जनगणना का बिगुल: छत्तीसगढ़ में मकानों पर नंबर लिखना शुरू, मई से शुरू होगी गणना
जनगणना
छत्तीसगढ़ में जनगणना 2027 को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। राजधानी रायपुर समेत कई जिलों में घरों पर मकान नंबर लिखने का काम शुरू हो चुका है। यह प्रक्रिया आगामी सर्वे को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए की जा रही है। जनगणना का पहला चरण 1 मई 2026 से शुरू होगा।
मई से शुरू होगा घर-घर सर्वे
जनगणना के पहले चरण के तहत मकान सूचीकरण और आवास गणना का मैदानी कार्य मई से शुरू किया जाएगा। इस दौरान अधिकारी और कर्मचारी घर-घर जाकर जानकारी एकत्र करेंगे। फिलहाल राज्यभर में इसकी तैयारियां और प्रशिक्षण अंतिम चरण में हैं, इसलिए अभी तक किसी भी जिले के आधिकारिक आंकड़े जारी नहीं किए गए हैं।
प्रशिक्षण और नंबरिंग का काम पूरा होने की ओर
सूत्रों के अनुसार रायपुर, दुर्ग, रायगढ़ और बलरामपुर जिलों में प्रगणकों और पर्यवेक्षकों का प्रशिक्षण लगभग पूरा हो चुका है। वहीं रायपुर नगर निगम और दुर्ग जिले में मकानों पर नंबर लिखने का काम भी शुरू कर दिया गया है, ताकि सर्वे के दौरान किसी तरह की दिक्कत न हो।
सरकार ने जारी की अधिसूचना
छत्तीसगढ़ सरकार ने 3 फरवरी 2026 को अधिसूचना जारी कर जनगणना प्रक्रिया का औपचारिक ऐलान कर दिया है। यह अधिसूचना केंद्र सरकार और गृह मंत्रालय के निर्देशों के आधार पर जारी की गई है। इसके तहत जनगणना अधिकारियों को अपने क्षेत्र में जाकर लोगों से आवश्यक जानकारी जुटाने का अधिकार दिया गया है।
घर-घर पहुंचेंगे प्रगणक
जनगणना के दौरान प्रगणक प्रत्येक घर में जाकर परिवार और मकान से जुड़ी जानकारी एकत्र करेंगे। इसमें लोगों से सीधे सवाल पूछे जाएंगे और डेटा दर्ज किया जाएगा, जिससे राज्य की सामाजिक और आर्थिक स्थिति का आंकलन किया जा सके।
33 सवालों में जुटाई जाएगी जानकारी
इस बार जनगणना में 33 प्रमुख बिंदुओं पर जानकारी ली जाएगी। इसमें मकान की स्थिति, निर्माण सामग्री, पानी की सुविधा, शौचालय, रसोईघर, एलपीजी या पीएनजी कनेक्शन जैसी बुनियादी सुविधाएं शामिल होंगी।
इसके अलावा परिवार के मुखिया का नाम, लिंग, जाति, परिवार के सदस्यों की संख्या, भोजन की आदतें और घर में मौजूद इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जैसे टीवी, मोबाइल, कंप्यूटर और इंटरनेट सुविधा से जुड़ी जानकारी भी ली जाएगी।
मोबाइल और इंटरनेट तक की होगी पूछताछ
जनगणना के दौरान संचार सुविधाओं पर भी खास ध्यान दिया जाएगा। इसमें मोबाइल नंबर, स्मार्टफोन, इंटरनेट और टेलीफोन जैसी सुविधाओं के बारे में भी जानकारी जुटाई जाएगी, ताकि डिजिटल पहुंच का सही आकलन किया जा सके।
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