वेदांता पावर प्लांट के बाहर श्रमिकों का विरोध प्रदर्शन, 200 से ज्यादा कर्मचारियों की छंटनी का आरोप

वेदांता पावर प्लांट

छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में स्थित वेदांता पावर प्लांट एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार मामला ठेका श्रमिकों की नौकरी समाप्त किए जाने से जुड़ा है। ग्राम सिंघीतराई स्थित प्लांट के बाहर श्रमिकों ने धरना देकर प्रबंधन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कर्मचारियों का आरोप है कि हालिया हादसे के बाद बड़ी संख्या में लोगों को बिना किसी स्पष्ट प्रक्रिया के काम से हटा दिया गया, जिससे उनके परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

हादसे के बाद प्रभावित हुई प्लांट की गतिविधियां

श्रमिकों के अनुसार 14 अप्रैल 2026 को हुए भीषण बॉयलर विस्फोट के बाद प्लांट में उत्पादन और मेंटेनेंस से जुड़े कई कार्य प्रभावित हुए हैं। इसके बाद एनजीएसएल कंपनी के तहत कार्यरत कर्मचारियों की संख्या में कटौती शुरू कर दी गई। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि लगभग 400 ठेका श्रमिकों में से 200 से ज्यादा लोगों को काम से अलग कर दिया गया है।

बिना लिखित सूचना के हटाने का आरोप

धरना दे रहे कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें नौकरी से हटाने संबंधी कोई लिखित आदेश नहीं दिया गया। साथ ही वैकल्पिक रोजगार या किसी अन्य एजेंसी में समायोजन को लेकर भी कोई जानकारी नहीं दी गई। इसी के विरोध में दर्जनों श्रमिक प्लांट के मुख्य प्रवेश द्वार के सामने एकत्र हुए और अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाई।

वेतन, मुआवजा और पुनर्नियुक्ति की मांग

आंदोलनरत श्रमिकों ने प्रबंधन से कई मांगें रखी हैं। इनमें प्रभावित कर्मचारियों को दोबारा काम पर रखने, नई एजेंसी में समायोजन, लंबित वेतन का भुगतान और अतिरिक्त मुआवजा शामिल है। इसके अलावा उन्होंने कार्य अनुभव प्रमाण पत्र, एनओसी, पीएफ, ईएसआईसी, बोनस और अन्य बकाया राशि जल्द जारी करने की मांग भी की है।

क्षेत्र में बढ़ रहा श्रमिकों के भविष्य को लेकर चिंता

उल्लेखनीय है कि अप्रैल में हुए बॉयलर हादसे में 25 श्रमिकों की जान चली गई थी, जिसके बाद से प्लांट की कार्यप्रणाली पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। अब कर्मचारियों की छंटनी के मुद्दे ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। श्रमिकों ने साफ कर दिया है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक स्तर पर चलाया जाएगा।

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