भारतमाला घोटाले पर ED का एक्शन: 67 लाख कैश और 37 किलो चांदी बरामद, अजय चंद्राकर बोले—नो कमेंट्स

Bharatmala परियोजना

छत्तीसगढ़ में Bharatmala परियोजना से जुड़े कथित घोटाले की जांच ने रफ्तार पकड़ ली है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सोमवार को अभनपुर, रायपुर, धमतरी और कुरुद में एक साथ छापेमारी कर बड़े पैमाने पर कार्रवाई की। इस पूरे मामले को अब Bharatmala घोटाले के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें भूमि अधिग्रहण और मुआवज़ा वितरण में गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। ED की इस कार्रवाई के बाद Bharatmala परियोजना से जुड़े कई नए पहलुओं पर सवाल उठने लगे हैं और जांच एजेंसी को कई अहम सुराग हाथ लगे हैं।

छापेमारी में कैश और चांदी की बरामदगी

ED द्वारा जारी प्रेस नोट के अनुसार, Bharatmala मामले में की गई तलाशी के दौरान करीब 66.9 लाख रुपये की नकदी बरामद की गई। इसके साथ ही लगभग 37.13 किलोग्राम वज़न की चांदी, जिसमें चांदी की ईंटें और आभूषण शामिल हैं, जब्त किए गए।

इसके अलावा कई डिजिटल उपकरण और दस्तावेज भी कब्जे में लिए गए हैं, जिनका सीधा संबंध Bharatmala परियोजना में हुए कथित फर्जीवाड़े से जोड़ा जा रहा है। एजेंसी इन सबूतों की गहन जांच कर रही है।

PMLA के तहत 8 ठिकानों पर कार्रवाई

ED ने बताया कि Bharatmala से जुड़े इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 की धारा 17 के तहत कार्रवाई की गई। रायपुर जोनल कार्यालय की टीम ने 28 अप्रैल को चार अलग-अलग इलाकों में कुल 8 स्थानों पर एक साथ छापेमारी की।

यह पूरा मामला Bharatmala परियोजना के तहत रायपुर-विशाखापत्तनम राजमार्ग के लिए किए गए भूमि अधिग्रहण से जुड़ा है, जिसमें मुआवज़े के वितरण में गड़बड़ी के आरोप हैं।

अवैध मुआवज़ा लेने का आरोप

Bharatmala घोटाले की जांच तब शुरू हुई जब ACB/EOW, रायपुर ने अभनपुर के तत्कालीन एसडीओ (राजस्व) निर्भय साहू और अन्य लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की। उन पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 और IPC, 1860 की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया।

FIR में आरोप लगाया गया कि आरोपियों ने सरकारी अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर Bharatmala परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण से जुड़े रिकॉर्ड में हेरफेर किया और जालसाज़ी के जरिए अधिक मुआवज़ा प्राप्त किया।

साजिश के तहत किया गया फर्जीवाड़ा

ED की जांच में यह भी सामने आया है कि भारतमाला परियोजना में कथित घोटाले को अंजाम देने के लिए एक सुनियोजित साजिश रची गई थी। आरोपियों ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा अधिसूचना जारी होने के बाद भी जमीन के स्वामित्व में बदलाव किया।

इतना ही नहीं, अधिसूचना के पहले जमीन के छोटे-छोटे टुकड़े कर दिए गए ताकि ज्यादा मुआवज़ा लिया जा सके। इस तरह Bharatmala परियोजना के नियमों का उल्लंघन कर आर्थिक लाभ हासिल किया गया।

Bharatmala परियोजना

 रिकॉर्ड में हेरफेर कर बढ़ाया गया मुआवज़ा

जांच में यह भी खुलासा हुआ कि Bharatmala मामले में संशोधित और फर्जी खसरा रिकॉर्ड के आधार पर मुआवज़ा तय किया गया। इससे भुगतान वास्तविक कीमत से कहीं अधिक हो गया।

इस प्रकार प्राप्त अतिरिक्त रकम को ‘अपराध की आय’ (Proceeds of Crime) माना जा रहा है। इससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ, जबकि आरोपियों को उसी अनुपात में अवैध लाभ मिला।

आगे की जांच जारी, और खुलासों की उम्मीद

ED ने स्पष्ट किया है कि Bharatmala परियोजना से जुड़े इस मामले में जांच अभी जारी है। जब्त किए गए डिजिटल साक्ष्यों और दस्तावेजों का विश्लेषण किया जा रहा है, जिससे इस पूरे नेटवर्क का खुलासा हो सके।

संभावना है कि आने वाले समय में Bharatmala घोटाले से जुड़े और भी नाम सामने आ सकते हैं। फिलहाल इस कार्रवाई के बाद प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है और मामले पर सभी की नजर बनी हुई है।

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