छत्तीसगढ़ में 638 करोड़ का बड़ा NGO घोटाला: IAS अफसरों पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप
छत्तीसगढ़ में राज्य निःशक्तजन स्रोत संस्थान के नाम से बनाए गए एक NGO के माध्यम से 638 करोड़ रुपये के गबन का मामला सामने आया है। जांच में सामने आया है कि सरकारी विभाग की बजाय एक सोसाइटी ने सरकारी कार्यों का प्रबंधन किया, जिससे 31 वित्तीय गड़बड़ियां उजागर हुईं। हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणी से यह स्पष्ट हुआ कि कई उच्च अधिकारियों ने मिलकर सरकारी खजाने को लूटने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
फर्जी नियुक्तियां और वेतन भुगतान के मामले में बड़ा घोटाला
जांच में यह भी पता चला कि कई कर्मचारियों के नाम पर वेतन निकाला गया, जबकि वे सरकारी संस्था PRRC में कभी कार्यरत नहीं थे। करोड़ों रुपये ऐसे संस्थान को जारी किए गए जो वास्तविकता में अस्तित्व में ही नहीं था। SRC नामक सोसाइटी के माध्यम से नकदी निकालकर लाखों की हेराफेरी की गई। वेतन भुगतान के लिए ई-कोड जनरेट नहीं किए गए और नकद राशि विभिन्न उद्देश्यों के लिए उपयोग की गई।
कोर्ट ने लगाई कड़ी फटकार, CBI जांच की सिफारिश
मुख्य सचिव की रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि SRC का पिछले 14 वर्षों से ऑडिट तक नहीं हुआ, और PRRC कर्मचारियों के वेतन भुगतान की सही जानकारी उपलब्ध नहीं थी। कोर्ट ने पाया कि वित्तीय अनियमितताओं का पता लगाने के लिए कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई, जिससे यह माना गया कि संबंधित अधिकारियों ने सार्वजनिक धन का दुरुपयोग किया है।
CBI जांच के लिए न्यायालय का निर्देश
न्यायालय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए FIR दर्ज करने और CBI को स्वतंत्र जांच के लिए निर्देश दिया। हालांकि सरकार ने स्थानीय पुलिस जांच की क्षमता पर सवाल उठाए, लेकिन अदालत ने संविधान के तहत CBI जांच को अनिवार्य माना। मामले की जांच और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के लिए हाईकोर्ट ने साफ निर्देश दिए हैं।



