कौन हैं अयातुल्ला अलीरेजा अराफी? खामेनेई के बाद बने ईरान के अंतरिम सुप्रीम लीडर
अमेरिका-इजरायल के हमले में अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद अयातुल्ला अलीरेजा अराफी को ईरान का अंतरिम सुप्रीम लीडर बनाया गया है। 67 वर्षीय अराफी लंबे समय से ईरान की धार्मिक और राजनीतिक व्यवस्था में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं और खामेनेई के करीबी माने जाते हैं।
अराफी का जन्म 1959 में यज़्द प्रांत के मेयबोद में हुआ था। वे एक धार्मिक परिवार से आते हैं। उनके पिता अयातुल्लाह मोहम्मद इब्राहिम अराफी, ईरान के इस्लामी गणराज्य के संस्थापक अयातुल्लाह रुहोल्लाह खुमैनी के करीबी सहयोगी रहे थे।
नए सुप्रीम लीडर के चुनाव तक अंतरिम परिषद देश की कमान संभालेगी। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी ISNA के अनुसार, अयातुल्ला अलीरेजा अराफी अंतरिम नेतृत्व परिषद में विधि विशेषज्ञ सदस्य के रूप में कार्य करेंगे। ईरानी संविधान के मुताबिक राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन, मुख्य न्यायाधीश घोलाम-होसैन मोहसिनी-एजेई और गार्जियन काउंसिल के एक धर्मगुरु के साथ मिलकर यह परिषद तब तक देश की जिम्मेदारी संभालेगी, जब तक नए सुप्रीम लीडर का चुनाव नहीं हो जाता।
अयातुल्ला अलीरेजा अराफी की प्रमुख भूमिकाएं इस प्रकार हैं:-
- 2016 से वे ईरान के शिया मदरसों के प्रमुख के रूप में कार्य कर रहे हैं।
- वे अल-मुस्तफा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी के पूर्व अध्यक्ष रह चुके हैं, जो विश्व स्तर पर शिया मौलवियों को प्रशिक्षण देने वाला प्रमुख संस्थान है।
- 2019 से वे Guardian Council के छह न्यायविद सदस्यों में शामिल हैं, जो कानून और चुनावी उम्मीदवारों की इस्लामी कानून और संविधान के अनुरूपता की जांच करता है।
- वे Assembly of Experts के उपाध्यक्ष भी हैं, जो सुप्रीम लीडर का चयन और उनकी निगरानी करता है।
- 2013 के आसपास से वे कोम में जुमे की नमाज के इमाम भी हैं।
- इसके अलावा वे सांस्कृतिक क्रांति की सर्वोच्च परिषद और कोम के मदरसा शिक्षकों के समाज जैसे कई महत्वपूर्ण निकायों से जुड़े रहे हैं।

