Naxal Leader Devji Surrender News: 31 मार्च से पहले नक्सल मोर्चे पर बड़ी सफलता, देव जी ने किया आत्मसमर्पण, जानिए कौन है देव जी?

Naxal Leader Devji Surrender News: नक्सलवाद के खिलाफ जारी सुरक्षा अभियानों के बीच बड़ी सफलता सामने आई है। प्रतिबंधित संगठन CPI (Maoist) के शीर्ष नेता देव जी ने अपने चार साथियों के साथ तेलंगाना के पुलिस महानिदेशक (DGP) के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। हैदराबाद में हुए इस सरेंडर को सुरक्षा एजेंसियां नक्सल मोर्चे पर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मान रही हैं। बताया जा रहा है कि संयुक्त सुरक्षा अभियान “ऑपरेशन कगार” के दबाव के बाद संगठन का शीर्ष नेतृत्व कमजोर पड़ा, जिसके चलते यह फैसला लिया गया।

देव जी कौन है?

देव जी का असली नाम थिप्पिरी तिरुपति बताया जाता है। करीब 60 वर्षीय तिरुपति मूल रूप से तेलंगाना के करीमनगर जिले का निवासी है। छात्र जीवन के दौरान वह रैडिकल स्टूडेंट्स यूनियन से जुड़ा और बाद में भूमिगत माओवादी गतिविधियों में सक्रिय हो गया। संगठन में उसकी रणनीतिक भूमिका और सैन्य समझ के चलते वह मिलिट्री इंटेलिजेंस विंग का प्रमुख बना। आगे चलकर वह सेंट्रल मिलिट्री कमीशन का इंचार्ज और पोलित ब्यूरो सदस्य भी रहा। मई 2025 में बसवराजु के मारे जाने के बाद सितंबर 2025 में उसे संगठन का महासचिव बनाया गया था।

कई बड़े हमलों से जुड़ा रहा नाम

सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार देव जी कई बड़े एंबुश और आईईडी हमलों की रणनीति में शामिल रहा। झीरम घाटी कांड सहित कई हमलों में उसकी भूमिका बताई जाती है। विभिन्न राज्यों में उस पर 1 से 2 करोड़ रुपये तक का इनाम घोषित था। जांच एजेंसियों का कहना है कि संगठन के विस्तार और नेटवर्क मजबूत करने में उसकी अहम भूमिका रही है।

‘ऑपरेशन कगार’ बना टर्निंग पॉइंट

सूत्रों के मुताबिक कर्रेगुट्टा क्षेत्र में चलाए गए संयुक्त अभियान “ऑपरेशन कगार” ने संगठन की कमर तोड़ दी। लगातार बढ़ते दबाव और सुरक्षा बलों की घेराबंदी के चलते शीर्ष नेतृत्व ने आत्मसमर्पण का रास्ता चुना। इसे लाल आतंक के खिलाफ बड़ी रणनीतिक सफलता माना जा रहा है।

सरकार का बयान

छत्तीसगढ़ के गृह मंत्री Vijay Sharma ने कहा कि नक्सलियों का बड़ा धड़ा अब कमजोर हो चुका है और अभियान तेज़ी से जारी है। उन्होंने बाकी उग्रवादियों से भी मुख्यधारा में लौटकर आत्मसमर्पण करने और पुनर्वास योजनाओं का लाभ उठाने की अपील की।

नक्सल मोर्चे पर बड़ी उपलब्धि

सुरक्षा एजेंसियां इसे 31 मार्च 2026 से पहले की बड़ी उपलब्धियों में गिन रही हैं। माना जा रहा है कि शीर्ष नेतृत्व के आत्मसमर्पण से क्षेत्र में नक्सली गतिविधियों पर असर पड़ेगा और आने वाले समय में और भी कैडर हथियार डाल सकते हैं।

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