इबोला वायरस का बढ़ता खतरा: WHO ने घोषित की ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी
अफ्रीका के कई देशों में तेजी से फैल रहे इबोला वायरस ने एक बार फिर वैश्विक चिंता बढ़ा दी है। बढ़ते संक्रमण को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इसे ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित कर दिया है। वहीं अफ्रीका सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (Africa CDC) ने भी इसे महाद्वीपीय सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल करार दिया है।
भारत सरकार ने जारी की एडवाइजरी
इबोला संक्रमण के खतरे को देखते हुए भारत सरकार ने नागरिकों को कांगो, युगांडा और दक्षिण सूडान की यात्रा से बचने की सलाह दी है। सरकार लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है और स्वास्थ्य एजेंसियों के साथ समन्वय में काम कर रही है।
क्या है इबोला वायरस?
इबोला एक गंभीर और जानलेवा वायरस जनित बीमारी है, जो संक्रमित व्यक्ति के शरीर के तरल पदार्थों जैसे खून, पसीना, उल्टी और अन्य शारीरिक संपर्क के जरिए फैलती है। इस बार संक्रमण ‘बुंडीबुग्यो’ स्ट्रेन के कारण फैल रहा है, जो इबोला वायरस की एक प्रजाति है। विशेषज्ञों के अनुसार इस स्ट्रेन के लिए फिलहाल कोई प्रभावी वैक्सीन या विशेष इलाज उपलब्ध नहीं है।
500 से ज्यादा संदिग्ध मामले, 130 मौतें
WHO के अनुसार अफ्रीका में अब तक 500 से अधिक संदिग्ध मामले सामने आ चुके हैं, जबकि करीब 130 लोगों की मौत की आशंका जताई गई है। स्वास्थ्य एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में संक्रमण और तेजी से फैल सकता है।
अफ्रीका में भी स्वास्थ्य आपातकाल घोषित
अफ्रीका CDC ने कांगो और युगांडा में फैल रहे इबोला वायरस के बुंडीबुग्यो स्ट्रेन को सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित कर दिया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि समय रहते कड़े कदम नहीं उठाए गए तो हालात गंभीर हो सकते हैं।
भारत ने भेजी मेडिकल सहायता
इस संकट के बीच भारत ने अफ्रीकी देशों की मदद के लिए मेडिकल सप्लाई और सुरक्षा उपकरणों की पहली खेप रवाना की है। भारत सरकार ने कहा है कि वह इस स्वास्थ्य संकट में अफ्रीका के साथ खड़ी है और जरूरी सहयोग जारी रखा जाएगा।
