राम मंदिर दान पर उठे सवाल, क्या अब RTI के तहत आएगा ट्रस्ट?

वीरेंद्र सिंह ने कहा- हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के जज की निगरानी में हो जांच, श्वेत पत्र जारी किया जाए

अयोध्या। Ram Mandir को लेकर चंदौली के समाजवादी पार्टी (SP) के सांसद वीरेंद्र सिंह ने बड़ी पहल की है। उन्होंने श्रीराम मंदिर में चढ़ावे के कथित गबन के मामले में मंदिर को सूचना का अधिकार (RTI) के दायरे में लाने की मांग की है। इसके अलावा, उन्होंने हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी में जांच कराने और श्वेत पत्र जारी करने की भी मांग की है।

वीरेंद्र सिंह का कहना है कि देश के अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों को भी आरटीआई के दायरे में लाया जाना चाहिए। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब इसी मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक प्रतिनिधित्व (Representation) पेश किया गया है। इस प्रतिनिधित्व में कथित गबन के मामले में एफआईआर (FIR) दर्ज करने और कोर्ट की निगरानी में जांच का निर्देश देने की मांग की गई है।

 सुप्रीम कोर्ट में क्या मांग की गई है?

भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत को संबोधित यह प्रस्तुतीकरण एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड (AoR) अनूप प्रकाश अवस्थी ने दिया है। प्रस्तुतिकरण में कहा गया है कि भगवान श्री रामचंद्रजी मर्यादा पुरुषोत्तम माने जाते हैं, जो न्याय, जवाबदेही और नैतिक शासन के प्रतीक हैं। इसमें यह भी कहा गया है कि उनके जन्मस्थान पर चढ़ाए गए चढ़ावे से जुड़ा कोई भी आरोप किसी आम आपराधिक केस से कहीं ज्यादा बड़ा हो जाता है।

प्रस्तुतीकरण में आगे कहा गया है, “जिन मामलों में संस्थाओं पर लोगों का भरोसा दांव पर लगा हो, वहां लाखों भक्तों का भरोसा सिर्फ एक ऐसी जांच से ही वापस लाया जा सकता है जो साफ तौर पर स्वतंत्र, व्यापक और जिसमें असर, दबाव या हितों के टकराव की कोई संभावना न हो.”

 एसआईटी जांच पर क्यों उठ रहे सवाल?

प्रस्तुतीकरण में यह भी कहा गया कि राज्य सरकार ने एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) बनाई है, लेकिन औपचारिक आपराधिक जांच और FIR न होने से मामले में सरकारी कार्रवाई पर सवाल उठे हैं। वीरेंद्र सिंह ने भी अपनी मांग में इसी तरह की आशंका जताई है। उनका कहना है कि बिना FIR के जांच पूरी नहीं हो सकती और दोषियों को सजा नहीं मिल सकती।

प्रतिनिधित्व में कहा गया, “मैं किसी भी व्यक्ति, संस्था या अथॉरिटी के बारे में पहले से कोई राय नहीं बनाना चाहता. न ही मेरा ट्रस्ट पर कोई शक करने का इरादा है, जिसके सदस्यों ने बहुत कीमती सेवा दी है. हालांकि, आरोपों की गंभीरता और इसमें शामिल संस्था की बहुत बड़ी अहमियत के लिए आम मापदंड से ज्यादा पारदर्शिता और भरोसे की जरूरत है.”

 

 श्रीराम मंदिर ट्रस्ट की भूमिका क्या है?

इस पूरे मामले में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की भूमिका भी केंद्र में है। ट्रस्ट पर चढ़ावे के प्रबंधन और मंदिर के निर्माण कार्यों की देखरेख की जिम्मेदारी है। हालांकि, वीरेंद्र सिंह और अन्य लोगों का आरोप है कि ट्रस्ट में पारदर्शिता की कमी है। उनकी मांग है कि ट्रस्ट को भी आरटीआई के दायरे में लाया जाए, ताकि चढ़ावे के उपयोग की जांच की जा सके।

यह अब एक बड़े जनआंदोलन का रूप ले सकता है। वीरेंद्र सिंह ने कहा कि यदि सरकार ने उनकी मांग नहीं मानी, तो वे पूरे देश में प्रदर्शन करेंगे।

अब आगे क्या होगा?

फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट में दायर प्रतिनिधित्व पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। CJI सूर्यकांत के कार्यालय ने अब तक इस पर कोई टिप्पणी नहीं की है। हालांकि, कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह मामला कोर्ट में सुनवाई योग्य पाया जाता है, तो इस पर सुनवाई हो सकती है।

वीरेंद्र सिंह ने कहा है कि वह इस मुद्दे को संसद में भी उठाएंगे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी इस बारे में बात की जाएगी। यह मामला अब सिर्फ एक मंदिर के चढ़ावे तक सीमित नहीं है, बल्कि धार्मिक संस्थाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही का सवाल बन गया है।

अब देखना यह है कि सरकार और न्यायपालिका इस मामले पर क्या रुख अपनाती है।

 

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