Chhattisgarh Fertilizer Crisis: किसानों को नहीं मिल रहा पूरा खाद-यूरिया? कांग्रेस के आरोपों से गरमाई प्रदेश की राजनीति

Chhattisgarh Fertilizer Crisis: खरीफ सीजन की तैयारी के बीच खाद और यूरिया की कमी को लेकर किसानों की चिंता बढ़ी, कांग्रेस ने सरकार पर सप्लाई घटाने का आरोप लगाया तो भाजपा ने वैश्विक परिस्थितियों को बताया वजह

Chhattisgarh Fertilizer Crisis: फसल की बुवाई से पहले छत्तीसगढ़ में खाद-यूरिया को लेकर विवाद गहरा गया है। किसान आधी सप्लाई मिलने का दावा कर रहे हैं, कांग्रेस सरकार पर गंभीर आरोप लगा रही है, जबकि भाजपा इसे वैश्विक संकट बता रही है। आखिर क्या है पूरा मामला और किसानों की परेशानी कितनी बड़ी है? जानिए इस रिपोर्ट में।

Chhattisgarh Fertilizer Crisis: खरीफ सीजन से पहले खाद-यूरिया की कमी पर बढ़ा विवाद, किसानों के समर्थन में उतरी कांग्रेस

छत्तीसगढ़ में खरीफ सीजन शुरू होने से पहले खाद और यूरिया की उपलब्धता को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। प्रदेश के कई हिस्सों से किसानों द्वारा खाद की कमी की शिकायतें सामने आ रही हैं। किसानों का आरोप है कि इस बार उन्हें जरूरत के मुकाबले काफी कम मात्रा में खाद और यूरिया उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे आने वाले खरीफ सीजन की तैयारियों पर असर पड़ सकता है।

धान उत्पादन के लिए देशभर में पहचान रखने वाले छत्तीसगढ़ में हर साल खरीफ सीजन के दौरान बड़ी मात्रा में खाद और उर्वरकों की जरूरत पड़ती है। ऐसे समय में खाद की उपलब्धता को लेकर उठ रहे सवाल किसानों की चिंता बढ़ा रहे हैं।

किसानों ने जताई नाराजगी

कई किसानों का कहना है कि सहकारी समितियों में पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध नहीं है। किसानों के मुताबिक पहले जहां एक एकड़ खेती के लिए दो बोरा यूरिया, एक बोरा पोटाश और डीएपी जैसी जरूरी खाद आसानी से मिल जाती थी, वहीं इस बार उन्हें निर्धारित मात्रा से कम खाद दी जा रही है।

किसानों का कहना है कि खेती की तैयारी के इस महत्वपूर्ण दौर में खाद की कमी से उत्पादन प्रभावित हो सकता है। यही वजह है कि कई क्षेत्रों में किसानों के बीच नाराजगी भी देखने को मिल रही है।

खुले बाजार में महंगा मिल रहा यूरिया

किसानों की एक बड़ी शिकायत यह भी है कि सहकारी समितियों में खाद की कमी होने के कारण उन्हें खुले बाजार का रुख करना पड़ रहा है। किसानों का दावा है कि खुले बाजार में यूरिया और अन्य उर्वरक अधिक कीमतों पर उपलब्ध हैं, जिससे खेती की लागत बढ़ रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय पर पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध नहीं हुई तो किसानों पर आर्थिक बोझ बढ़ सकता है और इसका असर फसल उत्पादन पर भी पड़ सकता है।

कांग्रेस ने सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा

खाद संकट के मुद्दे को लेकर कांग्रेस अब खुलकर किसानों के समर्थन में उतर आई है। कांग्रेस ने अपने सभी जिला अध्यक्षों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों की सहकारी समितियों में जाकर खाद की उपलब्धता की जानकारी लें और किसानों से सीधे संवाद करें।

कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा की डबल इंजन सरकार ने किसानों को मिलने वाली खाद और यूरिया की सप्लाई में कटौती कर दी है। पार्टी का दावा है कि किसानों को पहले की तुलना में लगभग आधी मात्रा में उर्वरक उपलब्ध कराया जा रहा है।

धान उत्पादन कम करने की साजिश का आरोप

कांग्रेस नेताओं ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि खाद की आपूर्ति में कमी से किसानों को नुकसान होगा और धान उत्पादन प्रभावित हो सकता है। कांग्रेस का कहना है कि यह स्थिति किसानों के हित में नहीं है और यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो प्रदेशभर में आंदोलन किया जाएगा।

सूत्रों के अनुसार कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर प्रदेश स्तरीय प्रदर्शन की रणनीति भी तैयार कर रही है। पार्टी का लक्ष्य किसानों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाना और सरकार पर दबाव बनाना है।

भाजपा ने आरोपों को बताया राजनीति

खाद संकट के आरोपों पर भाजपा ने कांग्रेस के दावों को खारिज किया है। भाजपा विधायक Purandar Mishra ने कहा कि खाद और उर्वरकों की उपलब्धता से जुड़ी चुनौतियां केवल छत्तीसगढ़ तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह वैश्विक परिस्थितियों का असर है।

उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे संघर्षों और आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ी समस्याओं के कारण उर्वरकों की उपलब्धता प्रभावित हुई है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि स्थिति उतनी गंभीर नहीं है जितना कांग्रेस द्वारा बताया जा रहा है।

खरीफ सीजन पर टिकी किसानों की नजर

फिलहाल प्रदेश के किसान सरकार से जल्द राहत की उम्मीद लगाए बैठे हैं। आने वाले दिनों में खरीफ फसलों की बुवाई का काम तेज होगा और ऐसे में खाद एवं यूरिया की उपलब्धता सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा बनी रहेगी।

अब सबकी नजर इस बात पर है कि सरकार किसानों की चिंताओं को दूर करने के लिए क्या कदम उठाती है और सहकारी समितियों में खाद की आपूर्ति को लेकर क्या व्यवस्था की जाती है। यदि समय रहते पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध नहीं हुए तो यह मुद्दा आने वाले दिनों में बड़ा राजनीतिक और कृषि संकट बन सकता है।

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