मानसून ने खोई रफ्तार, 17 राज्य अब भी प्यासे! INSAT-3DS की तस्वीर में साफ नजर आया बादलों का ‘सूखा’
4-15 जून के बीच 64% कम बारिश, पश्चिमी हवाओं के दक्षिण खिसकने से पूर्वी जेट स्ट्रीम हुई बाधित, जानिए कब फिर बरसेगा मानसून
नई दिल्ली। देश में मानसून की एंट्री को 11 दिन हो चुके हैं, लेकिन 17 राज्य ऐसे हैं जहां अभी तक मानसून नहीं पहुंचा है। दक्षिण-पश्चिम मानसून की रफ्तार अचानक धीमी पड़ गई है और सैटेलाइट तस्वीरों में मानसूनी बादल गायब नजर आ रहे हैं। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, 4 से 15 जून के बीच सिर्फ 19.2 मिमी बारिश हुई है, जबकि सामान्य तौर पर इस अवधि में 53.7 मिमी बारिश होनी चाहिए थी। यानी 64% की भारी कमी दर्ज की गई है।
सैटेलाइट तस्वीरों ने बढ़ाई चिंता
15 जून को INSAT-3DS सैटेलाइट से ली गई तस्वीरें बेहद चौंकाने वाली हैं। आमतौर पर इस मौसम में भारत का जो नक्शा बादलों की घनी सफेद चादर से ढका रहता था, वह इस बार प्रायद्वीपीय और मध्य भारत में बिल्कुल साफ और सूखा दिखाई दे रहा है। सबसे ज्यादा बादल हिमालयी क्षेत्र, पूर्वोत्तर भारत और इंडो-गंगेटिक मैदान के उत्तरी हिस्सों में सीमित दिख रहे हैं, जबकि अरब सागर शाखा कमजोर और बिखरी हुई है।
IMD के रेनफॉल डिपार्चर मैप में मध्य, दक्षिणी और पूर्वी भारत के विशाल हिस्से पीले और लाल रंगों में रंगे हुए हैं, जो सूखे जैसे गंभीर हालात को दर्शाते हैं।
मानसून कहां-कहां रुका?
मानसून दक्षिण भारत से आगे बढ़ने के बाद महाराष्ट्र, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के आसपास ठहर गया है। आईएमडी के पश्चिमी क्षेत्र के प्रमुख बिक्रम सिंह ने बताया कि मानसून 8 जून को दक्षिणी महाराष्ट्र के ऊपर रुक गया और तब से पश्चिमी तट पर आगे नहीं बढ़ा है। मुंबई में अब 22-23 जून के आसपास मानसून आने की संभावना है।
वहीं, पूर्वोत्तर राज्यों को कवर करने के बाद मानसून बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में रुक गया है। जिन 17 राज्यों में अब भी बारिश का इंतजार है, उनमें छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, बिहार, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान और महाराष्ट्र जैसे प्रमुख राज्य शामिल हैं।

पश्चिमी हवाओं ने बढ़ाई मुश्किल
मौसम विज्ञानियों के मुताबिक यह दौर “मानसून का ठहराव” (Monsoon Pause) है, जो समुद्र की स्थितियों के बजाय ऊपरी वायुमंडल की गतिविधियों की वजह से हो रहा है। इस समय आसमान की ऊपरी सतह पर बहने वाली वेस्टरली जेट स्ट्रीम (पश्चिमी हवाओं का प्रवाह) अपनी सामान्य जगह से बहुत ज्यादा दक्षिण की ओर खिसक आई है।
यह असामान्य बदलाव मानसून के सबसे मुख्य इंजन यानी ईस्टरली जेट (पूर्वी हवाओं) के रास्ते में रुकावट बन गया है। पूर्वी जेट स्ट्रीम सामान्यतः भारत के ऊपर बादलों और बारिश को बनाने वाली ऊपर उठती हवाओं को सपोर्ट करती है, लेकिन तेज पश्चिमी हवाएं इस प्रक्रिया को दबा रही हैं। गौरतलब है कि अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में नमी की कोई कमी नहीं है, लेकिन ये तेज हवाएं बादलों को बनने से रोक रही हैं।
अल नीनो का बढ़ता खतरा
IMD के पूर्वानुमान के अनुसार, वर्तमान में कमजोर ला नीना जैसी स्थितियां ईएनएसओ-तटस्थ स्थितियों में बदल रही हैं। सबसे बड़ी चिंता यह है कि मॉनसून मिशन क्लाइमेट फोरकास्ट सिस्टम (MMCFS) के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन के दौरान अल नीनो स्थितियों के विकसित होने की संभावना है। अल नीनो का मतलब आमतौर पर भारत में कमजोर मानसून और सूखा होता है। पहले ही मानसून की शुरुआत कमजोर रही है और अब अल नीनो का यह खतरा किसानों और आम लोगों की चिंता बढ़ा रहा है।

बारिश कब होगी?
हालांकि राहत की खबर यह है कि मौसम वैज्ञानिकों को 20 जून के बाद ईस्टरली जेट के मजबूत होने की उम्मीद है। अगर ऐसा होता है, तो बंगाल की खाड़ी में बनने वाले सिस्टम फिर से सक्रिय हो सकते हैं और देश के अंदरूनी हिस्सों में बारिश शुरू हो सकती है। तब तक, खासकर मध्य, पूर्वी और उत्तरी भारत के लोगों को भीषण गर्मी से राहत के लिए और इंतजार करना पड़ सकता है।
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