Khairagarh Dam Protest News: लमती डेम के खिलाफ ग्रामीणों का उग्र प्रदर्शन, सरकार पर बड़े आरोप
Khairagarh Dam Protest News: लमती नदी पर प्रस्तावित डेम के खिलाफ ग्रामीणों का उग्र विरोध, डुबान क्षेत्र और विस्थापन को लेकर सरकार पर गंभीर आरोप।
Khairagarh Dam Protest News के बीच छत्तीसगढ़ के खैरागढ़ जिले में लमती नदी पर प्रस्तावित डेम परियोजना को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। सैकड़ों ग्रामीण जिला मुख्यालय पहुंचकर सड़क पर उतर आए और जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सुनवाई नहीं हुई, तो आंदोलन और उग्र रूप ले सकता है।
ग्राम लछना, बोरला, महुआढार और कटेमा के ग्रामीण इस परियोजना के खिलाफ एकजुट हो गए हैं। उनका कहना है कि यह डेम उनके जीवन, आजीविका और भविष्य पर सीधा असर डालेगा।
डेम परियोजना पर बढ़ता विवाद
Khairagarh Dam Protest News में सबसे बड़ा मुद्दा यह है कि जिस जमीन को डुबान क्षेत्र बताया जा रहा है, उसी पर सरकार द्वारा विकास कार्य कराए जा रहे हैं। पंचायत के माध्यम से सीसी रोड का निर्माण जारी है और प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान भी बनाए जा रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि एक तरफ सरकार विकास कार्य कर रही है, वहीं दूसरी ओर उसी जमीन को डुबान क्षेत्र घोषित कर रही है, जिससे लोगों में भ्रम और असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
“जीवन की धुरी है लमती नदी”
Khairagarh Dam Protest News के तहत ग्रामीणों ने बताया कि लमती नदी उनके लिए सिर्फ पानी का स्रोत नहीं, बल्कि जीवन का आधार है। खेती, पशुपालन, रोजगार और दैनिक आवागमन सभी इसी नदी पर निर्भर हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि डेम का निर्माण होता है, तो लछनाटोला सहित कई गांव पूरी तरह डुबान क्षेत्र में आ जाएंगे। इससे हजारों लोग बेघर हो सकते हैं और उनकी आजीविका पर गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा।
विस्थापन और आजीविका का संकट
Khairagarh Dam Protest News में सामने आया है कि डेम बनने की स्थिति में लोगों को अपने घर छोड़ने पड़ेंगे। इससे न केवल उनके रहने की जगह खत्म होगी, बल्कि बच्चों की शिक्षा और सामाजिक जीवन भी प्रभावित होगा।
ग्रामीणों ने कहा कि सरकार ने अब तक पुनर्वास और मुआवजे को लेकर कोई स्पष्ट योजना नहीं बताई है, जिससे लोगों में असुरक्षा और डर का माहौल है।
पुराने बैराज पर भी उठे सवाल
Khairagarh Dam Protest News के बीच ग्रामीणों ने सरकार पर बड़ा आरोप लगाया है। उनका कहना है कि पहले बनाए गए प्रधानपाट बैराज पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए थे, लेकिन वह पिछले 10–12 वर्षों से बेकार पड़ा है।
ग्रामीणों का आरोप है कि अब उसी विफल परियोजना को छिपाने के लिए नई “लमती बैराज परियोजना” लाई जा रही है, जिसमें फिर से लोगों को विस्थापित करने की तैयारी है।
पर्यावरण पर भी पड़ेगा असर
Khairagarh Dam Protest News में पर्यावरणीय चिंताएं भी सामने आई हैं। ग्रामीणों के अनुसार डेम निर्माण से बड़े पैमाने पर जंगल प्रभावित होंगे, जिससे वन्यजीवों का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है।
इसके अलावा वन क्षेत्र से मिलने वाली राजस्व आय पर भी असर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की परियोजनाओं में पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी होता है।
दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग
Khairagarh Dam Protest News के तहत ग्रामीणों ने प्रशासन से कई मांगें रखी हैं। उन्होंने कहा कि डुबान क्षेत्र से संबंधित सभी दस्तावेज, नक्शा-खसरा और एनओसी सार्वजनिक किए जाएं।
इसके साथ ही बिना ग्रामीणों की सहमति के किसी भी निर्माण कार्य को तत्काल रोका जाए। ग्रामीणों का कहना है कि पारदर्शिता के बिना इस परियोजना को आगे बढ़ाना सही नहीं होगा।
सरपंच का बड़ा बयान
Khairagarh Dam Protest News में सरपंच कमलेश वर्मा का बयान भी सामने आया है। उन्होंने कहा कि गांव में अजीब स्थिति बन गई है, जहां एक ओर विकास कार्य चल रहे हैं और दूसरी ओर लोगों को उजड़ने का डर सता रहा है।
उन्होंने सरकार से मांग की कि नए डेम के बजाय पुराने बैराज को ही दुरुस्त किया जाए, जिससे लोगों को विस्थापन की समस्या का सामना न करना पड़े।
आंदोलन तेज करने की चेतावनी
Khairagarh Dam Protest News के बीच ग्रामीणों ने साफ कर दिया है कि यदि उनकी मांगों को नजरअंदाज किया गया, तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यह सिर्फ जमीन का मुद्दा नहीं है, बल्कि उनके अस्तित्व और भविष्य का सवाल है। वे किसी भी कीमत पर अपने गांव और जमीन को बचाने के लिए संघर्ष करेंगे।

प्रशासन की भूमिका पर सवाल
Khairagarh Dam Protest News में प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अब तक अधिकारियों की ओर से कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया है।
हालांकि प्रशासन का कहना है कि सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए परियोजना पर निर्णय लिया जाएगा और ग्रामीणों की चिंताओं का समाधान किया जाएगा।
लमती डेम परियोजना अब सिर्फ एक विकास योजना नहीं, बल्कि एक बड़ा सामाजिक और राजनीतिक मुद्दा बन चुकी है।
जहां एक ओर सरकार विकास के नाम पर परियोजना को आगे बढ़ाना चाहती है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण अपने अस्तित्व और अधिकारों की रक्षा के लिए सड़क पर उतर आए हैं। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन इस विवाद को कैसे सुलझाता है और क्या ग्रामीणों की मांगों को ध्यान में रखा जाता है।

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