बिरनपुर हिंसा मामला: बेमेतरा कोर्ट का बड़ा फैसला, हत्या के सभी 17 आरोपी बरी
बिरनपुर हिंसा मामला
बेमेतरा जिले से जुड़े बहुचर्चित बिरनपुर हिंसा मामले में जिला सत्र न्यायालय ने अहम फैसला सुनाया है। करीब तीन साल बाद कोर्ट ने हत्या के आरोप में गिरफ्तार किए गए सभी 17 आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया है। यह मामला बिरनपुर गांव में हुई साम्प्रदायिक हिंसा से जुड़ा था, जिसने पूरे प्रदेश में राजनीतिक और सामाजिक हलचल मचा दी थी।
हिंदू संगठन के बंद के दौरान हुई थी हिंसा
यह घटना उस समय सामने आई थी, जब हिंदू संगठनों द्वारा आहूत छत्तीसगढ़ बंद के दौरान आंदोलन हिंसक हो गया था। इसी दौरान बकरी चरवाहा रहीम मोहम्मद और उनके पुत्र ईदुल मोहम्मद के शव कोरवाय गांव के खेत में मिले थे। पुलिस ने हत्या के आरोप में 17 लोगों को गिरफ्तार किया था, लेकिन अदालत में पेश साक्ष्यों के आधार पर सभी को बरी कर दिया गया।
दो बच्चों की लड़ाई से भड़की थी चिंगारी
बिरनपुर हिंसा की शुरुआत दो बच्चों के बीच हुई मामूली कहासुनी से हुई थी, जो धीरे-धीरे हिंदू और मुस्लिम समुदायों के बीच हिंसक झड़प में बदल गई। 8 अप्रैल 2023 को साजा विधायक ईश्वर साहू के 22 वर्षीय पुत्र भुनेश्वर साहू की लाठी-डंडों से पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी। इसके बाद पूरे इलाके में तनाव फैल गया।
छत्तीसगढ़ बंद, आगजनी और कर्फ्यू
घटना के विरोध में 10 अप्रैल 2023 को विश्व हिंदू परिषद ने छत्तीसगढ़ बंद का आह्वान किया। इस दौरान गांव में आगजनी हुई और हालात बेकाबू हो गए। प्रशासन ने इलाके में धारा 144 लागू कर दी और करीब दो सप्ताह तक कर्फ्यू लगाया गया। शुरुआत में पुलिस ने 12 आरोपियों को नामजद किया था, लेकिन बाद में जांच का जिम्मा CBI को सौंपा गया।
CBI चार्जशीट में क्या आया सामने
सीबीआई ने 30 सितंबर 2025 को दाखिल चार्जशीट में यह स्पष्ट किया कि यह मामला किसी राजनीतिक साजिश का नतीजा नहीं था। चार्जशीट में पूर्व विधायक अंजोर यदु का नाम भी शामिल नहीं किया गया, जबकि इस पर पहले सवाल उठाए जाते रहे थे। अप्रैल 2024 में CBI टीम ने बिरनपुर पहुंचकर नए सिरे से जांच शुरू की थी।
मामले पर जमकर हुई राजनीति
इस हिंसा को लेकर प्रदेश की राजनीति भी गरमा गई थी। भाजपा ने तत्कालीन कांग्रेस सरकार पर तुष्टिकरण का आरोप लगाया, वहीं कांग्रेस ने इसे भाजपा की साजिश बताया। फरवरी 2024 में विधानसभा में उठे सवालों के बाद डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने CBI जांच की घोषणा की थी।
ईश्वर साहू ने सदन में अपने बेटे की हत्या का दर्द बयां किया, जिसके बाद भाजपा ने उन्हें टिकट दिया और वे वर्तमान में साजा विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं।
