132 प्रधान पाठकों का वेतन रूका: ‘एक पेड़ मां के नाम’ डेटा अपलोड नहीं करने की मिली सजा, शिक्षकों ने कार्यालय घेराव की दी चेतावनी
गरियाबंद। जिले के मैनपुर विकासखंड में शिक्षा विभाग की पहल ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान की जानकारी समय पर गूगल मैप में अपलोड नहीं करने के चलते 132 प्रधान पाठकों का अगस्त माह का वेतन रोक दिया गया है। इस कार्यवाही से शिक्षकों में भारी नाराजगी और असंतोष देखने को मिल रहा है। शिक्षकों का कहना है कि यह फैसला नियम विरुद्ध है और बिना उचित ट्रेनिंग व तकनीकी सहयोग के यह अपेक्षा करना अनुचित था।
क्या है पूरा मामला?
मैनपुर विकासखंड के शिक्षा अधिकारियों ने व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से प्रधान पाठकों को निर्देश दिया था कि ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान की जानकारी गूगल मैप पर अपलोड करें। लेकिन शिक्षकों का कहना है कि न तो उन्हें उचित प्रशिक्षण दिया गया और न ही तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई गई। 132 में से कई प्रधान पाठकों ने तकनीकी कारणों से डेटा अपलोड नहीं कर पाए, जिसके चलते उनका वेतन बिना लिखित सूचना के रोक दिया गया।
शिक्षकों का आक्रोश:
प्रधान पाठकों का कहना है कि उनके मूल कार्य शिक्षण और छात्रों के भविष्य को संवारना है, न कि गूगल फॉर्म भरना। बिना पूर्व सूचना और उचित प्रक्रिया के वेतन रोकना न केवल अन्यायपूर्ण है बल्कि यह मौलिक अधिकारों का हनन है। टीचर्स एसोसिएशन के प्रांतीय संगठन मंत्री यशवंत बघेल ने इस फैसले की कड़ी निंदा की और कहा कि अगर जल्द वेतन जारी नहीं किया गया तो वे विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय का घेराव करेंगे।
BEO का पक्ष
मामले में मैनपुर के विकासखंड शिक्षा अधिकारी महेश पटेल ने सफाई दी कि: ‘एक पेड़ मां के नाम’ और UDISE डेटा एंट्री जैसे महत्वपूर्ण कार्य 2 महीने से लंबित थे। बार-बार नोटिस देने के बावजूद कार्य पूर्ण नहीं हुआ, इसलिए जिला शिक्षा अधिकारी के निर्देश पर वेतन रोकने की कार्यवाही की गई। जैसे ही संबंधित प्रधान पाठक कार्य पूरा करेंगे, उनका वेतन तत्काल जारी कर दिया जाएगा।
