जब चाहे तब नहीं कर पाएंगे धरना-प्रदर्शन: बिना अनुमति ऐसे आयोजनों पर सख्त पाबंदी, नए दिशा-निर्देश जारी

रायपुर: छत्तीसगढ़ सरकार ने सार्वजनिक स्थलों पर धरना, प्रदर्शन, रैली या अन्य आयोजन के लिए कड़े नियम लागू कर दिए हैं। अब राज्य के किसी भी नगर निगम, नगरपालिका या नगर पंचायत के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों में बिना अनुमति के ऐसे आयोजनों की अनुमति नहीं होगी।

कौन-कौन से क्षेत्र लागू होंगे नियम?

यह नियम उन जगहों पर लागू होगा जहाँ आयोजन स्थल का क्षेत्रफल 5,000 वर्गफुट से अधिक हो और वहां एक समय में 500 से ज्यादा लोग एकत्रित हों। प्रदेश के सभी नगर निगम आयुक्त, पालिकाओं एवं नगर पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को इस संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।

आयोजन के लिए आवेदन की प्रक्रिया:

आयोजन करने के लिए संबंधित निकाय को कम से कम सात दिन पहले आवेदन देना अनिवार्य होगा। आवेदन के साथ अनुविभागीय अधिकारी राजस्व, थाना प्रभारी, जिला सेनानी होमगार्ड (अग्निशमन), विद्युत विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र भी संलग्न करना होगा। इसके अलावा आयोजन के लिए तय शुल्क भी अदा करना होगा।

सुरक्षा और संरचना संबंधी आवश्यकताएं:

पंडाल या अस्थायी संरचना का निर्माण यथासंभव अग्निरोधी सामग्री से किया जाना चाहिए। सूखी घास, बिना अग्निरोधक उपचार वाला पतला वस्त्र और अत्यधिक प्लास्टिक सजावट का उपयोग न्यूनतम रखा जाएगा। पंडाल की संरचना इतनी मजबूत होनी चाहिए कि वह वायु-दाब और आगंतुकों के दबाव को सह सके। बड़े और जटिल पंडालों के लिए संरचनात्मक स्थायित्व प्रमाण-पत्र भी लेना होगा।

अनुमति की शर्तें और निरस्तीकरण:

किसी भी समय नगर निगम आयुक्त या मुख्य नगर पालिका अधिकारी की ओर से अनुमति निरस्त की जा सकती है। आयोजन के लिए आवेदन करते समय आयोजन का उद्देश्य, स्थल का नक्शा, सुरक्षा योजना और स्वच्छता व्यवस्था का उल्लेख करना अनिवार्य होगा।

आयोजन समिति की जिम्मेदारियां:

आयोजन समाप्ति के बाद स्थल की साफ-सफाई आयोजन समिति का दायित्व होगा। साथ ही, स्थानीय निकाय के साथ समन्वय कर अस्थायी शौचालय, जलापूर्ति और अपशिष्ट प्रबंधन की व्यवस्था करनी होगी। किसी भी परिस्थिति में पंडाल की स्थापना ऐसी जगह नहीं की जानी चाहिए जहाँ यातायात या आपातकालीन सेवाओं में बाधा उत्पन्न हो। पंडालों में प्रवेश और निकास मार्ग स्पष्ट रूप से चिन्हित होने चाहिए।

 

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