‘JCB आ गई है, सब पहुंचो’: उज्जैन में शाही मस्जिद पर अफवाह फैलाकर बवाल कराने वाले 5 इंफ्लुएंसर चिन्हित
उज्जैन। मध्य प्रदेश के धार्मिक शहर उज्जैन में ऐतिहासिक शाही मस्जिद के हिस्से को हटाने को लेकर हुए पथराव और हिंसक उपद्रव के मामले में पुलिस ने डिजिटल स्तर पर बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। जमीनी स्तर पर पत्थरबाजी करने वालों की धरपकड़ के साथ-साथ पुलिस अब उन तत्वों पर शिकंजा कस रही है, जिन्होंने सोशल मीडिया पर भ्रामक वीडियो और भड़काऊ रील डालकर भारी भीड़ जुटाई और कानून-व्यवस्था को संकट में डाला। पुलिस जांच में यह बात खुलकर सामने आई है कि पूरी घटना से ठीक एक रात पहले सुनियोजित तरीके से यह झूठी अफवाह फैलाई गई थी कि प्रशासन मस्जिद को ध्वस्त करने के लिए भारी मशीनरी लेकर पहुंच चुका है।
सहमति के बावजूद सोशल मीडिया पर फैलाई गई झूठी अफवाह
वर्ष 2028 में आयोजित होने वाले भव्य सिंहस्थ महाकुंभ की तैयारियों के तहत उज्जैन शहर में बुनियादी ढांचे के विकास और मुख्य मार्गों के चौड़ीकरण का कार्य युद्धस्तर पर जारी है। इसी योजना के तहत कंठाल चौराहे से गोपाल मंदिर के बीच के मार्ग को लगभग 15 मीटर तक चौड़ा किया जाना है, जिसकी जद में आने वाले मकानों, दुकानों और धार्मिक संरचनाओं के अग्रिम हिस्सों को हटाया जा रहा है। इस विकास कार्य के लिए प्रशासन, नगर निगम और शाही मस्जिद कमेटी के बीच बाकायदा शांतिपूर्ण वार्ता संपन्न हुई थी, जिसमें कमेटी ने सड़क के दायरे में आ रहे 3 से 3.5 फीट हिस्से को स्वयं हटाने पर पूर्ण सहमति दी थी। इसके बावजूद सोशल मीडिया पर कुछ असामाजिक तत्वों ने यह फर्जी दावा प्रचारित कर दिया कि पूरी मस्जिद को जेसीबी से ढहाया जा रहा है, जिससे इलाके में तनाव गहरा गया।
वीडियो में भीड़ जुटाने की अपील, साजिद और इमरान समेत 5 चिन्हित
पुलिस की साइबर जांच में कई आपत्तिजनक वीडियो फुटेज मिले हैं। इनमें साजिद खान और इमरान नाम के दो युवक सीधे तौर पर लोगों को उकसाते दिखे। एक वीडियो में साजिद कहता नजर आता है कि मौके पर जेसीबी पहुंच चुकी है और 27 सितंबर की सुबह सभी लोग मस्जिद पर इकट्ठा हों। वहीं इमरान नामक युवक ने मस्जिद के बाहर का दृश्य दिखाते हुए दावा किया कि पुलिस पोकलेन मशीन लेकर खड़ी है और लोग तुरंत वहां पहुंचें। इसके अतिरिक्त गुलरेज खान, बिल्लू पठान और आरिफ पठान नामक सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स द्वारा भी इसी प्रकार की भड़काऊ रील तैयार कर प्रसारित करने की पुष्टि हुई है। इन पोस्ट्स के वायरल होते ही बड़ी संख्या में लोग मस्जिद के पास जमा हो गए और देखते ही देखते धरना पथराव में तब्दील हो गया।
विकास के दायरे में सीएम का पुश्तैनी मकान भी, अब तक हटे 20 मंदिर
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सड़क चौड़ीकरण की यह पूरी प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और गैर-भेदभावपूर्ण है। इस विकास कार्य की जद में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का पुश्तैनी मकान और उनकी बहन का आवास तक आया है, जिसे नियमपूर्वक हटाया गया। पूरे क्षेत्र में कुल 80 धार्मिक ढांचों को स्थानांतरित अथवा उनके आगे के हिस्सों को हटाया जाना प्रस्तावित है, जिनमें से अब तक करीब 20 मंदिरों को हटाया जा चुका है। जिस मार्ग पर शाही मस्जिद स्थित है, वहां भी सड़क निर्माण को सुगम बनाने के लिए 5 मंदिरों के हिस्सों को स्वयं स्थानीय लोगों और प्रबंधन ने सहयोग करते हुए हटाया है, ताकि जनहित के इस प्रोजेक्ट में कोई बाधा न आए।
दो हजार जवानों की तैनाती, 15 गिरफ्तार और 100 से अधिक प्रोफाइल बंद
घटना वाले दिन मस्जिद के बाहर जुटी अनियंत्रित भीड़ द्वारा पुलिस बल पर अचानक किए गए पथराव के बाद सुरक्षा बलों को हल्का लाठीचार्ज कर स्थिति पर नियंत्रण पाना पड़ा था। हालात की संवेदनशीलता को देखते हुए क्षेत्र में तत्काल लगभग 2,000 पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई, जिसके बाद शांति बहाल हो सकी। मामले में अब तक 15 उपद्रवियों को विधिवत गिरफ्तार किया जा चुका है। इसके साथ ही साइबर सेल की सक्रियता से विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से 100 से ज्यादा आपत्तिजनक और भ्रामक पोस्ट्स को डिलीट कराया गया है तथा नफरत व अफवाह फैलाने वाले 100 से अधिक इंस्टाग्राम अकाउंट्स को पूरी तरह ब्लॉक कर दिया गया है। पुलिस का कहना है कि माहौल बिगाड़ने की साजिश रचने वाले किसी भी तत्व को बख्शा नहीं जाएगा।
