Bilaspur Conversion Case: बिलासपुर में धर्मांतरण का मामला, प्रार्थना सभा के नाम पर चल रहा था ईसाई धर्म प्रचार, दो के खिलाफ केस दर्ज

Bilaspur Conversion Case: छत्तीसगढ़ की न्यायधानी बिलासपुर में एक बार फिर धर्मांतरण का मामला सामने आया है। मामला पचपेड़ी थाना क्षेत्र के कुकुर्दीखुर्द गांव का है, जहां एक घर में ईसाई धर्म की प्रार्थना सभा के नाम पर धर्मांतरण कराने का आरोप लगा है।

हिंदू संगठनों की शिकायत पर पुलिस ने दो आरोपियों—संजय डांडेकर और रिरिक लहसकर—के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। बताया जा रहा है कि ये दोनों आरोपी हिंदू समाज के लोगों को प्रलोभन देकर ईसाई धर्म अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे थे।

हिंदू संगठनों ने दी पुलिस को सूचना, मचा हंगामा

सूत्रों के मुताबिक, हिंदू संगठन के सदस्यों को सूचना मिली थी कि संजय डांडेकर के घर में ईसाई धर्म की किताबों और बाइबिल के माध्यम से प्रार्थना सभा चल रही है। इस दौरान वहां बड़ी संख्या में महिलाएं, पुरुष और बच्चे मौजूद थे।

आरोप है कि संजय डांडेकर और रिरिक लहसकर लोगों को यह कहकर धर्म बदलने के लिए राज़ी कर रहे थे कि ऐसा करने से जीवन में सुख-समृद्धि और आर्थिक मदद मिलेगी।

मामले की खबर मिलते ही हिंदू संगठन के कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे और पुलिस को सूचना दी। इसके बाद पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर सभा को बंद कराया। इस दौरान थोड़ी देर के लिए हंगामे की स्थिति भी उत्पन्न हुई, लेकिन पुलिस के हस्तक्षेप से हालात नियंत्रण में आ गए।

दो आरोपियों पर दर्ज हुआ केस, जांच जारी

हिंदू संगठन के नारायण पटेल ने पूरे मामले की लिखित शिकायत पचपेड़ी थाने में दर्ज कराई है। शिकायत के आधार पर पुलिस ने संजय डांडेकर और रिरिक लहसकर के खिलाफ धारा 295A और धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम की धारा 3(5) के तहत मामला दर्ज किया है।

पुलिस का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है और यदि आवश्यक हुआ तो और लोगों से पूछताछ की जाएगी। वहीं, हिंदू संगठनों ने मांग की है कि इस तरह की घटनाओं पर कड़ी कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में ऐसी गतिविधियाँ दोबारा न हों।

धर्मांतरण के मामलों से चिंतित सामाजिक संगठन

बिलासपुर और आसपास के इलाकों में पिछले कुछ महीनों में धर्मांतरण से जुड़े कई मामले सामने आए हैं। सामाजिक संगठनों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं गांवों में सामाजिक तनाव पैदा कर रही हैं और प्रशासन को इन पर सख्ती से रोक लगानी चाहिए।

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