टेलीग्राम बैन विवाद: CEO पावेल ड्यूरोव ने रिलायंस और WhatsApp पर लगाए गंभीर आरोप, BGP हाइजैकिंग का लगाया आरोप
ड्यूरोव ने रिलायंस पर UAE समेत भारत के बाहर टेलीग्राम एक्सेस में बाधा डालने और भारत में ऐप बैन करने की पैरवी करने का आरोप लगाया, सरकार ने NEET पेपर लीक मामले में अस्थायी प्रतिबंध लगाया
नई दिल्ली। टेलीग्राम ऐप के फाउंडर और CEO पावेल ड्यूरोव ने भारत में ऐप पर लगे अस्थायी प्रतिबंध को लेकर बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। उन्होंने रिलायंस और WhatsApp पर ऐप को बैन करने की साजिश रचने और यूजर्स के एक्सेस को नुकसान पहुंचाने के गंभीर आरोप लगाए हैं। इसके साथ ही, केंद्र सरकार ने NEET-UG 2026 की पुन:परीक्षा से पहले पेपर लीक की आशंका को देखते हुए टेलीग्राम को अस्थायी रूप से प्रतिबंधित कर दिया है।
क्या है पूरा मामला?
सरकार ने 21 जून को होने वाली NEET-UG की पुन:परीक्षा से पहले टेलीग्राम पर अस्थायी प्रतिबंध लगा दिया है। राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) के अनुसार, टेलीग्राम ग्रुप्स के जरिए गलत गतिविधियों और पेपर लीक की जानकारी सामने आने के बाद यह कदम उठाया गया। प्रतिबंध के तहत Google और Apple को 22 जून तक ऐप को अपने स्टोर से डिलीट करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा, टेलीग्राम को 30 जून तक भारत में अपनी संदेश-संपादन सुविधा को निष्क्रिय करने का भी आदेश दिया गया है, ताकि पुराने संदेशों में छेड़छाड़ कर पेपर लीक के फर्जी सबूत बनाने से रोका जा सके।
ड्यूरोव ने रिलायंस और WhatsApp पर क्या आरोप लगाए?
अपनी इस कार्रवाई से असहमत ड्यूरोव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में कहा कि इस बैन की वजह टेलीग्राम नहीं है और ऐप बैन करना कोई समाधान नहीं है।
साथ ही, उन्होंने रिलायंस और WhatsApp पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ड्यूरोव के अनुसार, भारतीय दूरसंचार कंपनी रिलायंस (विशेष रूप से AS18101 के साथ) BGP हाइजैकिंग नामक एक गलत तरीके से UAE समेत भारत के बाहर लाखों यूजर्स के टेलीग्राम एक्सेस में रुकावट डाल रही है।
ड्यूरोव ने इस गड़बड़ी को जानबूझकर की गई बताते हुए कहा कि इसके पीछे एक प्रतिस्पर्धात्मक लड़ाई हो सकती है, क्योंकि रिलायंस का एक हिस्सा मेटा के पास है, जो WhatsApp की मूल कंपनी है।
उन्होंने आगे लिखा कि रिलायंस/WhatsApp ने भारत में टेलीग्राम को बैन करने की पैरवी की होगी।
BGP हाइजैकिंग क्या है?
BGP (बॉर्डर गेटवे प्रोटोकॉल) हाइजैकिंग एक ऐसी तकनीक है, जिसमें एक नेटवर्क ऑपरेटर उन IP एड्रेस ब्लॉक्स पर अवैध रूप से नियंत्रण का दावा करता है, जिनका वह मालिक नहीं है, जिससे इंटरनेट ट्रैफिक अनजाने रास्तों पर भेज दिया जाता है। ड्यूरोव का आरोप है कि रिलायंस यही कर रही है।
क्या कहती है रिलायंस?
टेलीग्राम CEO के इन आरोपों पर एक वरिष्ठ दूरसंचार उद्योग सूत्र ने इसे “फेक न्यूज” करार दिया है। सूत्र का कहना है कि ड्यूरोव ने रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCom) को रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) के डिजिटल आर्म Jio के साथ भ्रमित किया है।
सूत्र ने बताया कि मेटा केवल Jio में एक अल्पसंख्यक निवेशक है और उसके दैनिक कार्यों में कोई भूमिका नहीं है।
टेलीग्राम ने हाईकोर्ट में किया है दरवाजा खटखटाया
इस पूरे मामले में टेलीग्राम ने केंद्र सरकार के फैसले को चुनौती देते हुए दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। ऐप ने तर्क दिया है कि पेपर लीक की समस्या के लिए पूरे प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंध लगाना सही समाधान नहीं है। इसके अलावा, ड्यूरोव ने यह भी कहा है कि लीक हुए पेपर को किसी भी ऐप पर शेयर किया जा सकता है और बैन ने लीक की समस्या को नहीं रोका है।
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