छत्तीसगढ़ में महंगी होगी Electricity? जानें आपकी जेब पर कितना बढ़ेगा बोझ!

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छत्तीसगढ़ में नए वित्तीय वर्ष 2026-27 की शुरुआत के साथ ही Electricity उपभोक्ताओं के लिए चिंता बढ़ने लगी है। प्रदेश के करीब 65 लाख उपभोक्ताओं को आने वाले समय में महंगी बिजली का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि अभी तक बिजली दरों में कितनी बढ़ोतरी होगी, इस पर अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है, लेकिन संकेत साफ हैं कि Electricity बिल में इजाफा लगभग तय माना जा रहा है।

नियामक आयोग कर रहा अंतिम समीक्षा

राज्य का Electricity नियामक आयोग फिलहाल इस पूरे मामले पर गहन विचार-विमर्श कर रहा है। बताया जा रहा है कि आयोग ने छत्तीसगढ़ राज्य पॉवर कंपनी से कुछ अतिरिक्त जानकारियां मांगी थीं, जो अब उसे मिल चुकी हैं। इसके बाद अब अंतिम स्तर पर आंकड़ों की समीक्षा की जा रही है। संभावना जताई जा रही है कि इसी महीने के अंत तक नए टैरिफ की घोषणा कर दी जाएगी और इसे अगले महीने से लागू किया जा सकता है। इस फैसले का सीधा असर प्रदेश के लाखों उपभोक्ताओं पर पड़ेगा।

पॉवर कंपनी ने पेश किया वित्तीय ब्योरा

पॉवर कंपनी ने नए वित्तीय वर्ष के लिए अपनी आय और खर्च का पूरा विवरण आयोग के सामने रखा है। कंपनी के अनुसार मौजूदा दरों के आधार पर उसे लगभग 26,216 करोड़ रुपये का राजस्व मिलने का अनुमान है, जबकि सालभर का कुल खर्च करीब 25,460 करोड़ रुपये बताया गया है। इस हिसाब से कंपनी को लगभग 756 करोड़ रुपये का लाभ होता नजर आ रहा है। लेकिन असली चुनौती पिछले वर्षों के घाटे की भरपाई को लेकर है। कंपनी का कहना है कि पुराने रेवेन्यू गैप को जोड़ने के बाद उसे अभी भी करीब 6,300 करोड़ रुपये की अतिरिक्त जरूरत है।

पुराने घाटे ने बढ़ाई मुश्किलें

यदि कंपनी के मौजूदा लाभ को इस घाटे में समायोजित किया जाए, तब भी कुल मिलाकर करीब 32,500 करोड़ रुपये से ज्यादा के राजस्व की जरूरत सामने आ रही है। यही कारण है कि कंपनी ने Electricity दरों में बढ़ोतरी की मांग रखी है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर आयोग इस घाटे को मान्यता देता है, तो इसका सीधा असर उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ेगा और बिजली बिल में बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है।

उपभोक्ताओं को राहत देने के विकल्प

इस बीच उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए कई विकल्पों पर भी विचार किया जा रहा है। एक प्रस्ताव यह है कि पूरे घाटे को एक साथ वसूलने के बजाय इसे तीन वर्षों में बांट दिया जाए। इससे तत्काल बोझ कम हो सकता है। हालांकि इस विकल्प के साथ एक चुनौती भी जुड़ी है। अगर घाटे को लंबे समय में बांटा जाता है, तो केंद्र सरकार की आरडीएसएस योजना के तहत मिलने वाली वित्तीय सहायता प्रभावित हो सकती है।

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सरकार की सब्सिडी बन सकती है सहारा

एक अन्य महत्वपूर्ण विकल्प राज्य सरकार की ओर से सब्सिडी देने का है। दो साल पहले भी सरकार ने करीब 1,000 करोड़ रुपये की सब्सिडी देकर उपभोक्ताओं को राहत दी थी। यदि इस बार भी ऐसा कदम उठाया जाता है, तो Electricity दरों में बढ़ोतरी का असर कम किया जा सकता है। सरकार का यह फैसला आम उपभोक्ताओं के लिए काफी अहम साबित हो सकता है।

20% तक बढ़ सकती हैं बिजली दरें

विशेषज्ञों के अनुसार यदि आयोग कंपनी के 6,300 करोड़ रुपये के दावे में से करीब 5,000 करोड़ रुपये के घाटे को मंजूरी दे देता है, तो बिजली दरों में करीब 20 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी संभव है। तुलना करें तो पिछले वर्ष मात्र 500 करोड़ रुपये के घाटे को मान्यता मिलने पर Electricity दरों में करीब 2 प्रतिशत की ही बढ़ोतरी की गई थी। इस बार बढ़ोतरी का असर कहीं ज्यादा बड़ा हो सकता है।

संतुलन बनाना आयोग के लिए चुनौती

Electricity नियामक आयोग के सामने सबसे बड़ी चुनौती संतुलन बनाए रखने की है। एक तरफ बिजली कंपनियों की वित्तीय स्थिति को मजबूत करना जरूरी है, तो दूसरी तरफ आम उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ डालने से बचना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। इसी कारण आयोग हर पहलू का गहराई से विश्लेषण कर रहा है ताकि ऐसा फैसला लिया जा सके, जिससे दोनों पक्षों के हित सुरक्षित रह सकें।

अंतिम फैसले पर टिकी हैं निगाहें

फिलहाल प्रदेश के सभी उपभोक्ताओं की नजरें आयोग के अंतिम फैसले पर टिकी हुई हैं। यह फैसला तय करेगा कि आने वाले समय में Electricity कितनी महंगी होगी और इसका आम जनता की जेब पर कितना असर पड़ेगा।

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