रायपुर में लिफ्ट सुरक्षा पर बड़ा सवाल: लगातार हादसे, आखिर कब जागेगा सिस्टम?
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में बहुमंजिला कमर्शियल इमारतों में लिफ्ट सुरक्षा को लेकर गंभीर लापरवाही सामने आ रही है। शहर के वीआईपी रोड स्थित करेंसी टॉवर में वरिष्ठ आईएएस अधिकारी (ACS) ऋचा शर्मा के लिफ्ट में फंसने की घटना अभी चर्चा में ही थी कि एक और मामला सामने आ गया। इस बार रायपुर में फाफाडीह स्थित पिथालिया कॉम्प्लेक्स में आईएएस अधिकारी सिद्धार्थ कोमल परदेशी की पत्नी गार्गी परदेशी करीब 15 से 20 मिनट तक लिफ्ट में फंसी रहीं। लगातार हो रही इन घटनाओं ने न सिर्फ प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि आम नागरिकों में भी डर और असुरक्षा का माहौल पैदा कर दिया है।
पिथालिया कॉम्प्लेक्स में फिर वही लापरवाही
जानकारी के अनुसार, गार्गी परदेशी किसी निजी कार्य से पिथालिया कॉम्प्लेक्स पहुंची थीं। जैसे ही उन्होंने लिफ्ट का उपयोग किया, तकनीकी खराबी के कारण लिफ्ट बीच में ही रुक गई। अचानक लिफ्ट के अटक जाने से वह अंदर फंस गईं और घबरा गईं। उन्होंने शोर मचाकर मदद की गुहार लगाई और मोबाइल के माध्यम से सूचना दी। इसके बाद मौके पर पहुंचे सुरक्षा कर्मियों और तकनीशियनों ने काफी मशक्कत के बाद लिफ्ट को खोलकर उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि—क्या ऐसी घटनाएं अब आम हो चुकी हैं? क्या बहुमंजिला इमारतों में बुनियादी सुरक्षा मानकों की अनदेखी की जा रही है?

रायपुर करेंसी टॉवर की घटना से भी नहीं लिया गया सबक?
यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले रायपुर के वीआईपी रोड स्थित करेंसी टॉवर में एसीएस ऋचा शर्मा करीब 20 मिनट तक लिफ्ट में फंसी रही थीं। उस घटना में गंभीर खामियां सामने आई थीं। रिपोर्ट के अनुसार, लिफ्ट का इमरजेंसी अलार्म काम नहीं कर रहा था और अंदर मोबाइल नेटवर्क भी नहीं था। अंधेरा और खराब वेंटिलेशन के कारण उनकी तबीयत भी बिगड़ गई थी।
अब सवाल यह उठता है कि जब रायपुर में इतनी गंभीर घटना पहले हो चुकी थी, तो उसके बाद क्या कदम उठाए गए? क्या किसी भी बिल्डिंग में लिफ्ट सुरक्षा ऑडिट किया गया या यह मामला भी केवल कागजों तक ही सीमित रह गया?
क्या लिफ्ट मेंटेनेंस सिर्फ औपचारिकता बन चुका है?
रायपुर में लगातार दो हाई-प्रोफाइल मामलों के सामने आने के बाद यह स्पष्ट होता जा रहा है कि शहर के कई कमर्शियल कॉम्प्लेक्स में लिफ्ट मेंटेनेंस को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा।
क्या लिफ्ट की नियमित जांच हो रही है?
क्या इमरजेंसी सिस्टम वास्तव में काम करते हैं?
क्या बिल्डिंग मैनेजमेंट सुरक्षा मानकों का पालन कर रहे हैं?
और सबसे अहम, क्या किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार किया जा रहा है? इन सवालों का जवाब अब प्रशासन और बिल्डिंग संचालकों को देना होगा।
आम लोगों में बढ़ रहा डर और आक्रोश
रायपुर में इन घटनाओं का असर अब आम नागरिकों पर भी दिखने लगा है। लोग कमर्शियल कॉम्प्लेक्स में लिफ्ट इस्तेमाल करने से पहले डर महसूस करने लगे हैं। खासकर बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे अधिक असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि जब बड़े अधिकारी तक सुरक्षित नहीं हैं, तो आम जनता की सुरक्षा का क्या हाल होगा?
प्रशासन की चुप्पी पर भी उठ रहे सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह है कि अब तक प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
क्या सिर्फ घटना के बाद बयान जारी कर देना ही जिम्मेदारी है?
क्या लिफ्ट सुरक्षा को लेकर सख्त नियम लागू करने की जरूरत नहीं है?
और अगर नियम हैं भी, तो उनका पालन क्यों नहीं कराया जा रहा?
क्या अब बड़े हादसे का इंतजार किया जा रहा है?
लगातार हो रही घटनाएं एक गंभीर चेतावनी हैं। अगर समय रहते लिफ्ट सुरक्षा पर ध्यान नहीं दिया गया, तो किसी दिन बड़ा हादसा भी हो सकता है।
अब यह देखना जरूरी है कि—
क्या प्रशासन जागेगा?
क्या बिल्डिंग मालिकों पर सख्त कार्रवाई होगी?
या फिर यह मामला भी कुछ दिनों बाद भुला दिया जाएगा?
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