ईसाई बने रमनलाल साहू के शव को गांव में दफनाने पर ग्रामीणों का विरोध
बालोद। छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के गुरूर विकासखंड के सनौद थाना क्षेत्र अंतर्गत जेवरतला गांव में रमनलाल साहू (50 वर्ष) के अंतिम संस्कार को लेकर लगातार दूसरे दिन भी तनावपूर्ण स्थिति बनी रही। इलाज के दौरान मृतक की मौत हो गई थी, और उनके शव को गांव लाने की कोशिश पर ग्रामीणों ने कड़ा विरोध जताया। मृतक और उनके परिवार पर ईसाई धर्म अपनाने का आरोप लगाते हुए ग्रामीणों ने शव को गांव की सीमा में प्रवेश नहीं करने दिया। परिणामस्वरूप, शव को गांव से करीब 5 किमी दूर एम्बुलेंस में रखा गया। रविवार को ग्रामीणों की बैठक के बाद पंचायत में फैसला लिया गया कि शव को सांकरा के कब्रिस्तान में दफनाया जाएगा।
जानकारी के अनुसार, शनिवार दोपहर 2 बजे से देर रात 11 बजे तक जिला प्रशासन और पुलिस के आला अधिकारी गांव में डेरा डाले रहे। उन्होंने स्थिति को शांत करने के लिए ग्रामीणों और परिजनों से लंबी चर्चा की। रात में शव को बालोद में सुरक्षित रखा गया। हालांकि, मृतक के परिजन अंतिम दर्शन के लिए शव को घर लाने पर अड़े रहे, लेकिन ग्रामीणों ने साफ मना कर दिया। सुबह से चली ग्रामीणों की बैठक में भी यही सहमति बनी कि गांव की भूमि पर धर्मांतरित व्यक्ति का अंतिम संस्कार नहीं होगा।
विरोध से लेकर प्रशासनिक हस्तक्षेप तक
शनिवार का हंगामा: मृतक रमनलाल साहू पिछले कुछ वर्षों से ईसाई धर्म का पालन कर रहे थे। उनके शव को परिजन अंतिम संस्कार के लिए गांव लाए, तो ग्रामीणों को जैसे ही भनक लगी, उन्होंने तुरंत विरोध शुरू कर दिया। देखते ही देखते सैकड़ों ग्रामीण इकट्ठा हो गए और करीब तीन घंटे तक हंगामा चला। ग्रामीणों का तर्क था कि धर्म परिवर्तन करने वालों का शव गांव की जमीन पर दफनाना परंपरा के खिलाफ है।
प्रशासन की मध्यस्थता: सूचना पर एसडीएम, तहसीलदार, थाना प्रभारी सहित भारी पुलिस बल मौके पर पहुंचा। अधिकारियों ने दोनों पक्षों को समझाया और रात में शव को बालोद के अस्पताल में रखवाया। पंचनामा तैयार कर धमतरी जिले के सांकरा कब्रिस्तान में दफनाने का प्रारंभिक फैसला लिया गया।
रविवार का फैसला: सुबह ग्रामीणों की बैठक में पुनः चर्चा हुई। परिजनों ने गांव में अंतिम दर्शन की मांग की, लेकिन ग्रामीणों ने अनुमति नहीं दी। अंततः सहमति बनी कि शव को सांकरा कब्रिस्तान ले जाकर ईसाई रीति के अनुसार दफनाया जाएगा। प्रशासन ने पंचनामा भरकर प्रक्रिया पूरी की।
मृतक के परिजनों का कहना है कि यह उनकी धार्मिक स्वतंत्रता का मामला है, जबकि ग्रामीण परंपराओं का हवाला देकर विरोध जता रहे हैं। इस घटना ने गांव में सांप्रदायिक तनाव पैदा कर दिया है। प्रशासन ने शांति बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस फोर्स तैनात की है और किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए सतर्कता बरत रही है।
