Traffic Challans का खेल: आम जनता से 5 करोड़ से ज्यादा की वसूली, लेकिन सरकारी गाड़ियों पर शून्य चलान—क्यों अलग हैं नियम?
देश में सड़क सुरक्षा और नियमों के पालन को लेकर लगातार सख्ती बढ़ाई जा रही है, लेकिन हाल ही में सामने आए आंकड़ों ने Traffic Challans को लेकर एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। जहां एक ओर आम जनता पर भारी संख्या में ट्रैफिक चालान काटे जा रहे हैं और करोड़ों रुपये का जुर्माना वसूला जा रहा है, वहीं दूसरी ओर सरकारी वाहनों पर एक भी ट्रैफिक चालान दर्ज नहीं किया गया। यह स्थिति नियमों की समानता और निष्पक्षता पर गंभीर बहस छेड़ रही है।
आम लोगों पर सख्ती, Traffic Challans से करोड़ों की वसूली
मार्च महीने के आंकड़ों पर नजर डालें तो ट्रैफिक पुलिस ने रिकॉर्ड स्तर पर ट्रैफिक चालान जारी किए हैं। कुल 1 लाख 12 हजार 271 लोगों के खिलाफ ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन में कार्रवाई की गई। इनमें से 23 हजार 577 लोगों ने अपने Traffic Challans का भुगतान भी कर दिया। केवल मार्च महीने में ही आम नागरिकों से 3 करोड़ 19 लाख रुपये वसूले गए।
अगर जनवरी से मार्च 2026 की बात करें, तो इस अवधि में कुल 5 करोड़ 64 लाख 83 हजार 800 रुपये ट्रैफिक चालान के जरिए वसूले गए। यह आंकड़ा बताता है कि Traffic Challans के माध्यम से सरकार ने आम जनता से बड़ी रकम हासिल की है।
सरकारी गाड़ियों पर एक भी Traffic Challans नहीं
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इसी अवधि में सरकारी वाहनों के खिलाफ एक भी Traffic Challans दर्ज नहीं किया गया। जबकि सड़कों पर सरकारी गाड़ियों की संख्या भी कम नहीं है और वे भी ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन कर सकती हैं।
ट्रैफिक पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सरकारी वाहनों को ट्रैफिक चालान से छूट दी गई है, इसलिए उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं होती। हालांकि यह दावा विवादों में है, क्योंकि नियमों में ऐसी किसी छूट का स्पष्ट उल्लेख नहीं है।
विभागों के बीच मतभेद, Traffic Challans पर अलग-अलग राय
Traffic Challans को लेकर ट्रैफिक पुलिस और परिवहन विभाग के बीच मतभेद सामने आए हैं। ट्रैफिक पुलिस जहां सरकारी वाहनों को छूट मिलने की बात कर रही है, वहीं परिवहन विभाग इसे पूरी तरह गलत मानता है।
अतिरिक्त परिवहन आयुक्त डी. रविशंकर ने स्पष्ट किया कि मोटर व्हीकल एक्ट के तहत Traffic Challans के नियम सभी वाहनों पर समान रूप से लागू होते हैं। उन्होंने कहा कि कानून में कहीं भी सरकारी वाहनों को छूट देने का प्रावधान नहीं है और नियमों का पालन हर किसी के लिए अनिवार्य है।

Traffic Challans में 6 गुना बढ़ोतरी
इस साल Traffic Challans की संख्या में भारी बढ़ोतरी देखने को मिली है। जनवरी से मार्च 2025 के बीच जहां कुल 30 हजार 443 Traffic Challans काटे गए थे, वहीं 2026 की इसी अवधि में यह संख्या बढ़कर 2 लाख 4 हजार 601 हो गई। यानी ट्रैफिक चालान में करीब 672 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
इतना ही नहीं, पिछले साल तीन महीनों में 2 करोड़ 96 लाख रुपये वसूले गए थे, जबकि इस साल ट्रैफिक चालान से वसूली बढ़कर 5 करोड़ 64 लाख रुपये से अधिक हो गई। यह दिखाता है कि Traffic Challans अब राजस्व का बड़ा स्रोत बनते जा रहे हैं।
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निष्पक्षता पर उठ रहे सवाल
ट्रैफिक चालान के इन आंकड़ों ने कार्रवाई की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आम लोगों पर सख्ती और सरकारी वाहनों पर पूरी तरह छूट—यह स्थिति दोहरे मापदंड की ओर इशारा करती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ट्रैफिक चालान का उद्देश्य सड़क सुरक्षा है, तो नियमों का पालन सभी के लिए समान होना चाहिए। अन्यथा लोगों के बीच कानून के प्रति विश्वास कमजोर पड़ सकता है।
जनता में बढ़ रहा असंतोष
लगातार बढ़ते ट्रैफिक चालान और भारी जुर्माने के कारण आम लोगों में असंतोष भी देखने को मिल रहा है। कई नागरिक इसे अन्यायपूर्ण मान रहे हैं और सवाल उठा रहे हैं कि यदि वे नियम तोड़ते हैं तो उन्हें दंड मिलता है, लेकिन सरकारी वाहनों पर कार्रवाई क्यों नहीं होती।
समाधान: समान नियम और पारदर्शिता जरूरी
इस पूरे मामले का समाधान तभी संभव है जब ट्रैफिक चालान को लेकर पारदर्शिता लाई जाए और नियमों को बिना किसी भेदभाव के लागू किया जाए। यदि सरकारी वाहनों पर भी समान रूप से ट्रैफिक चालान जारी किए जाएं, तो इससे कानून व्यवस्था में लोगों का भरोसा मजबूत होगा।
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