NEET पेपर लीक के खिलाफ जंतर-मंतर में बिगुल, आमरण अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर चरम पर पहुंचा आंदोलन.. राजघाट से शुरू हुआ महात्मा गांधी की याद में अनशन

 

NEET पेपर लीक और CBSE से जुड़े कथित घोटालों के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का आक्रोशपूर्ण प्रदर्शन रविवार को नौवें दिन भी जोर-शोर से जारी रहा। 20 जून से जंतर-मंतर पर धरना दे रही पार्टी अब पूरे देश का ध्यान खींच रही है। लद्दाख के प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने प्रदर्शन स्थल पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी, जिसके बाद छात्रों, युवाओं और आम प्रदर्शनकारियों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। कई किसान संगठनों ने भी खुलकर आंदोलन को समर्थन दिया है।

 

राजघाट से गांधी की शपथ, फिर शुरू हुआ सत्याग्रह

भूख हड़ताल शुरू करने से पहले सोनम वांगचुक और CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने राजघाट पहुंचकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की। दीपके ने साफ कहा, “जब तक शिक्षा मंत्री इस्तीफा नहीं देते, आंदोलन नहीं रुकेगा।” यह प्रदर्शन अब महज छात्रों की मांग से आगे बढ़कर लोकतांत्रिक अधिकार और जवाबदेही का प्रतीक बनता जा रहा है।

 

सोनम वांगचुक “संघर्ष का नया चेहरा”

वांगचुक लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने के आंदोलन में पिछले साल गिरफ्तार हो चुके हैं। वे करीब 170 दिन जोधपुर जेल में रहे। सितंबर 2025 में लेह हिंसा के बाद उन पर राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत कार्रवाई की गई। उनकी गिरफ्तारी और अब भूख हड़ताल दोनों ही मुद्दे फिर से सुर्खियों में हैं, जो केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठा रहे हैं।

 

मंत्री का बयान, CJP का करारा जवाब

23 जून को दिए एक इंटरव्यू में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आरोप लगाया था कि कुछ तत्व शिक्षा व्यवस्था को अस्थिर करने और देश को बांटने की कोशिश कर रहे हैं। अभिजीत दीपके ने इस पर तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा, “हम करदाता हैं, हमें आतंकवादी कहना लोकतांत्रिक विरोध का अपमान है।” CJP ने NEET पेपर लीक की पूरी जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग दोहराई।

 

CJP की शुरुआत… बेरोजगारी का गुस्सा

कॉकरोच जनता पार्टी की शुरुआत मई 2025 में हुई। जब बेरोजगार युवाओं की तुलना “कॉकरोच” से किए जाने की टिप्पणी सामने आई, तब अभिजीत दीपके ने इसका विरोध करते हुए पार्टी का गठन किया। शुरू में ऑनलाइन अभियान से छेड़ी गई यह लड़ाई अब सड़क पर उतर चुकी है। पार्टी का दावा है कि उसकी याचिका को लाखों लोगों का समर्थन मिला और सोशल मीडिया पर यह तेजी से फैली।

 

यह आंदोलन सिर्फ NEET और CBSE के पेपर लीक तक सीमित नहीं है। यह युवा बेरोजगारी, शिक्षा व्यवस्था में गड़बड़ी और सरकार की जवाबदेही पर बड़ा सवाल है। सोनम वांगचुक जैसी हस्तियों का शामिल होना इसे राष्ट्रीय स्तर का मुद्दा बना रहा है। अगर सरकार ने समय रहते संज्ञान नहीं लिया तो यह आंदोलन और फैल सकता है, खासकर जब छात्रों का भविष्य दांव पर लगा हुआ है।

 

CJP का प्रदर्शन “कॉकरोच” वाली अपमानजनक टिप्पणी को भी युवा शक्ति में बदलने का प्रतीक बन गया है। अब नजर इस बात पर है कि केंद्र सरकार इस बढ़ते दबाव को कैसे संभालती है। आंदोलन जारी है और आवाजें तेज होती जा रही हैं।

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