राम नाम की लूट है, लूट सके तो लूट? अब 60 किलो चांदी और अखंड दीपक भी गायब!

इंडियन बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन के अनुराग रस्तोगी ने किया दावा, 20 जुलाई 2020 को चंपत राय को सौंपी गई थीं चांदी की ईंटें

अयोध्या। श्रीराम मंदिर चढ़ावे में गबन के मामले में SIT अपनी जांच कर चुकी है। टीम लखनऊ के लिए रवाना हो चुकी है और अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। इस बीच एक और बड़ी बात सामने आई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अब मंदिर प्रबंधन पर 60 किलो चांदी समेत अखंड दीपक गायब होने के आरोप लग रहे हैं।

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट पर लगातार दान से जुड़ी अनियमितताओं के आरोप बढ़ते जा रहे हैं। अब सराफा व्यापारियों ने भी अपनी आवाज उठाई है।

60 किलो चांदी की कहानी.. 10-10 ग्राम से बनी ईंटें

इंडियन बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन के नॉर्थ इंडिया हेड अनुराग रस्तोगी ने बड़ा दावा किया है। उनके अनुसार, देशभर के सराफा व्यापारियों ने 10-10 और 20-20 ग्राम चांदी भेजकर करीब 60 किलो चांदी इकट्ठा की थी। इस चांदी को गलाकर एक से सवा किलो वजन की ईंटें तैयार की गईं, जिन पर दानदाताओं के नाम और गोत्र लिखे गए थे।

रस्तोगी के अनुसार, 20 जुलाई 2020 को चंपत राय की सहमति के बाद ये चांदी की ईंटें अयोध्या स्थित रामकचहरी में सौंपी गई थीं। उस दौरान चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्रा और कैशियर प्रकाश गुप्ता उपस्थित थे। दान सामग्री स्वीकार करने के बाद शुद्धता प्रमाण पत्र और रसीद भी जारी की गई थी।

अखंड दीपक और चांदी के कटोरे भी लापता

रस्तोगी ने यह भी दावा किया कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से एक-एक किलो के दो चांदी के दीपक, दो चांदी के कटोरे, 200 ग्राम की पंचधातु सिल्ली और नाग-नागिन का जोड़ा दान किया था। लेकिन मंदिर बनने के बाद न तो दीपक दिखाई दे रहे हैं और न ही भगवान के भोग के लिए दान किए गए चांदी के कटोरे।

उन्होंने कहा कि इन ईंटों को नींव पूजन में उपयोग करने का अनुरोध किया गया था, लेकिन बाद में दानदाताओं को इसकी कोई जानकारी नहीं मिली। इसमें रस्तोगी ने इन सभी दान सामग्री का पूरा ब्यौरा सार्वजनिक करने की मांग की है।

मंदिर में घटा दान

लगातार मंदिर प्रबंधन पर लग रहे आरोपों से संदेह बढ़ता जा रहा है। मंदिर निर्माण के समय दान देने वाले श्रद्धालु अब खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं। दान में दी गई वस्तुओं का सार्वजनिक हिसाब मांग रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रबंधन पर आरोप लगने के बाद से मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं में कमी आई है और दान में भारी गिरावट दर्ज की गई है। उत्तर प्रदेश पुलिस और प्रशासन ने इस मामले पर संज्ञान लिया है।

यह अब एक बड़े घोटाले का रूप ले लिया है। फिलहाल, SIT अपनी जांच रिपोर्ट तैयार कर रही है और मुख्यमंत्री को सौंपेगी। अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है और क्या मंदिर प्रबंधन दान की पारदर्शिता बहाल कर पाता है।

 

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