छत्तीसगढ़ में नया आदेश, पढ़ाई के साथ आवारा कुत्तों की निगरानी भी करेंगे शिक्षक, प्रशासनिक व्यवस्था पर उठे सवाल
छत्तीसगढ़ के लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा जारी एक नए आदेश ने पूरे शिक्षा तंत्र में चर्चा की लहर पैदा कर दी है। नए निर्देश के मुताबिक, अब स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षक स्कूल परिसर और उसके आसपास घूम रहे आवारा कुत्तों पर नजर रखेंगे और इसकी जानकारी पंचायत, जनपद पंचायत या नगर निगम के डॉग कैचर को देंगे। आदेश में यह भी कहा गया है कि स्कूल के भीतर कुत्तों के प्रवेश को रोकने के लिए स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय किया जाए।
लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या सरकार अब शिक्षकों से पढ़ाई के अलावा कुत्तों की निगरानी भी कराएगी? क्या यही प्रशासनिक व्यवस्था का समाधान है?
शिक्षकों पर पहले ही कई गैर-शिक्षकीय कार्यों का बोझ है—गणना प्रपत्र, सर्वे, BLO ड्यूटी, वोटर वेरिफिकेशन, चुनावी कार्य, अलग-अलग योजनाओं की रिपोर्टिंग… ऐसे में सरकार का नया आदेश कई गंभीर सवाल खड़ा करता है।
क्या स्थानीय निकायों की जिम्मेदारी भी अब शिक्षकों पर डाली जा रही है?
आवारा कुत्तों की समस्या वास्तविक है, लेकिन सवाल यह है कि कुत्तों की पकड़ एवं नियंत्रण का काम नगर निगम, नगरपालिका और पंचायतों का होता है। फिर यह जिम्मेदारी शिक्षकों पर क्यों? क्या सरकारी विभाग अपने मूल दायित्वों से बच रहे हैं? जब प्रशासनिक निकायों के पास डॉग कैचर, स्टाफ और विशेषज्ञ टीमें मौजूद हैं, तो स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षकों को यह भूमिका क्यों दी जा रही है?
अतिरिक्त जिम्मेदारियां शिक्षा की गुणवत्ता को प्रभावित करेंगी?
यह आदेश स्कूलों में पढ़ाई की गुणवत्ता पर भी सवाल खड़ा करता है। अगर शिक्षक पढ़ाने के वक्त कुत्तों की निगरानी करते रहेंगे, डॉग कैचर को सूचना देंगे और प्रशासन से समन्वय करेंगे, तो क्या बच्चों की पढ़ाई बाधित नहीं होगी? क्या सरकार इस दिशा में कोई विकल्प तलाश नहीं कर सकती थी?
आदेश की व्यवहारिकता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
क्या ग्रामीण इलाकों के स्कूलों में जहां कुत्तों की संख्या ज्यादा होती है, वहां शिक्षक इस जिम्मेदारी को संभाल पाएंगे?
स्थानीय प्रशासन की भूमिका पर भी उठे सवाल
सरकारी आदेश यह संकेत देता है कि स्कूलों के आसपास की समस्याओं का समाधान स्थानीय निकायों से ज्यादा शिक्षकों को करना होगा।
अगर नगर निगम और पंचायतें अपने दायित्व ठीक से निभाएं, तो क्या शिक्षकों पर यह बोझ डालने की नौबत आएगी?
स्थानीय प्रशासन के कमजोर तंत्र को मजबूत करने के बजाय शिक्षकों पर जिम्मेदारियां डालना क्या उचित कदम है?
