रायपुर में 15 करोड़ की घास भूमि घोटाले का आरोप, गायब रिकॉर्ड ने बढ़ाए सवाल
Raipur Government Land Scam : रायपुर से सटे ग्राम डोमा में करोड़ों रुपये मूल्य की कथित सरकारी चारागाह भूमि को निजी नाम पर दर्ज कर बेचने का मामला सामने आया है। शिकायतकर्ता ने पूरे प्रकरण की शिकायत जिला कलेक्टर से करते हुए विस्तृत जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। बताया जा रहा है कि विवादित करीब तीन एकड़ भूमि की वर्तमान बाजार कीमत 12 से 15 करोड़ रुपये के बीच है।
राजस्व रिकॉर्ड में गायब मिले कई वर्ष
शिकायतकर्ता बलबीर सिंह का आरोप है कि खसरा नंबर 6/2 वर्ष 1955 से लेकर 1994 तक राजस्व अभिलेखों में शासकीय घास (चारागाह) भूमि के रूप में दर्ज था। लेकिन वर्ष 1995 से 1998 तक के रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं हैं। इसके बाद वर्ष 1999 के दस्तावेजों में यही जमीन निजी व्यक्तियों के नाम दर्ज दिखाई देने लगी, जिससे पूरे मामले में रिकॉर्ड से छेड़छाड़ की आशंका जताई गई है।
बंटवारे और जमीन के उपयोग पर भी उठे सवाल
शिकायत के अनुसार वर्ष 1992 में संबंधित भूमि का बंटवारा कर इसे खसरा नंबर 6 के अंतर्गत दर्ज किया गया। बाद में जमीन की खरीद-फरोख्त भी हुई और वर्तमान में यह भूमि सीमा अग्रवाल एवं उनके पति भूपेंद्र अग्रवाल के नाम दर्ज बताई जा रही है। वहीं राजस्व रिकॉर्ड में इसे कृषि भूमि दर्शाते हुए अमरूद की खेती का उल्लेख भी किया गया है। जानकारी के मुताबिक इसी भूमि के आधार पर वर्ष 2014 में बैंक से ऋण भी लिया गया था।
रिकॉर्ड में हेराफेरी की आशंका
शिकायतकर्ता का कहना है कि सरकारी चारागाह भूमि का अचानक निजी स्वामित्व में दर्ज होना कई सवाल खड़े करता है। उनका आरोप है कि राजस्व अभिलेखों में हेराफेरी, फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल या नियमों के विपरीत कार्रवाई के जरिए यह बदलाव किया गया हो सकता है। इसी वजह से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाना आवश्यक है।
कलेक्टर से की गई ये प्रमुख मांगें
शिकायत में प्रशासन से विवादित भूमि के सभी राजस्व अभिलेखों की जांच, वर्ष 1995 से 1998 के गायब रिकॉर्ड की पड़ताल, सरकारी भूमि के निजी नाम पर दर्ज होने की वैधानिकता की जांच और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है। साथ ही जांच पूरी होने तक भूमि के नामांतरण, विक्रय, बंधक अथवा किसी अन्य राजस्व कार्रवाई पर रोक लगाने का भी अनुरोध किया गया है।
वरिष्ठ अधिकारी से निष्पक्ष जांच की मांग
शिकायतकर्ता ने कलेक्टर से आग्रह किया है कि पूरे मामले की जांच किसी वरिष्ठ राजस्व अधिकारी से कराई जाए और जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए। उनका कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो सरकारी संपत्ति को स्थायी नुकसान हो सकता है।
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