पश्चिम बंगाल का नाम बदलने की तैयारी! बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य का बड़ा बयान- जल्द आएगा बिल

कोलकाता। क्या देश के पूर्वी राज्य पश्चिम बंगाल की पहचान अब एक नए नाम से होने जा रही है? राज्य के नामकरण को लेकर दशकों से चल रही बहस के बीच भारतीय जनता पार्टी (BJP) की पश्चिम बंगाल इकाई के प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने एक ऐसा सनसनीखेज दावा किया है जिसने राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है। समिक भट्टाचार्य के अनुसार, राज्य सरकार बहुत जल्द विधानसभा में एक आधिकारिक विधेयक (बिल) पेश करने जा रही है, जिसके जरिए राज्य का नाम ‘पश्चिम बंगाल’ से बदलकर ‘पश्चिम बंग’ करने का विधिवत प्रस्ताव रखा जाएगा।

‘पश्चिम बंग’ नाम ही क्यों? इतिहास से जोड़ने का तर्क

कूचबिहार में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान समिक भट्टाचार्य ने इस संभावित बदलाव के पीछे का तर्क स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि राज्य को उसकी मूल ऐतिहासिक जड़ों और सांस्कृतिक अस्मिता से जोड़ने के उद्देश्य से यह नाम प्रस्तावित किया जा रहा है। भट्टाचार्य ने कहा, “अब आपको ‘बांग्ला’ या ‘पश्चिम बंगाल’ जैसे नामों का इस्तेमाल नहीं करना पड़ेगा। राज्य सरकार बहुत ही जल्द, संभवतः विधानसभा के मौजूदा सत्र में ही, हमारे राज्य का नाम बदलकर ‘पश्चिम बंग’ करने के लिए एक बिल पेश करेगी। यह नया नाम पूरी तरह से हमारे गौरवशाली इतिहास के अनुरूप होगा।”

वाराणसी में ‘पश्चिम बंग भवन’ से कैसे जुड़ा नाम बदलने का तार?

यह पूरा मामला तब चर्चा में आया जब पत्रकारों ने उत्तर प्रदेश के धार्मिक शहर वाराणसी में ‘पश्चिम बंग भवन’ बनाए जाने की योजना को लेकर सवाल किया। इस पर स्थिति साफ करते हुए बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने बताया कि राज्य के संस्कृति एवं पर्यटन विभाग ने केंद्र सरकार और कूचबिहार के राजपरिवार के वंशजों के साथ मिलकर बाबा विश्वनाथ की नगरी वाराणसी में ‘पश्चिम बंग भवन’ के निर्माण का एक बड़ा खाका तैयार किया है। इसी भवन के नामकरण के संदर्भ में उन्होंने राज्य का नाम बदलने वाले आगामी बिल की जानकारी साझा की।

क्या विधानसभा के इसी सत्र में लग जाएगी मुहर?

समिक भट्टाचार्य के इस दावे के बाद अब सभी की निगाहें राज्य विधानसभा के आगामी घटनाक्रम पर टिक गई हैं। लंबे समय से राज्य के नाम को लेकर अलग-अलग प्रस्ताव केंद्र और राज्य के बीच चर्चा का विषय रहे हैं, लेकिन अब ‘पश्चिम बंग’ नाम पर सर्वसम्मति बनने और इसके लिए आधिकारिक कानूनी प्रक्रिया शुरू होने की बात सामने आने से सियासी गलियारों में यह सवाल गहरा गया है कि क्या वाकई इसी सत्र में राज्य को उसकी नई औपचारिक पहचान मिल जाएगी।

 

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