ISRO Gaganyaan: आम आदमी को स्पेस में भेजने जा रहा ISRO, बस करना होगा ये काम
ISRO Gaganyaan: गगनयान मिशन में अब सिर्फ पायलट नहीं, वैज्ञानिक और तकनीकी विशेषज्ञ नागरिक भी बन सकेंगे अंतरिक्ष यात्री
क्या आपने कभी सोचा था कि आम भारतीय भी अंतरिक्ष की यात्रा कर सकता है? अब यह सपना सच होने जा रहा है। ISRO ने बड़ा फैसला लेते हुए गगनयान मिशन में नागरिकों को शामिल करने की तैयारी शुरू कर दी है। जानिए कौन जा सकेगा स्पेस और कैसे होगा चयन।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी ISRO ने एक ऐसा फैसला लिया है, जो देश के करोड़ों लोगों के सपनों को नई उड़ान दे सकता है। अब तक अंतरिक्ष यात्रा केवल सेना के अनुभवी फाइटर पायलटों तक सीमित मानी जाती थी, लेकिन अब आने वाले समय में आम नागरिक भी अंतरिक्ष की सैर कर सकेंगे। ISRO ने गगनयान मिशन के भविष्य के चरणों में नागरिकों को शामिल करने की तैयारी शुरू कर दी है।
यह कदम भारत को उन चुनिंदा देशों की कतार में खड़ा करेगा, जहां आम लोगों के लिए भी स्पेस मिशन के रास्ते खुल रहे हैं।
ISRO Gaganyaan मिशन में अब नागरिकों को भी मिलेगा मौका
ISRO की एस्ट्रोनॉट सिलेक्शन कमेटी ने सिफारिश की है कि भविष्य के मिशनों में विविधता लाई जाए। इसका मतलब यह है कि आने वाले बैचों में वायुसेना के पायलटों के साथ-साथ वैज्ञानिक, इंजीनियर, टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट और मैथ्स बैकग्राउंड वाले नागरिकों को भी चुना जाएगा।
यानी अगर किसी व्यक्ति के पास STEM (Science, Technology, Engineering, Mathematics) क्षेत्र की मजबूत समझ है, तो उसके लिए अंतरिक्ष यात्री बनने का रास्ता खुल सकता है।
अंतरिक्ष में जाने के लिए करना होगा यह काम
स्पेस में जाना जितना रोमांचक लगता है, तैयारी उतनी ही कठिन होती है। ISRO के मुताबिक किसी भी व्यक्ति को एस्ट्रोनॉट बनाने और ISRO Gaganyaan Mission के लिए पूरी तरह तैयार करने में लगभग 54 महीने यानी साढ़े चार साल का समय लगता है।
इस दौरान उम्मीदवारों को कई स्तर की परीक्षाओं और ट्रेनिंग से गुजरना पड़ता है, जिनमें शामिल हैं:
- शारीरिक फिटनेस टेस्ट
- मेडिकल जांच
- मानसिक क्षमता परीक्षण
- तकनीकी ज्ञान
- कठिन परिस्थितियों में काम करने की ट्रेनिंग
- स्पेसक्राफ्ट सिस्टम की समझ
यानि सिर्फ इच्छा होना काफी नहीं, इसके लिए बेहद अनुशासन और योग्यता भी जरूरी होगी।
चौथे मानव मिशन में जा सकेंगे नागरिक
हालांकि दूसरे बैच से नागरिकों की ट्रेनिंग शुरू की जाएगी, लेकिन उनकी पहली स्पेस यात्रा चौथे मानव मिशन में होने की संभावना है।
ISRO फिलहाल शुरुआती मिशनों में एयरफोर्स बैकग्राउंड वाले टेस्ट पायलटों को भेजना चाहता है, ताकि ISRO Gaganyaan की सुरक्षा और तकनीक को पूरी तरह मजबूत किया जा सके। जब सिस्टम पूरी तरह परिपक्व हो जाएगा, तब नागरिक विशेषज्ञों को अंतरिक्ष में भेजा जाएगा।
यह फैसला दिखाता है कि ISRO सुरक्षा और वैज्ञानिक सफलता दोनों पर बराबर ध्यान दे रहा है।
2027 तक लॉन्च होगा ISRO Gaganyaan मिशन
ISRO Gaganyaan: भारत का पहला मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन गगनयान 2027 तक लॉन्च होने की तैयारी में है। इस मिशन में तीन अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी से करीब 400 किलोमीटर ऊपर कक्षा में जाएंगे और लगभग तीन दिन तक अंतरिक्ष में रहेंगे।
पहले बैच में इंडियन एयरफोर्स के चार अनुभवी टेस्ट पायलट शामिल हैं:
- एयर कमांडर प्रशांत बी नायर
- ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला
- ग्रुप कैप्टन अजीत कृष्णन
- ग्रुप कैप्टन अंगद प्रताप
इनका लक्ष्य मिशन को सफलतापूर्वक पूरा कर सुरक्षित वापसी करना होगा।
भविष्य में बनेगा 40 एस्ट्रोनॉट्स का पूल
ISRO सिर्फ एक मिशन तक सीमित नहीं रहना चाहता। एजेंसी भविष्य में हर साल दो मानव मिशन भेजने की योजना पर काम कर रही है।
इसके लिए करीब 40 प्रशिक्षित एस्ट्रोनॉट्स का एक बड़ा पूल तैयार किया जाएगा। रिपोर्ट्स के अनुसार तीसरे बैच में 12 सदस्यों में से 10 नागरिक हो सकते हैं।
यह भारत की बढ़ती तकनीकी ताकत और आत्मनिर्भर अंतरिक्ष कार्यक्रम की बड़ी झलक है।
क्यों खास है ISRO का यह फैसला?
ISRO Gaganyaan: यह फैसला इसलिए भी खास है क्योंकि इससे देश के युवाओं को नया सपना मिलेगा। अब बच्चे सिर्फ डॉक्टर, इंजीनियर या पायलट ही नहीं, बल्कि स्पेस साइंटिस्ट और एस्ट्रोनॉट बनने का सपना भी देख सकेंगे।
साथ ही इससे भारत के रिसर्च मिशनों को भी फायदा होगा, क्योंकि वैज्ञानिक सीधे अंतरिक्ष में जाकर प्रयोग कर सकेंगे।

भारत के लिए नया युग
ISRO का यह कदम सिर्फ स्पेस मिशन नहीं, बल्कि भारत के भविष्य की दिशा तय करने वाला फैसला है। आने वाले समय में अगर सब कुछ योजना के अनुसार हुआ, तो कोई आम भारतीय भी अंतरिक्ष से धरती को देख सकता है।
जिस अंतरिक्ष को अब तक सिर्फ फिल्मों में देखा जाता था, अब वहां भारतीय नागरिकों की मौजूदगी भी दिखाई दे सकती है।
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