नक्सलवाद पर काबू के बाद भी बस्तर में नहीं घटेगी फोर्स, 10 नए थानों में होगी 40 हजार जवानों की पोस्टिंग

बस्तर से फिलहाल नहीं हटेंगे सुरक्षा बल

बस्तर से फिलहाल नहीं हटेंगे सुरक्षा बल

बस्तर संभाग में नक्सलवाद को तय समय सीमा के भीतर समाप्त करने की घोषणा भले ही कर दी गई हो, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था में कोई ढील नहीं दी जा रही है। बस्तर के आईजी सुंदरराज पी. ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल केंद्रीय सुरक्षा बलों के करीब 40 हजार जवान क्षेत्र से नहीं हटाए जाएंगे। उन्होंने बताया कि आने वाले छह महीनों तक जमीनी हालात का लगातार मूल्यांकन किया जाएगा, जिसके बाद विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजी जाएगी। उसी रिपोर्ट के आधार पर आगे फोर्स की तैनाती को लेकर निर्णय लिया जाएगा।

नए थानों के जरिए सुरक्षा ढांचे को मजबूती

बस्तर में सुरक्षा व्यवस्था को और सुदृढ़ करने के लिए 10 नए पुलिस थाने स्थापित किए जा रहे हैं। इन थानों में बस्तर फाइटर्स के 4 हजार से अधिक जवानों की तैनाती की जाएगी। साथ ही जिन थानों में पहले से बल की कमी है, वहां भी इन जवानों को भेजा जाएगा। बस्तर फाइटर्स में थाना प्रभारी (TI) से लेकर अन्य सभी स्तर के पुलिसकर्मी शामिल हैं, जो स्थानीय परिस्थितियों से अच्छी तरह परिचित हैं।

गश्त और ऑपरेशन जारी रहेंगे

नक्सलवाद समाप्ति के दावे के बावजूद जंगलों में सुरक्षा बलों की सक्रियता बनी रहेगी। केंद्रीय बलों के जवान नियमित गश्त जारी रखेंगे और उनका मुख्य फोकस नक्सलियों द्वारा छिपाए गए हथियारों की खोज और निष्क्रिय करने पर रहेगा। इसके अलावा बम निष्क्रिय करने के अभियान भी लगातार चलते रहेंगे।

साथ ही सुरक्षा बल गांवों में जनजागरण अभियान चलाकर लोगों को मुख्यधारा से जोड़ने का काम करेंगे। आत्मसमर्पण कर चुके नक्सलियों की गतिविधियों पर भी नजर रखी जाएगी, ताकि किसी भी प्रकार की पुनः सक्रियता को रोका जा सके।

किन इलाकों में खुलेंगे नए थाने

राज्य सरकार ने वर्ष 2026-27 के बजट में बस्तर के कई संवेदनशील क्षेत्रों में नए थाने खोलने की मंजूरी दी है। इसके तहत दंतेवाड़ा जिले के पोटाली, सुकमा के मेहता और सिलगेर, बीजापुर के पुजारी, कांकेर के कोरचोली, नारायणपुर के गरपा, कस्तुरमेटा, तोके और कुतुल के साथ कांकेर के सितरम में नए थाने स्थापित किए जाएंगे। इसके अलावा वर्ष 2025-26 के बजट में सुकमा जिले के एलमागुण्डा और डब्बाकोन्टा में भी दो नए थानों की स्वीकृति दी जा चुकी है।

हालात सामान्य रखने पर प्रशासन का फोकस

प्रशासन का कहना है कि भले ही नक्सलवाद पर नियंत्रण का दावा किया गया है, लेकिन पूरी तरह से स्थिति सामान्य बनाए रखने के लिए सुरक्षा बलों की मौजूदगी जरूरी है। इसी वजह से फिलहाल किसी भी तरह की जल्दबाजी में फोर्स हटाने का निर्णय नहीं लिया जाएगा और हर कदम सोच-समझकर उठाया जाएगा।

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