों का अनिवार्य रजिस्ट्रेशन होगा। विवाह की न्यूनतम आयु: लड़कियों के लिए 18 वर्ष, लड़कों के लिए 21 वर्ष।
2. लिव-इन रिलेशनशिप: लिव-इन में रहने के लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा। नहीं तो कानूनी कार्रवाई होगी। रजिस्टर्ड लिव-इन में रहने वाले पार्टनर को भरण-पोषण का अधिकार मिलेगा।
3. तलाक: तलाक के आधार सभी धर्मों के लिए एक समान होंगे। ट्रिपल तलाक, निकाह हलाला जैसी प्रथाएं प्रतिबंधित होंगी।
4. संपत्ति: पैतृक और स्वअर्जित दोनों प्रकार की संपत्ति में बेटी को बेटे जितना हिस्सा मिलेगा।
5. गोद लेना: गोद लेने के नियम सभी के लिए एक जैसे होंगे।
महिलाओं और बच्चों के अधिकार मजबूत होंगे
इससे महिलाओं को विशेष लाभ मिलेगा। मुस्लिम महिलाओं को संपत्ति और तलाक के मामले में समान अधिकार मिलेंगे। बच्चों के जन्म, विवाह, तलाक, लिव-इन आदि से जुड़े सभी रिकॉर्ड एक जगह रजिस्टर्ड होंगे।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि Uniform Civil Code “एक राष्ट्र, एक कानून” की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।
यह Uniform Civil Code लिंग समानता बढ़ाएगा, महिलाओं और बच्चों के अधिकारों को मजबूत करेगा और विवादों को कम करेगा।
